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कोर्ट के आदेश पर सरेंडर करेंगे, फिर बेल की उम्मीद:अनंत सिंह

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने जांच चार महीने के भीतर पूरी करने को कहा है। इससे मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

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Gauravshali Bharat News
  • October 30, 2026 4:10 pm IST, Published 29 minutes ago

पटना: बिहार के चर्चित दुलारचंद यादव हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट से जमानत रद्द होने के बाद मोकामा के विधायक अनंत सिंह की प्रतिक्रिया सामने आई है। शीर्ष अदालत के आदेश के बाद अनंत सिंह ने स्पष्ट किया है कि वह एक दिसंबर तक न्यायालय के निर्देशों का पालन करते हुए सरेंडर कर देंगे। उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा है और अदालत जो भी आदेश देगी, उसका पालन किया जाएगा। अनंत सिंह के इस बयान के बाद बिहार की राजनीति में एक बार फिर यह मामला चर्चा का विषय बन गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने दुलारचंद यादव हत्याकांड में अनंत सिंह को मिली जमानत रद्द करते हुए उन्हें एक दिसंबर तक आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया है। यह आदेश दुलारचंद यादव के पोते नीरज कुमार की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई के बाद आया। नीरज कुमार ने पटना हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें मार्च 2026 में अनंत सिंह को जमानत दी गई थी।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने कहा कि वह एक दिसंबर को सरेंडर कर देंगे। उन्होंने कहा, “हां, मैं सरेंडर कर दूंगा। मुझे न्यायपालिका पर भरोसा है। अदालत जब और जहां कहेगी, मैं वहां आत्मसमर्पण कर दूंगा।” उन्होंने यह भी साफ किया कि वह अदालत के आदेश से अलग कोई रास्ता नहीं अपनाएंगे। अनंत सिंह ने आगे कहा कि एक दिसंबर को जहां सरेंडर करने के लिए कहा जाएगा, वह वहां पहुंच जाएंगे। उनके मुताबिक, उन्हें न्यायालय के अलावा किसी अन्य संस्था या व्यक्ति के पास जाने की जरूरत नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि कानूनी प्रक्रिया के तहत आगे भी उन्हें राहत मिल सकती है। अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अदालत से दोबारा जमानत मिल जाएगी और वह घर लौट आएंगे।

इस पूरे मामले की शुरुआत दुलारचंद यादव की मौत से हुई थी। जानकारी के मुताबिक, बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान मोकामा क्षेत्र में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में चुनाव प्रचार चल रहा था। इसी दौरान दुलारचंद यादव और अनंत सिंह के काफिले आमने-सामने आ गए थे। दोनों पक्षों के बीच विवाद बढ़ने के बाद गोलीबारी और हिंसा की घटना सामने आई। इसी घटनाक्रम में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। घटना के बाद पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए अनंत सिंह समेत कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले में 80 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी भी सामने आई थी। आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया था।

घटना के बाद स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे थे और संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। मामले की जांच के दौरान दुलारचंद यादव की मौत को लेकर अलग-अलग तथ्य सामने आए। शुरुआती जानकारी में गोली लगने की बात कही गई थी, जबकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर गंभीर चोटों और वाहन की टक्कर से जुड़ी परिस्थितियों का भी उल्लेख हुआ। जांच एजेंसियां घटना के पूरे घटनाक्रम और उसमें शामिल लोगों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं। पटना हाईकोर्ट ने मार्च 2026 में अनंत सिंह को जमानत दे दी थी। हालांकि, मृतक दुलारचंद यादव के परिवार ने इस फैसले पर असहमति जताई और इसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। उनके पोते नीरज कुमार की याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने जमानत रद्द करने का फैसला सुनाया और आत्मसमर्पण के लिए एक दिसंबर की समयसीमा तय कर दी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की जांच को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। अदालत ने जांच चार महीने के भीतर पूरी करने को कहा है। इससे मामले की जांच और कानूनी कार्रवाई को समयबद्ध तरीके से आगे बढ़ाने की उम्मीद है। फिलहाल अनंत सिंह के बयान से यह स्पष्ट है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए निर्धारित समयसीमा में आत्मसमर्पण करने की तैयारी में हैं। हालांकि, उनकी आगे की कानूनी रणनीति और दोबारा जमानत मिलने की संभावना का फैसला अदालत में होने वाली सुनवाई और मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा। बिहार की राजनीति में प्रभाव रखने वाले अनंत सिंह के लिए यह मामला कानूनी और राजनीतिक दोनों दृष्टियों से अहम बन गया है।

 

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