यौन अपराधियों पर नकेल: तमिलनाडु पुलिस का ‘स्पेक्ट्रम’ प्रोजेक्ट

अपराध के हिसाब से मिलेगी अपराधियों को ‘कलर कोडिंग’ मदुरै। तमिलनाडु पुलिस ने यौन अपराधियों (Sexual Offenders) की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक बेहद कड़ा और आधुनिक कदम उठाया है। पुलिस ने ‘स्पेक्ट्रम’ (SPECTRUM) नाम से एक विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत अब गैंगरेप के गंभीर आरोपी और किसी नाबालिग लड़की के […]

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  • June 29, 2026 9:22 am IST, Published 3 hours ago

अपराध के हिसाब से मिलेगी अपराधियों को ‘कलर कोडिंग’

मदुरै। तमिलनाडु पुलिस ने यौन अपराधियों (Sexual Offenders) की निगरानी और ट्रैकिंग के लिए एक बेहद कड़ा और आधुनिक कदम उठाया है। पुलिस ने ‘स्पेक्ट्रम’ (SPECTRUM) नाम से एक विशेष प्रोजेक्ट शुरू किया है, जिसके तहत अब गैंगरेप के गंभीर आरोपी और किसी नाबालिग लड़की के साथ भागने वाले युवा के साथ एक जैसा बर्ताव नहीं होगा। अपराधियों को उनके अपराध की गंभीरता और जोखिम (Risk Assessment) के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में बांटकर ट्रैक किया जाएगा।

इस प्रोजेक्ट को फिलहाल तमिलनाडु के साउथ जोन के 10 जिलों (जिसमें मदुरै, तिरुनेलवेली, तूतीकोरिन और कन्याकुमारी शामिल हैं) में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया गया है।

क्या है प्रोजेक्ट ‘स्पेक्ट्रम’?

‘स्पेक्ट्रम’ का मुख्य उद्देश्य यौन अपराधियों की प्रोफाइलिंग करना, उनके जोखिम का मूल्यांकन करना, उन्हें अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करना और उनकी एकीकृत निगरानी (Integrated Monitoring) करना है।

साउथ जोन के आईजी विजयेन्द्र बिदारी के मुताबिक, इस क्षेत्र में हर साल लगभग 1,500 से 2,000 यौन अपराध के मामले दर्ज होते हैं। इनमें कई मामले आपसी सहमति से जुड़े होते हैं लेकिन लड़की के नाबालिग होने के कारण पॉक्सो (POCSO) एक्ट के तहत आते हैं। वहीं, कुछ मामले बिना शारीरिक संपर्क वाले अपराधों (जैसे घूरना या पीछा करना) के होते हैं। ऐसे में असली और आदतन अपराधियों पर ध्यान केंद्रित करने के लिए यह वर्गीकरण बेहद जरूरी था।

अपराधियों की ‘कलर कोडेड’ 8 कैटगरी: समझें पूरा गणित

प्रोजेक्ट के तहत पुलिस ने करीब 15,000 अपराधियों की पहचान की है और उन्हें उनके अपराध के आधार पर अलग-अलग रंग के कोड दिए हैं:

रंग (Color Code) अपराधी की श्रेणी और अपराध का प्रकार
🔴 रेड (Red) गैंगरेप के आरोपी, सीरियल रेपिस्ट (आदतन बलात्कारी), और पॉक्सो के तहत बार-बार अपराध करने वाले सबसे खतरनाक लोग।
🟠 ऑरेंज (Orange) बार-बार छेड़छाड़ करने वाले, महिलाओं का पीछा करने वाले (Stalkers) और लगातार परेशान करने वाले अपराधी।
🔵 ब्लू (Blue) साइबर अपराधी, ऑनलाइन ग्रूमर्स, सेक्सटॉर्शन करने वाले और इंटरनेट के जरिए महिलाओं को प्रताड़ित करने वाले।
🟣 पर्पल (Purple) समलैंगिक (Same-Sex) डेटिंग ऐप्स (जैसे Grindr) के जरिए लोगों को ब्लैकमेल करने, फंसाने या धोखा देने वाले अपराधी।
ब्लैक (Black) मानव तस्करी (Human Trafficking), कमर्शियल सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन रैकेट और संगठित सेक्सुअल अपराध नेटवर्क चलाने वाले।
सिल्वर (Silver) इस श्रेणी में नाबालिगों (Juveniles) को रखा गया है, ताकि पुलिस माता-पिता के जरिए उनकी काउंसलिंग कर उनमें सुधार ला सके।

बायोमेट्रिक्स और टेक्नोलॉजी से होगी निगरानी

पुलिस केवल कागजों पर ही नहीं, बल्कि जमीन पर भी इन अपराधियों पर कड़ा पहरा दे रही है:

  • कड़ी निगरानी: रेड और ऑरेंज कैटेगरी के अपराधियों के पैरोल स्टेटस, उनकी जमानत रद्द करवाने और पुराने मामलों में जल्द सजा दिलाने पर फोकस है।

  • बीएनएसएस का इस्तेमाल: पुलिस ने अधिक जोखिम वाले अपराधियों से बांड भरवाने के लिए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।

  • मेजरमेंट कैप्चरिंग यूनिट (MCU): इस यूनिट के जरिए आरोपियों के बायोमेट्रिक्स (फिंगरप्रिंट, आइरिस/आंखों का स्कैन, हथेली के निशान, लंबाई और हाई-रिजॉल्यूशन तस्वीरें) स्टोर किए जा रहे हैं, ताकि भविष्य के अनसुलझे मामलों को सुलझाने में मदद मिल सके।

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