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राज्यसभा चुनाव: मीनाक्षी नटराजन की याचिका सुप्रीम कोर्ट से खारिज

भड़कीं कांग्रेस नेता बोलीं- ‘पहले वोट चोरी होती थी, इस बार सीट चोरी हुई’ नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के मामले में कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जून) को मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज […]

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  • June 12, 2026 1:57 pm IST, Published 2 hours ago

भड़कीं कांग्रेस नेता बोलीं- ‘पहले वोट चोरी होती थी, इस बार सीट चोरी हुई’

नई दिल्ली/भोपाल: मध्य प्रदेश से राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द होने के मामले में कांग्रेस को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (12 जून) को मीनाक्षी नटराजन की याचिका को खारिज कर दिया। अदालत के इस फैसले के बाद कांग्रेस नेता ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि पहले चुनाव में वोट चोरी होती थी, लेकिन इस बार पूरी सीट ही चोरी कर ली गई है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?

शीर्ष अदालत ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि वह चुनावी प्रक्रियाओं के बीच में दखल नहीं दे सकती। कोर्ट ने अपने फैसले के लिए संवैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया:

  • अनुच्छेद 329(b) का हवाला: अदालत ने कहा कि संविधान के Article 329(b) के तहत चुनाव प्रक्रिया शुरू होने के बाद अदालत के हस्तक्षेप पर रोक है। नामांकन खारिज होने जैसे मामलों का निपटारा चुनाव संपन्न होने के बाद ‘चुनाव याचिका’ (Election Petition) के जरिए ही किया जा सकता है।

  • गलत या मनमाने फैसले पर भी तुरंत दखल नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने कांग्रेस के उस तर्क को मानने से इनकार कर दिया कि यदि रिटर्निंग ऑफिसर का फैसला “गलत या मनमाना” हो, तो कोर्ट को तुरंत हस्तक्षेप करना चाहिए। अदालत ने कहा कि अगर ऐसा किया गया तो हर चुनावी मामले में अलग से जांच करनी पड़ेगी, जो स्थापित व्यवस्था के खिलाफ होगा।

  • Article 32 के तहत सुनवाई नहीं: कोर्ट ने कहा कि इस मामले को Article 32 (सीधे सुप्रीम कोर्ट में मौलिक अधिकारों के हनन की याचिका) के तहत नहीं सुना जा सकता। हालांकि, कोर्ट ने मीनाक्षी नटराजन का यह अधिकार सुरक्षित रखा कि वे चुनाव के बाद नियमानुसार चुनाव याचिका दाखिल कर सकती हैं।

‘लोकतंत्र में चुनाव लड़ना ही प्रक्रिया है’ – सिंघवी

इससे पहले सुनवाई के दौरान मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने पैरवी की। सिंघवी ने दलील देते हुए कहा था, “रिटर्निंग ऑफिसर ने उन्हें शुरुआती चरण में ही रेस से बाहर कर दिया है। उन्हें चुनाव लड़ने का मौका दिया जाना चाहिए। अगर वे जनता या जनप्रतितिधियों का वोट नहीं पा सकतीं तो हार जाएंगी, यही तो लोकतंत्र की असली प्रक्रिया है।”

क्या था पूरा विवाद?

मध्य प्रदेश की खाली हुई तीन राज्यसभा सीटों में से तीसरी सीट के लिए कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को मैदान में उतारा था। विधायकों की संख्या बल के हिसाब से कांग्रेस के पास यह सीट जीतने के लिए पर्याप्त आंकड़े मौजूद थे।

परंतु, 9 जून को स्क्रूटनी के दौरान भाजपा ने एक गंभीर आपत्ति दर्ज कराई। भाजपा का आरोप था कि मीनाक्षी ने अपने नामांकन हलफनामे (Affidavit) में हैदराबाद में दर्ज एक मामले की जानकारी छिपाई है। इस आपत्ति को स्वीकार करते हुए रिटर्निंग ऑफिसर (RO) अरविंद शर्मा ने उनका नामांकन पत्र निरस्त कर दिया।

कांग्रेस का दावा था कि वह कोई क्रिमिनल केस या एफआईआर (FIR) नहीं थी, बल्कि सिर्फ एक कोर्ट नोटिस था, जिसे हलफनामे में देना अनिवार्य नहीं था। हालांकि, नामांकन रद्द होने के बाद रास्ता साफ होते ही गुरुवार को भाजपा के तीनों उम्मीदवारों—रजनीश अग्रवाल, तरुण चुग और महेश केवट को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर निर्वाचन प्रमाण पत्र सौंप दिए गए।

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