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उद्घाटन के 96 घंटे बाद ही फटा 26 करोड़ का पुल! तस्वीरों ने खोली निर्माण की पोल?

बक्सर। बिहार के बक्सर जिले में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) में उद्घाटन के महज 96 घंटे बाद दरारें सामने आने से राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर पुल की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें […]

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  • July 19, 2026 10:32 pm IST, Published 20 hours ago

बक्सर। बिहार के बक्सर जिले में करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) में उद्घाटन के महज 96 घंटे बाद दरारें सामने आने से राज्य में निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोशल मीडिया पर पुल की तस्वीरें और वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिनमें पुल के एक हिस्से में गहरी दरार साफ दिखाई दे रही है। इस घटना के बाद विपक्ष ने राज्य सरकार पर भ्रष्टाचार और लापरवाही के आरोप लगाए हैं, जबकि संबंधित विभाग ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं।

बताया जा रहा है कि बक्सर-इटाढ़ी रेलवे ओवर ब्रिज का निर्माण लंबे इंतजार के बाद पूरा हुआ था। इस परियोजना पर लगभग 26 करोड़ 40 लाख रुपये खर्च किए गए थे। स्थानीय लोगों को उम्मीद थी कि पुल शुरू होने से वर्षों पुरानी जाम की समस्या समाप्त होगी और आवागमन सुगम हो जाएगा। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद पुल में आई दरार ने लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

उद्घाटन के कुछ दिन बाद सामने आई दरार

स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का उद्घाटन होने के बाद जब नियमित रूप से वाहनों का आवागमन शुरू हुआ, तभी पुल के ऊपरी हिस्से में दरार दिखाई दी। धीरे-धीरे इसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने लगे। लोगों का कहना है कि यदि इतने कम समय में पुल की यह स्थिति हो गई है तो भविष्य में इसकी मजबूती को लेकर गंभीर आशंकाएं पैदा होना स्वाभाविक है।

घटना की जानकारी मिलते ही संबंधित अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। सुरक्षा के मद्देनजर पुल के प्रभावित हिस्से पर आवाजाही सीमित करने और तकनीकी जांच शुरू करने की प्रक्रिया भी तेज कर दी गई।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

पुल में आई दरार के बाद सबसे बड़ा सवाल निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर उठ रहा है। स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद निर्माण मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य गुणवत्तापूर्ण होता तो उद्घाटन के कुछ दिनों के भीतर इस तरह की स्थिति पैदा नहीं होती।

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इस घटना को सरकारी परियोजनाओं में कथित भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है। वहीं कई नागरिक संगठनों ने दोषी अधिकारियों और निर्माण एजेंसी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई है।

प्रशासन ने शुरू कराई जांच

घटना के बाद संबंधित विभाग ने तकनीकी विशेषज्ञों की टीम को मौके पर भेजकर पुल की स्थिति का आकलन शुरू कराया है। अधिकारियों का कहना है कि प्रारंभिक जांच में यह पता लगाया जाएगा कि दरार सामान्य तकनीकी कारणों से आई है या निर्माण में किसी प्रकार की गंभीर कमी रही है।

विभागीय अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में निर्माण एजेंसी की लापरवाही या गुणवत्ता में कमी सामने आती है तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी और दोषियों की जिम्मेदारी तय होगी।

पहले भी उठ चुके हैं सवाल

बिहार में पिछले कुछ वर्षों के दौरान कई पुलों और निर्माण परियोजनाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं। विभिन्न जिलों में पुलों के क्षतिग्रस्त होने या निर्माण के दौरान तकनीकी खामियों की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों ने सार्वजनिक निर्माण कार्यों की निगरानी और गुणवत्ता नियंत्रण व्यवस्था पर बहस तेज कर दी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी पुल के निर्माण में डिजाइन, सामग्री की गुणवत्ता, तकनीकी परीक्षण और नियमित निगरानी बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि इनमें से किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती जाती है तो भविष्य में गंभीर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है।

स्थानीय लोगों में नाराजगी

पुल में आई दरार के बाद स्थानीय लोगों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि वर्षों तक इंतजार करने के बाद उन्हें बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब पुल की मजबूती पर ही सवाल खड़े हो गए हैं।

स्थानीय व्यापारियों और वाहन चालकों का कहना है कि यदि पुल को फिर से मरम्मत या पुनर्निर्माण के लिए बंद किया जाता है तो आम लोगों को एक बार फिर जाम और लंबे वैकल्पिक मार्गों की समस्या का सामना करना पड़ेगा।

विपक्ष ने सरकार को घेरा

घटना के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि करोड़ों रुपये की परियोजनाओं में गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की जा रही है। विपक्ष ने आरोप लगाया कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी के कारण इस तरह की घटनाएं सामने आ रही हैं। विपक्ष ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

विशेषज्ञों की राय

सिविल इंजीनियरिंग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी पुल में दरार दिखाई देने पर तुरंत तकनीकी जांच आवश्यक होती है। हर दरार संरचनात्मक रूप से खतरनाक हो, यह जरूरी नहीं है, लेकिन बिना विस्तृत जांच के किसी निष्कर्ष पर पहुंचना भी उचित नहीं होगा। विशेषज्ञों के अनुसार जांच रिपोर्ट के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि समस्या सतही है या संरचना की मजबूती से जुड़ी हुई है।

अब सभी की नजर विभागीय जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि जांच में निर्माण में अनियमितता या घटिया सामग्री के उपयोग की पुष्टि होती है तो संबंधित एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो सकती है। साथ ही पुल की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक मरम्मत या पुनर्निर्माण का निर्णय भी लिया जाएगा।

फिलहाल प्रशासन का कहना है कि लोगों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और जांच पूरी होने तक आवश्यक एहतियाती कदम उठाए जाएंगे। वहीं स्थानीय लोग उम्मीद कर रहे हैं कि मामले की निष्पक्ष जांच हो और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कड़ी निगरानी रखी जाए।

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