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504 करोड़ सरकारी फंड गबन मामले में CBI का बड़ा एक्शन

नई दिल्ली: हरियाणा में कथित 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड गबन मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गिरफ्तार आरोपियों […]

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  • June 30, 2026 5:02 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली: हरियाणा में कथित 504 करोड़ रुपये के सरकारी फंड गबन मामले में CBI ने बड़ी कार्रवाई करते हुए दो बैंक अधिकारियों को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि दोनों अधिकारियों ने फर्जी बैंक खातों और संदिग्ध वित्तीय लेनदेन के जरिए सरकारी धन के दुरुपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। गिरफ्तार आरोपियों को पंचकूला स्थित CBI की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू की गई।

CBI के अनुसार गिरफ्तार किए गए आरोपियों में आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन एरिया हेड शमीम डार और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के तत्कालीन मैनेजर चरणजीत रंधावा शामिल हैं। जांच में दोनों की भूमिका संदिग्ध पाए जाने के बाद उन्हें हिरासत में लिया गया।

जांच एजेंसी का कहना है कि यह मामला हरियाणा के विभिन्न सरकारी विभागों से जुड़े करोड़ों रुपये के फंड के कथित गबन से संबंधित है। आरोप है कि करीब 504 करोड़ रुपये की सरकारी राशि को फर्जी खातों और धोखाधड़ी वाले बैंकिंग लेनदेन के माध्यम से इधर-उधर किया गया। इस कथित वित्तीय अनियमितता में आठ सरकारी विभागों की राशि प्रभावित होने की बात सामने आई है।

CBI की जांच में अब तक कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। एजेंसी पहले ही इस मामले में 17 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जांच के दौरान बैंकिंग रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेजों और डिजिटल ट्रांजैक्शन का विश्लेषण किया गया, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है।

जांच एजेंसियों का मानना है कि सरकारी धन की हेराफेरी एक सुनियोजित नेटवर्क के माध्यम से की गई हो सकती है। इसी वजह से बैंक अधिकारियों की भूमिका, खातों के संचालन, धन के प्रवाह और अन्य संभावित आरोपियों की संलिप्तता की भी गहन जांच की जा रही है।

CBI अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस कथित घोटाले में और किन लोगों की भूमिका रही तथा सरकारी राशि आखिर किन-किन खातों और संस्थाओं तक पहुंची। यह मामला हाल के वर्षों में सामने आए बड़े सरकारी वित्तीय अनियमितता के मामलों में शामिल माना जा रहा है, जिसमें सार्वजनिक धन के दुरुपयोग के आरोपों की बहुस्तरीय जांच जारी है।

 

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