नई दिल्ली/वॉशिंगटन: मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। अमेरिकी सेना ने शुक्रवार देर रात ईरान से जुड़े कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई हाल ही में हुए उन हमलों के जवाब में की गई है, जिनमें अमेरिका से जुड़े हितों और जहाजों को निशाना बनाया गया था। वहीं ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए उचित समय पर जवाब देगा।
अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार हमले का मुख्य उद्देश्य उन सैन्य ठिकानों को निशाना बनाना था, जहां से कथित तौर पर अमेरिकी हितों के खिलाफ गतिविधियों को संचालित किया जा रहा था। बताया गया कि लड़ाकू विमानों की मदद से कई सटीक हवाई हमले किए गए, जिनमें सैन्य ढांचे को नुकसान पहुंचा है। हालांकि दोनों देशों की ओर से नुकसान और हताहतों के संबंध में आधिकारिक आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।
अमेरिका का कहना है कि हाल के दिनों में मध्य पूर्व क्षेत्र में उसके सैन्य ठिकानों, नौसैनिक जहाजों और सहयोगी देशों के खिलाफ लगातार खतरे बढ़ रहे थे। विशेष रूप से 25 जून को होर्मुज जलडमरूमध्य के निकट एक वाणिज्यिक जहाज को निशाना बनाए जाने की घटना के बाद सुरक्षा एजेंसियों ने जवाबी कार्रवाई की योजना तैयार की थी। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक यह सैन्य अभियान उसी रणनीति का हिस्सा था।
दूसरी ओर ईरान ने अमेरिका के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि यह हमला अंतरराष्ट्रीय कानून और किसी भी देश की संप्रभुता के सिद्धांतों के खिलाफ है। ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यदि अमेरिका क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई जारी रखता है तो उसका जवाब भी उसी स्तर पर दिया जाएगा। ईरान ने अपने सैन्य बलों को हाई अलर्ट पर रखने की भी जानकारी दी है।
इस घटनाक्रम के बाद पूरे मध्य पूर्व में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। खाड़ी क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैन्य अड्डों पर अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है, जबकि कई देशों ने अपने नागरिकों को क्षेत्र की यात्रा के दौरान सावधानी बरतने की सलाह जारी की है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता इस बात को लेकर बढ़ गई है कि यदि दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे क्षेत्र की शांति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता टकराव वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर डाल सकता है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक है। यदि यहां तनाव बढ़ता है तो कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतों में तेजी देखने को मिल सकती है।
संयुक्त राष्ट्र सहित कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक बातचीत के जरिए विवाद सुलझाने की अपील की है। विश्लेषकों का कहना है कि सैन्य कार्रवाई के बजाय संवाद ही इस संकट का स्थायी समाधान हो सकता है। लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियां पूरे क्षेत्र को बड़े संघर्ष की ओर धकेल सकती हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार अमेरिका ने अपने अभियान में आधुनिक लड़ाकू विमानों और अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया। इस कार्रवाई का उद्देश्य सीमित सैन्य लक्ष्य हासिल करना बताया गया है, लेकिन ईरान की संभावित प्रतिक्रिया आने वाले दिनों में क्षेत्र की स्थिति तय करेगी। यदि जवाबी कार्रवाई होती है तो इसका असर केवल दोनों देशों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कई अन्य देशों की सुरक्षा और व्यापारिक गतिविधियां भी प्रभावित हो सकती हैं।
फिलहाल दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के अगले कदम पर टिकी हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, ऊर्जा क्षेत्र और वैश्विक कूटनीति पर इस घटनाक्रम का प्रभाव आने वाले दिनों में और स्पष्ट होगा। दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव ने एक बार फिर मध्य पूर्व को वैश्विक चिंता का केंद्र बना दिया है।