लखनऊ राजधानी लखनऊ के अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद बेसिक शिक्षा विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। विभाग ने प्रदेश के सभी परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए कमर कस ली है। इसके तहत राज्य के करीब 1.33 लाख स्कूलों में पढ़ रहे 1.48 करोड़ विद्यार्थियों की सुरक्षा के लिए अग्नि सुरक्षा के उपायों को कड़ाई से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
बेसिक शिक्षा विभाग ने सभी जिलों को मध्याह्न भोजन योजना (मिड-डे मील) के सुरक्षित संचालन को लेकर विशेष गाइडलाइन जारी की है। निर्देशों के मुताबिक, अब प्रत्येक विद्यालय के रसोईघर में कार्यशील अग्निशमन यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) का होना अनिवार्य होगा। केवल यंत्र लगाना ही काफी नहीं होगा, बल्कि भोजन बनाने वाले रसोइयों को इन उपकरणों को चलाने का बाकायदा प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) भी दिया जाएगा ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
हादसों की आशंका को शून्य करने के लिए विभाग ने निम्नलिखित कड़े कदम उठाने के निर्देश दिए हैं:
नियमित चेकिंग: स्कूलों की रसोई में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर, रेगुलेटर और बर्नर स्टोव की नियमित रूप से जांच की जाएगी।
खराब उपकरण तुरंत बदलें: जांच के दौरान यदि कोई भी उपकरण खराब या जर्जर पाया जाता है, तो उसे तत्काल बदला जाएगा।
खाद्य सामग्री और एक्सपायरी डेट: मिड-डे मील के लिए आने वाली खाद्य सामग्री मानक के अनुरूप हो और उसकी एक्सपायरी डेट (समाप्ति तिथि) की भी नियमित जांच की जाए।
साफ-सफाई पर विशेष ध्यान: भोजन पकाने और परोसने वाले स्थान को पूरी तरह साफ-सुथरा रखने के साथ-साथ खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण के निर्देश दिए गए हैं। रसोईघर के भीतर और बाहर की स्वच्छता पर भी पैनी नजर रहेगी।
“परिषदीय विद्यालयों में बच्चों की सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए सभी स्कूलों में अग्नि सुरक्षा के मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।” > — प्रेम रंजन सिंह, अपर राज्य परियोजना निदेशक (समग्र शिक्षा)
इस नई पहल से न केवल स्कूली बच्चे सुरक्षित रहेंगे, बल्कि रसोइयों और स्कूल स्टाफ में भी सुरक्षा को लेकर जागरूकता बढ़ेगी।