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12% से ज्यादा अल्कोहल वाली दवा अब बिना पर्चे नहीं मिलेगी!

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल (मुंह से ली जाने वाली) दवाएं, खासकर 30 मिलीलीटर से अधिक पैकिंग में उपलब्ध दवाएं, बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं खरीदी जा सकेंगी। सरकार ने ऐसी दवाओं को […]

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  • July 10, 2026 11:30 am IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने दवाओं के दुरुपयोग पर रोक लगाने के लिए एक अहम फैसला लिया है। अब 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल (मुंह से ली जाने वाली) दवाएं, खासकर 30 मिलीलीटर से अधिक पैकिंग में उपलब्ध दवाएं, बिना डॉक्टर के पर्चे के नहीं खरीदी जा सकेंगी। सरकार ने ऐसी दवाओं को Schedule H1 के दायरे में शामिल कर दिया है। इस फैसले के बाद मेडिकल स्टोर संचालकों को इन दवाओं की बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा और बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन दवा बेचने पर कार्रवाई भी हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम विशेष रूप से उन दवाओं के दुरुपयोग को रोकने के लिए उठाया गया है जिनमें अल्कोहल की मात्रा अधिक होती है। बीते कुछ वर्षों में कई राज्यों से ऐसे मामले सामने आए थे, जहां कुछ लोग नशे के उद्देश्य से कफ सिरप और अन्य अल्कोहलयुक्त दवाओं का सेवन कर रहे थे। इससे युवाओं और किशोरों में नशे की प्रवृत्ति बढ़ने की चिंता भी लगातार जताई जा रही थी।

क्या है नया नियम?

स्वास्थ्य मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार अब 12 प्रतिशत से अधिक अल्कोहल वाली ओरल दवाओं को Schedule H1 श्रेणी में रखा गया है। इसका मतलब है कि इन दवाओं की बिक्री केवल पंजीकृत चिकित्सक के प्रिस्क्रिप्शन पर ही होगी। मेडिकल स्टोर संचालकों को दवा खरीदने वाले व्यक्ति का विवरण, डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन और बिक्री का रिकॉर्ड निर्धारित अवधि तक सुरक्षित रखना होगा।

इसके साथ ही ऐसी दवाओं की पैकेजिंग पर स्पष्ट चेतावनी (Warning Label) देना भी अनिवार्य होगा ताकि उपभोक्ताओं को इनके दुरुपयोग से होने वाले नुकसान की जानकारी मिल सके।

किन दवाओं पर पड़ेगा असर?

इस निर्णय का असर मुख्य रूप से उन ओरल मेडिसिन, कफ सिरप और अन्य तरल दवाओं पर पड़ेगा जिनमें अल्कोहल की मात्रा 12 प्रतिशत से अधिक है और जिनकी पैकिंग 30 मिलीलीटर से बड़ी है। हालांकि सामान्य बुखार, दर्द या अन्य बीमारियों की अधिकांश दवाओं पर इस नियम का कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। मरीजों को केवल डॉक्टर के पर्चे के आधार पर संबंधित दवा उपलब्ध कराई जाएगी।

क्यों लिया गया यह फैसला?

सरकार का कहना है कि कई स्थानों पर अल्कोहलयुक्त दवाओं का उपयोग इलाज के बजाय नशे के रूप में किया जा रहा था। खासतौर पर कुछ कफ सिरप और अन्य तरल दवाओं के दुरुपयोग की घटनाएं लगातार सामने आ रही थीं। ऐसे मामलों में बिना पर्चे के दवा आसानी से मिल जाने से समस्या और बढ़ रही थी।

नए नियम के लागू होने से बिना चिकित्सकीय सलाह के इन दवाओं की खरीद पर रोक लगेगी और इनके गलत इस्तेमाल में कमी आने की उम्मीद है।

मेडिकल स्टोर संचालकों की बढ़ेगी जिम्मेदारी

अब दवा विक्रेताओं को इन दवाओं की बिक्री के लिए अलग रजिस्टर रखना होगा। प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा। यदि कोई मेडिकल स्टोर बिना डॉक्टर के पर्चे के ऐसी दवा बेचता पाया जाता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। ड्रग इंस्पेक्टर समय-समय पर इन रिकॉर्ड की जांच भी कर सकेंगे।

मरीजों को क्या करना होगा?

जिन मरीजों को डॉक्टर द्वारा ऐसी दवा लिखी जाती है, उन्हें दवा खरीदते समय वैध प्रिस्क्रिप्शन साथ रखना होगा। डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवा का सेवन करना चाहिए। बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी अल्कोहलयुक्त दवा का सेवन स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय

विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला सार्वजनिक स्वास्थ्य की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। इससे दवाओं के अनियंत्रित उपयोग पर रोक लगेगी और नशे के लिए दवाओं के इस्तेमाल की प्रवृत्ति कम होगी। साथ ही मरीजों को भी चिकित्सकीय निगरानी में उचित उपचार मिलेगा।

आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

सामान्य मरीजों को यदि डॉक्टर ने संबंधित दवा लिखी है तो उन्हें कोई परेशानी नहीं होगी। लेकिन जो लोग बिना सलाह के ऐसी दवाएं खरीद लेते थे, अब उन्हें डॉक्टर का प्रिस्क्रिप्शन लेना होगा। इससे दवाओं का सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग सुनिश्चित किया जा सकेगा।

सरकार का उद्देश्य

सरकार का कहना है कि इस फैसले का उद्देश्य मरीजों को आवश्यक दवाओं से वंचित करना नहीं, बल्कि उनके सुरक्षित उपयोग को बढ़ावा देना और दवाओं के दुरुपयोग पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है। आने वाले समय में इस नियम के पालन की निगरानी भी सख्ती से की जाएगी।

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