लखनऊ: समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के जन्मदिन पर उन्हें एक ऐसा संदेश मिला, जिसने प्रदेश की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी। उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने जन्मदिन की शुभकामनाएं तो दीं, लेकिन इसके साथ ही तीखे राजनीतिक तंज भी किए।
सोशल मीडिया पर जारी अपने संदेश में राजभर ने कहा कि उनके पास अखिलेश यादव को देने के लिए कोई भौतिक उपहार नहीं है, लेकिन उम्र और अनुभव के आधार पर वह उन्हें एक “बेशकीमती सलाह” देना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि अखिलेश को आरामदायक राजनीति छोड़कर जनता के बीच जाना चाहिए और गांव-देहात की वास्तविक परिस्थितियों को समझना चाहिए।
राजभर ने अपने संदेश में कहा कि केवल वातानुकूलित कमरों में बैठकर राजनीति करने से जनता की समस्याओं का वास्तविक आकलन नहीं किया जा सकता। उन्होंने सलाह दी कि गैर-यादव पिछड़ों, दलितों, गरीबों और वंचित वर्गों के बीच जाकर उनके जीवन और संघर्ष को समझना चाहिए। उनके अनुसार, प्रदेश की राजनीति को समझने का रास्ता गांवों की पगडंडियों से होकर गुजरता है।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री अखिलेश यादव जी को जन्मदिन की हार्दिक शुभकामनाएं। ईश्वर से आपके उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु की कामना करता हूं।
बहुत सोचा कि आपको उपहार में क्या दूं…आप ठहरे बड़े घर के बेटे, पिताजी पूर्व सीएम और रक्षामंत्री रहे, आप खुद पूर्व मुख्यमंत्री…
— Om Prakash Rajbhar (@oprajbhar) July 1, 2026
उन्होंने यह भी कहा कि शुरुआत में गांवों में घूमने और खेत-खलिहानों तक पहुंचने में कठिनाई हो सकती है, लेकिन जनता के बीच लगातार रहने से ही वास्तविक जनाधार तैयार होता है। राजभर ने अपने राजनीतिक अनुभव का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं भीषण गर्मी में लगातार गांव-गांव जाकर लोगों से संवाद करते हैं।
यह पहली बार नहीं है जब ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर सार्वजनिक रूप से निशाना साधा हो। हाल के दिनों में भी वह कई मंचों से समाजवादी पार्टी और उसके नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं। एनडीए के सहयोगी के रूप में उन्होंने आगामी विधानसभा चुनाव में गठबंधन की जीत का दावा भी दोहराया है।
राजभर के इस बयान को राजनीतिक विश्लेषक आगामी चुनावों से पहले विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। जन्मदिन के अवसर पर दिया गया यह संदेश अब सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बना हुआ है। उत्तर प्रदेश की राजनीति में जहां चुनावी तैयारियां तेज हो रही हैं, वहीं नेताओं के बीच ऐसे बयान आने वाले दिनों में सियासी माहौल को और गर्मा सकते हैं।