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ChatGPT ने बनाया SDM: बिना कोचिंग पहले प्रयास में BPSC परीक्षा पास कर बनीं श्रेया सात्विका

पटना। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली श्रेया सात्विका ने अपनी मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीक के सही उपयोग से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी लिख दी है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में श्रेया ने 291वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) पद के लिए चयन प्राप्त किया […]

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  • June 23, 2026 9:30 pm IST, Published 1 hour ago

पटना। बिहार की राजधानी पटना की रहने वाली श्रेया सात्विका ने अपनी मेहनत, लगन और आधुनिक तकनीक के सही उपयोग से एक प्रेरणादायक सफलता की कहानी लिख दी है। बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की 70वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में श्रेया ने 291वीं रैंक हासिल कर एसडीएम (Sub-Divisional Magistrate) पद के लिए चयन प्राप्त किया है। उनकी सफलता की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने किसी भी कोचिंग संस्थान का सहारा नहीं लिया और घर पर रहकर स्व-अध्ययन के माध्यम से यह उपलब्धि हासिल की।

श्रेया की सफलता आज उन हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गई है, जो सीमित संसाधनों के कारण कोचिंग नहीं कर पाते हैं। उन्होंने साबित कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, सही रणनीति अपनाई जाए और निरंतर मेहनत की जाए, तो बड़े से बड़ा सपना भी पूरा किया जा सकता है।

श्रेया ने अपनी तैयारी के दौरान पारंपरिक पुस्तकों के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीक का भी भरपूर उपयोग किया। उन्होंने बताया कि ChatGPT जैसे AI टूल्स ने उनकी पढ़ाई को अधिक व्यवस्थित और प्रभावी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। किसी विषय को समझने, नोट्स तैयार करने, उत्तर लेखन का अभ्यास करने और करंट अफेयर्स से जुड़े प्रश्नों का विश्लेषण करने में उन्हें इस तकनीक से काफी मदद मिली।

उनके अनुसार, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सबसे बड़ी चुनौती सही दिशा और समय प्रबंधन होता है। ChatGPT और अन्य ऑनलाइन संसाधनों की मदद से उन्होंने कठिन विषयों को सरल भाषा में समझा तथा अपने कमजोर पक्षों पर विशेष ध्यान दिया। इससे उनकी तैयारी अधिक केंद्रित और परिणामकारी बनी।

श्रेया ने बताया कि उन्होंने प्रतिदिन एक निश्चित समय-सारणी के अनुसार अध्ययन किया। प्रारंभिक परीक्षा से लेकर मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू तक उन्होंने हर चरण के लिए अलग रणनीति बनाई। नियमित मॉक टेस्ट, उत्तर लेखन अभ्यास और समसामयिक घटनाओं पर विशेष ध्यान उनकी सफलता के प्रमुख आधार रहे।

उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों में खुशी का माहौल है। परिवार ने हमेशा उनका मनोबल बढ़ाया और उन्हें अपने लक्ष्य की ओर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। श्रेया का मानना है कि परिवार का सहयोग और आत्मविश्वास किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में सफलता के लिए बेहद आवश्यक है।

आज जब अधिकांश छात्र महंगी कोचिंग और बड़े शहरों की ओर रुख करते हैं, तब श्रेया की सफलता यह संदेश देती है कि डिजिटल युग में गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री और सही मार्गदर्शन ऑनलाइन भी उपलब्ध है। आवश्यकता केवल अनुशासन, समर्पण और निरंतर प्रयास की होती है।

श्रेया सात्विका की कहानी उन सभी अभ्यर्थियों के लिए प्रेरणा है जो प्रशासनिक सेवाओं में करियर बनाने का सपना देखते हैं। उनकी सफलता यह साबित करती है कि मेहनत, आत्मविश्वास और तकनीक का संतुलित उपयोग किसी भी लक्ष्य को हासिल करने में मददगार साबित हो सकता है।

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