बताया जा रहा है कि स्वास्थ्य मंत्री ने अस्पताल का औचक निरीक्षण किया था, जिसमें कई व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई। इसी दौरान प्राचार्य के अनुपस्थित मिलने के बाद मामले को गंभीरता से लिया गया। इसके बाद विभागीय स्तर पर कार्रवाई करते हुए नेतृत्व में बदलाव का निर्णय लिया गया।
स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में बेहतर प्रबंधन, समयबद्ध उपस्थिति और मरीजों को गुणवत्तापूर्ण सुविधाएं उपलब्ध कराना सर्वोच्च प्राथमिकता है। नए प्राचार्य के रूप में डॉ. गीता सिन्हा के सामने अस्पताल की व्यवस्थाओं को और सुदृढ़ करने की चुनौती होगी।
इस कार्रवाई को स्वास्थ्य सेवाओं में अनुशासन और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। विभाग ने संकेत दिए हैं कि लापरवाही या कर्तव्य निर्वहन में कमी पाए जाने पर आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।