बलरामपुर। प्रसव पीड़ा होने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सादुल्लानगर पहुंची 27 वर्षीय गर्भवती महिला और उसके गर्भस्थ शिशु की मौत के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। मृतका के पति ने सीएचसी में तैनात एक संविदा चिकित्सक पर सरकारी अस्पताल से निजी अस्पताल भेजने का आरोप लगाते हुए पुलिस को तहरीर दी है। मामले को लेकर स्वास्थ्य विभाग और पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।

कुरुथुवा खानपुर निवासी अनिल कुमार ने पुलिस को दी गई तहरीर में आरोप लगाया है कि उनकी पत्नी ममता देवी को 24 जून को प्रसव पीड़ा होने पर 102 एंबुलेंस से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सादुल्लानगर लाया गया था। आरोप है कि वहां मौजूद संविदा चिकित्सक डॉ. जमीर अहमद ने उन्हें अपने निजी अस्पताल एच.एफ. हेल्थ केयर हॉस्पिटल ले जाने की सलाह दी। पति का आरोप है कि निजी अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी पत्नी की हालत बिगड़ गई और बाद में उसकी तथा गर्भ में पल रहे बच्चे की मौत हो गई।
घटना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। 27 वर्षीय ममता देवी अपने पीछे दो मासूम बेटे अभि (6 वर्ष) और अंकुर (4 वर्ष) को छोड़ गई हैं। मां की मौत के बाद दोनों बच्चों के सिर से ममता का साया उठ गया है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
मामले में सीएचसी सादुल्लानगर के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजयभान ने बताया कि महिला को दूसरी बार अस्पताल लाए जाने तक उसकी रास्ते में ही मौत हो चुकी थी। अस्पताल पहुंचने पर उसे डेड ब्रॉट घोषित कर दिया गया। वहीं, महिला को निजी अस्पताल भेजे जाने और लगाए गए अन्य आरोपों के संबंध में उन्होंने जांच के बाद ही कुछ कहने की बात कही।
उधर थाना प्रभारी सत्येंद्र वर्मा ने बताया कि मामले में तहरीर प्राप्त हुई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।
घटना के बाद क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। लोगों का कहना है कि यदि सीएचसी में प्रसव और आपातकालीन उपचार की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं तो मरीजों को निजी अस्पतालों की ओर क्यों भेजा जाता है। वहीं, पूर्व में भी निजी अस्पतालों को लेकर सामने आए विवादों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई न होने पर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं।
रमेश कुमार शर्मा।गौरवशाली भारत