• होम
  • बिहार
  • बिहार में बढ़ेगा जनता पर खर्च का दबाव,हाईवे पर फिर देना होगा टोल

बिहार में बढ़ेगा जनता पर खर्च का दबाव,हाईवे पर फिर देना होगा टोल

बिहार में सरकार के हालिया फैसलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जमीन के सर्किल रेट में बढ़ोतरी और स्टेट हाईवे पर दोबारा टोल टैक्स लागू करने की तैयारी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इन दोनों फैसलों का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला माना जा रहा है। […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • May 19, 2026 1:21 pm IST, Published 20 hours ago

बिहार में सरकार के हालिया फैसलों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। जमीन के सर्किल रेट में बढ़ोतरी और स्टेट हाईवे पर दोबारा टोल टैक्स लागू करने की तैयारी को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। इन दोनों फैसलों का असर सीधे आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला माना जा रहा है। खासकर वे लोग जो घर बनाने, जमीन खरीदने या रोज सड़क मार्ग से सफर करने की योजना बना रहे हैं।

सरकार ने कई जिलों में जमीन के सर्किल रेट को संशोधित किया है। सर्किल रेट बढ़ने का मतलब यह है कि अब जमीन की खरीद-बिक्री पर अधिक पैसा खर्च करना पड़ेगा। रजिस्ट्री शुल्क और स्टांप ड्यूटी भी बढ़ जाएगी। इसका असर सबसे ज्यादा मध्यम वर्ग और छोटे निवेशकों पर दिखाई दे सकता है। पहले से ही सीमेंट, सरिया, ईंट और मजदूरी की कीमतों में बढ़ोतरी से निर्माण कार्य महंगा हो चुका है। अब जमीन की कीमत बढ़ने से घर बनाना और कठिन हो सकता है।

रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े लोगों का मानना है कि नए रेट लागू होने के बाद कई लोग फिलहाल जमीन खरीदने का फैसला टाल सकते हैं। खासकर छोटे शहरों और नगर क्षेत्रों में इसका असर अधिक देखने को मिल सकता है। हालांकि सरकार का कहना है कि बाजार मूल्य के हिसाब से सर्किल रेट में बदलाव जरूरी था, ताकि राजस्व में बढ़ोतरी हो सके और सरकारी रिकॉर्ड वास्तविक कीमतों के करीब आएं।

दूसरी ओर राज्य सरकार ने स्टेट हाईवे पर फिर से टोल वसूली शुरू करने की योजना बनाई है। जानकारी के मुताबिक सरकार आने वाले समय में करीब 16,500 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है। इसके लिए कई प्रमुख सड़कों को टोल सिस्टम के दायरे में लाया जाएगा। सड़क निर्माण और रखरखाव के लिए निजी कंपनियों की भागीदारी भी बढ़ाई जा सकती है।

यह फैसला इसलिए चर्चा में है क्योंकि पहले राज्य सरकार ने हाईवे से टोल हटाने का निर्णय लिया था। उस समय इसे जनता को राहत देने वाला कदम बताया गया था। लेकिन अब परिस्थितियां बदलने के साथ सरकार फिर से टोल व्यवस्था लागू करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। विपक्ष इस मुद्दे को लेकर सरकार पर हमला बोल रहा है और इसे जनता से अतिरिक्त वसूली का तरीका बता रहा है।

टोल टैक्स बढ़ने से ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर पड़ सकता है। माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में भी बढ़ोतरी हो सकती है। वहीं रोज सफर करने वाले लोगों का मासिक खर्च भी बढ़ेगा। खासकर नौकरीपेशा और छोटे व्यवसायियों को इसका असर महसूस हो सकता है।

सरकार का पक्ष है कि बेहतर सड़कें, नई परियोजनाएं और आधुनिक परिवहन व्यवस्था के लिए अतिरिक्त राजस्व जरूरी है। अधिकारियों के अनुसार टोल से मिलने वाली रकम का उपयोग सड़क नेटवर्क को मजबूत करने में किया जाएगा। लेकिन जनता के बीच यह सवाल भी उठ रहा है कि बढ़ते खर्च के दौर में नए आर्थिक बोझ से राहत कैसे मिलेगी। बिहार में इन फैसलों को लेकर अब राजनीतिक बहस तेज हो गई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा विधानसभा से लेकर सड़क तक चर्चा का विषय बना रह सकता है।

Advertisement