अयोध्या। रामनगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी राजनीतिक और प्रशासनिक खबर सामने आ रही है। भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान राशि में हुई भारी हेराफेरी (चंदा चोरी विवाद) के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और संस्थापक ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उनके साथ ही मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव को भी मंदिर प्रबंधन की व्यवस्थाओं से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है।
यह ऐतिहासिक इस्तीफा उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपे जाने और इस मामले में हुई ताबड़तोड़ गिरफ्तारियों के तुरंत बाद आया है। बताया जा रहा है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा ने जांच को निष्पक्ष रखने के लिए ‘नैतिक आधार’ पर अपना पद छोड़ा है।
इस महाघोटाले को लेकर गुरुवार देर शाम ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन की तहरीर पर राम जन्मभूमि थाने में पहली नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कराई गई थी। इसके तुरंत बाद पुलिस और एसआईटी ने एक्शन लेते हुए चंपत राय के पूर्व ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव समेत 8 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
जेल भेजे गए आरोपियों के नाम:
रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव (चंपत राय का पूर्व ड्राइवर)
लवकुश मिश्रा (ट्रस्टी अनिल मिश्रा का रिश्तेदार)
अनुकल्प मिश्रा (लवकुश का जीजा/अनिल मिश्रा का रिश्तेदार)
मनीष यादव (टिन्नू यादव का भतीजा)
अविनाश शुक्ला
करुणेश पांडेय
सुभाष चंद्र श्रीवास्तव
रमाशंकर मिश्रा
आज शुक्रवार को सभी 8 आरोपियों का मेडिकल परीक्षण कराने के बाद उन्हें मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने सभी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत (जेल) में भेज दिया है।
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का यह मामला पहली बार 7 जून को सामने आया था, जिसके बाद समाजवादी पार्टी सहित विपक्ष ने इस पर कड़े सवाल उठाए थे। मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 13 जून को एक उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया गया था।
SIT ने 23 जून को अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी, जिसमें मंदिर के कैश काउंटिंग रूम और सिंगल-लॉक दान पेटियों के प्रबंधन में भारी लापरवाही की बात सामने आई। सीसीटीवी फुटेज और बैंक रिकॉर्ड खंगालने के बाद यह कार्रवाई की गई।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का बयान: > मुख्यमंत्री ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “आस्था के साथ खिलवाड़ किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं है। सनातन के मूल्यों और करोड़ों राम भक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाने वालों के खिलाफ हमारी सरकार जीरो टॉलरेंस (Zero Tolerance) की नीति पर काम करेगी। हम इस मामले में दूध का दूध और पानी का पानी करेंगे।”
चंपत राय के इस्तीफे और गिरफ्तारियों के बाद देश की सियासत भी पूरी तरह गरमा गई है:
संजय राउत (शिवसेना UBT): उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सीधे सवाल दागते हुए पूछा, “राम मंदिर के लिए उद्धव ठाकरे द्वारा दान की गई 4 किलो चांदी कहां गई? अब इसकी जवाबदेही तय करने का समय आ गया है।”
अरविंद केजरीवाल (आप): दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री ने आज रामलला के दर्शन करने के बाद कहा, “जिन्होंने यह महापाप किया है, उन्हें कड़ी से कड़ी सजा मिलनी चाहिए। यह एफआईआर सिर्फ दिखावा है; छोटे कर्मचारियों को मोहरा बनाकर बड़े चेहरों को बचाने की कोशिश की जा रही है।”
आगे क्या होगा? चंपत राय और अनिल मिश्रा के हटने के बाद अब श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पुनर्गठन (Reconstitution) की सुगबुगाहट तेज हो गई है। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय जल्द ही ट्रस्ट में नए चेहरों और नए पदाधिकारियों की नियुक्ति कर सकता है ताकि मंदिर प्रबंधन और वित्तीय व्यवस्थाओं को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जा सके।