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14 देशों की पुलिस को चकमा देने वाला विदेशी महाराजगंज में गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के सोनौली बॉर्डर पर पकड़े गए एक विदेशी नागरिक की पहचान और आपराधिक गतिविधियों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शुरुआती पूछताछ में खुद को अमेरिकी एजेंट बताने वाला यह व्यक्ति जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित अपराधी निकला। जांच एजेंसियों के मुताबिक उसका असली नाम जॉर्डन जोसेफ […]

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  • July 25, 2026 12:49 pm IST, Published 1 hour ago

उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले के सोनौली बॉर्डर पर पकड़े गए एक विदेशी नागरिक की पहचान और आपराधिक गतिविधियों को लेकर चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। शुरुआती पूछताछ में खुद को अमेरिकी एजेंट बताने वाला यह व्यक्ति जांच के दौरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वांछित अपराधी निकला। जांच एजेंसियों के मुताबिक उसका असली नाम जॉर्डन जोसेफ पीटर फीटज पैट्रिक है और वह ब्रिटेन के न्यूनेटोन का रहने वाला है।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी ने अपनी असली पहचान छिपाने के लिए कई फर्जी दस्तावेजों और अलग-अलग नामों का इस्तेमाल किया। जांच में सामने आया कि वह लंबे समय से विभिन्न देशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गुमराह करता रहा और करीब 14 देशों की पुलिस को चकमा देने में सफल रहा। उसके खिलाफ कई देशों में गंभीर आपराधिक मामलों की जानकारी सामने आई है।

जांच में यह भी पता चला कि आरोपी थाईलैंड में दुष्कर्म के एक मामले में सजा काट चुका था। सजा पूरी होने के बाद जब उसे उसके देश वापस भेजने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया। इसके बाद वह अलग-अलग देशों में फर्जी पहचान के सहारे घूमता रहा और अपनी वास्तविक पहचान छिपाता रहा।

भारतीय एजेंसियों के अनुसार, आरोपी पहले दिल्ली में भी पुलिस के हत्थे चढ़ा था, लेकिन वहां से भी फरार होने में कामयाब हो गया। बाद में वह नेपाल सीमा से सटे उत्तर प्रदेश के सोनौली क्षेत्र तक पहुंच गया। सीमा क्षेत्र में उसकी गतिविधियां संदिग्ध मिलने पर सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने पगडंडियों के रास्ते उसे पकड़ लिया।

पूछताछ के दौरान आरोपी खुद को अमेरिकी एजेंसी से जुड़ा अधिकारी बताता रहा, लेकिन जब उसके दस्तावेजों और डिजिटल रिकॉर्ड की जांच की गई तो उसके कई दावे झूठे निकले। जांच एजेंसियों का कहना है कि उसने अमेरिका में भी फर्जी नाम और पहचान का इस्तेमाल कर ड्राइविंग लाइसेंस बनवाया था। उसके पास मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की गहन जांच की जा रही है।

प्राथमिक जांच में आरोपी के कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी से जुड़े नेटवर्क से संबंध होने की भी जानकारी सामने आई है। पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि भारत में उसका उद्देश्य क्या था, वह किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसका संबंध किसी अंतरराष्ट्रीय आपराधिक गिरोह से भी है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए विभिन्न केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियां मिलकर जांच कर रही हैं। साथ ही आरोपी के बारे में संबंधित विदेशी एजेंसियों से भी सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जा रहा है, ताकि उसके आपराधिक इतिहास और अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

सोनौली बॉर्डर भारत-नेपाल सीमा का एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है, जहां सुरक्षा एजेंसियां लगातार निगरानी रखती हैं। इस गिरफ्तारी को सीमा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ बड़ी सफलता माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस ने कहा है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे की जांच में कई और महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

 

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