नई दिल्ली/यूरोप। पश्चिमी और मध्य यूरोप इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में है। लगातार बढ़ते तापमान ने आम जनजीवन के साथ-साथ सड़क और रेल जैसे महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर भी गंभीर असर डालना शुरू कर दिया है। कई देशों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है, जिसके कारण सड़कों की डामर सतह पिघलने लगी है और ट्राम एवं रेलवे की पटरियां गर्मी के कारण मुड़ने लगी हैं। इसके चलते कई स्थानों पर रेल सेवाएं प्रभावित हुई हैं, जबकि सड़क यातायात भी बाधित हुआ है।
फ्रांस, जर्मनी, स्पेन, इटली, बेल्जियम और अन्य यूरोपीय देशों में जारी हीटवेव ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार बढ़ते तापमान और जलवायु परिवर्तन के कारण भविष्य में इस तरह की चरम मौसम घटनाएं और अधिक देखने को मिल सकती हैं।
परिवहन व्यवस्था पर पड़ा सीधा असर
यूरोप के कई शहरों में ट्राम और रेलवे ट्रैक अत्यधिक गर्मी के कारण फैलने और टेढ़े होने लगे हैं। सुरक्षा कारणों से कई रेल मार्गों पर ट्रेनों की गति कम कर दी गई है, जबकि कुछ सेवाओं को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। सड़कों की डामर परत भी पिघलने लगी है, जिससे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार, जब तापमान लंबे समय तक अत्यधिक ऊंचा बना रहता है तो स्टील की रेल पटरियां फैल जाती हैं। यदि उनका विस्तार निर्धारित सीमा से अधिक हो जाए तो पटरियों के मुड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह डामर की सड़कें भी नरम होकर क्षतिग्रस्त होने लगती हैं।
बिजली और स्वास्थ्य सेवाओं पर बढ़ा दबाव
भीषण गर्मी के कारण एयर कंडीशनर और कूलिंग सिस्टम के अधिक उपयोग से बिजली की मांग में भी तेज वृद्धि दर्ज की गई है। कई क्षेत्रों में पावर ग्रिड पर अतिरिक्त दबाव बना हुआ है। वहीं अस्पतालों में हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और गर्मी से जुड़ी अन्य स्वास्थ्य समस्याओं के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
स्वास्थ्य विभागों ने बुजुर्गों, बच्चों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। लोगों से दोपहर के समय घरों से बाहर न निकलने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने और धूप से बचाव करने की अपील की गई है।
कई देशों में टूटे पुराने रिकॉर्ड
इस सप्ताह की शुरुआत में पश्चिमी यूरोप में शुरू हुई हीटवेव धीरे-धीरे मध्य और पूर्वी यूरोप तक फैल गई। कई क्षेत्रों में वर्षों पुराने तापमान रिकॉर्ड टूटने की खबरें सामने आई हैं। डेनमार्क में 1874 के बाद सबसे गर्म दिन दर्ज किए जाने की जानकारी मिली है। वहीं आर्कटिक सर्कल के निकट स्थित क्षेत्रों में भी सामान्य से कहीं अधिक तापमान रिकॉर्ड किया गया।
मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि यूरोप के उत्तरी हिस्सों में भी असामान्य गर्मी जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव का संकेत है।
जलवायु परिवर्तन बना बड़ी चुनौती
जलवायु विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में यूरोप में हीटवेव की घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता दोनों बढ़ी हैं। ग्रीनहाउस गैसों के बढ़ते उत्सर्जन और वैश्विक तापमान में वृद्धि के कारण मौसम का संतुलन लगातार बिगड़ रहा है। इसका असर केवल इंसानों पर ही नहीं बल्कि परिवहन, कृषि, ऊर्जा और पर्यावरण पर भी दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हालात से निपटने के लिए शहरों के इंफ्रास्ट्रक्चर को अधिक गर्मी सहने योग्य बनाना होगा। साथ ही कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे दीर्घकालिक उपायों पर तेजी से काम करना आवश्यक होगा।
प्रशासन ने जारी की चेतावनी
यूरोप के कई देशों की मौसम एजेंसियों ने आने वाले दिनों में भी अत्यधिक गर्मी जारी रहने की चेतावनी दी है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों को आवश्यक सावधानी बरतने, पर्याप्त पानी पीने, धूप में अनावश्यक रूप से बाहर न निकलने और सरकारी दिशानिर्देशों का पालन करने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि तापमान में जल्द राहत नहीं मिली तो परिवहन सेवाओं, बिजली आपूर्ति और स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव और बढ़ सकता है। फिलहाल यूरोप के अधिकांश देश इस अभूतपूर्व गर्मी से निपटने के लिए आपातकालीन तैयारियों में जुटे हुए हैं।