लखनऊ: यूपी विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच बहुजन समाज पार्टी (BSP) ने अपने संगठन और चुनावी रणनीति में सामाजिक संतुलन को प्रमुखता देना शुरू कर दिया है। पार्टी विभिन्न सामाजिक वर्गों, खासकर सवर्ण समुदायों और अन्य समूहों को प्रतिनिधित्व देने पर जोर दे रही है।
बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि उम्मीदवारों के चयन में सामाजिक भागीदारी और संगठनात्मक सक्रियता को महत्व दिया जा रहा है। BSP नेतृत्व का दावा है कि उसकी राजनीति का आधार सभी वर्गों को साथ लेकर चलना और उन्हें राजनीतिक भागीदारी देना रहा है।
पार्टी के अनुसार, ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य सहित विभिन्न समुदायों के लोगों को संगठन और चुनावी प्रक्रिया में अवसर देने की रणनीति पर काम किया जा रहा है। BSP का मानना है कि व्यापक सामाजिक समर्थन के आधार पर ही मजबूत राजनीतिक विकल्प तैयार किया जा सकता है।
बसपा प्रमुख मायावती का कहना है कि बीएसपी दूसरी पार्टियों की तरह कुछ लोगों को ’लॉलीपाप’ थमाने की संकीर्ण व स्वार्थ की राजनीति नहीं करती है बल्कि पूरे समाज के हित व कल्याण की चिन्ता करना अपना संवैधानिक कर्तव्य समझती है और इसीलिये बी.एस.पी. की नीति व कार्यक्रम जनहित व जनकल्याण तथा अपराध नियंत्रण व क़ानून व्यवस्था के मामले में भी देश व जनहित में बेहतरीन होते हैं।
साथ ही पार्टी ने कानून-व्यवस्था, जनकल्याण और सामाजिक समरसता जैसे मुद्दों को भी अपनी प्राथमिकताओं में शामिल बताया है। आगामी चुनावों को देखते हुए BSP विभिन्न वर्गों के बीच अपनी पहुंच बढ़ाने और संगठन को मजबूत करने में जुटी हुई है।