नयी दिल्ली: Air India की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर संकट गहराता जा रहा है। एयरलाइन के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को भेजे एक संदेश में साफ कहा है कि जेट फ्यूल की तेज़ बढ़ती कीमतों, एयरस्पेस पाबंदियों और लंबे रूट्स ने कंपनी के ऑपरेशन का पूरा गणित बिगाड़ दिया है।
अप्रैल और मई में ही इसका असर दिखने लगा था, जब कई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या घटानी पड़ी। अब स्थिति और गंभीर हो गई है। विल्सन के मुताबिक, मौजूदा हालात में कई अंतरराष्ट्रीय रूट्स पर उड़ानें चलाना घाटे का सौदा बन चुका है।
एयरस्पेस पाबंदियों के कारण विमानों को लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है, जिससे ईंधन की खपत और ऑपरेटिंग लागत दोनों बढ़ गई हैं। इसके साथ ही जेट फ्यूल की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने एयरलाइन की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। हालात फिलहाल सुधरने के आसार नहीं दिख रहे। उन्होंने इसे “बेहद चुनौतीपूर्ण” बताते हुए कहा कि जून और जुलाई में भी उड़ानों के शेड्यूल में और कटौती करनी पड़ेगी।
इस फैसले का असर यात्रियों पर भी पड़ेगा, क्योंकि कम उड़ानों का मतलब सीमित विकल्प और संभावित रूप से महंगे टिकट हो सकते हैं। फिलहाल, Air India इन चुनौतियों से निपटने के लिए अपने नेटवर्क और लागत संरचना को फिर से संतुलित करने में जुटी है।