ग्वालियर/धार: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने धार जिले के बहुचर्चित सरकारी इमामबाड़े को लेकर अहम अंतरिम आदेश जारी किया है। अदालत ने जिला प्रशासन को निर्देश दिया है कि विवादित सरकारी इमामबाड़े की चाबियां 24 घंटे के भीतर मुस्लिम समुदाय के याचिकाकर्ता को सौंप दी जाएं, ताकि आगामी पांच दिनों तक मुहर्रम के धार्मिक कार्यक्रमों के लिए परिसर का उपयोग किया जा सके। हाईकोर्ट का यह आदेश मुहर्रम के अवसर पर ताजिया निर्माण और उससे जुड़े धार्मिक आयोजनों के मद्देनजर दायर याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया।
ग्वालियर खंडपीठ की डिवीजन बेंच, जिसमें जस्टिस सुबोध अभ्यंकर और जस्टिस जय कुमार पिल्लई शामिल थे, ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह अंतरिम राहत प्रदान की। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीमित अवधि के लिए इमामबाड़े का उपयोग करने की अनुमति देने से राज्य सरकार या प्रशासन को किसी प्रकार की अपूरणीय क्षति नहीं होगी।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से कहा गया कि इमामबाड़ा लंबे समय से मुस्लिम समुदाय के धार्मिक और सामाजिक आयोजनों का प्रमुख केंद्र रहा है। विशेष रूप से मुहर्रम के दौरान यहां ताजिया तैयार किए जाते हैं और शोक सभाओं सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। ऐसे में परिसर उपलब्ध नहीं होने से धार्मिक परंपराओं के निर्वहन में कठिनाई उत्पन्न होगी।
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को यह भी बताया कि मुहर्रम का पर्व निकट होने के कारण समय अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि समय पर परिसर उपलब्ध नहीं कराया गया तो वर्षों से चली आ रही धार्मिक परंपराएं प्रभावित होंगी। इस आधार पर अदालत से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की गई थी।
दूसरी ओर, प्रशासन की ओर से भी अपना पक्ष रखा गया। हालांकि अदालत ने सभी परिस्थितियों पर विचार करते हुए यह माना कि सीमित अवधि के लिए परिसर का उपयोग करने की अनुमति देना न्यायोचित होगा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि संबंधित याचिकाकर्ता को पांच दिनों तक इमामबाड़े का उपयोग करने दिया जाए और इसके लिए आवश्यक सहयोग प्रशासन सुनिश्चित करे।
अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि यह व्यवस्था फिलहाल अंतरिम प्रकृति की है और इससे मामले के अंतिम निर्णय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। यानी यह आदेश केवल मुहर्रम के दौरान धार्मिक गतिविधियों को सुचारु रूप से संपन्न कराने के उद्देश्य से दिया गया है। मामले की विस्तृत सुनवाई आगे भी जारी रहेगी।
धार का यह सरकारी इमामबाड़ा लंबे समय से प्रशासन और स्थानीय समुदाय के बीच चर्चा का विषय रहा है। मुहर्रम के दौरान इसके उपयोग को लेकर समय-समय पर विवाद सामने आते रहे हैं। इस बार भी धार्मिक कार्यक्रमों के आयोजन को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया गया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने यह अंतरिम राहत प्रदान की।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने अपने आदेश में धार्मिक स्वतंत्रता और सार्वजनिक व्यवस्था के बीच संतुलन बनाने का प्रयास किया है। न्यायालय ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि धार्मिक आयोजन बिना किसी अनावश्यक बाधा के संपन्न हों, साथ ही प्रशासनिक व्यवस्था भी प्रभावित न हो।
हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद अब धार जिला प्रशासन पर 24 घंटे के भीतर आदेश का पालन करने की जिम्मेदारी होगी। प्रशासन को इमामबाड़े की चाबियां याचिकाकर्ता को सौंपनी होंगी ताकि निर्धारित अवधि तक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जा सकें।
स्थानीय स्तर पर इस फैसले को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। मुस्लिम समुदाय ने अदालत के आदेश का स्वागत किया है और इसे धार्मिक परंपराओं के सम्मान से जोड़कर देखा है। वहीं प्रशासन अब न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी में जुट गया है।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि जिला प्रशासन अदालत के निर्देशों का किस प्रकार पालन करता है और आगामी सुनवाई में इस विवाद पर हाईकोर्ट का अंतिम रुख क्या रहता है।