नई दिल्ली: भारत संचार निगम लिमिटेड (BSNL) ने देश में सैटेलाइट कम्युनिकेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए नया सैटेलाइट फोन पेश किया है। यह फोन उन क्षेत्रों में भी संचार की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए तैयार किया गया है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह से अनुपलब्ध रहता है। पहाड़ी इलाकों, समुद्री क्षेत्रों, जंगलों, सीमावर्ती स्थानों और प्राकृतिक आपदा प्रभावित क्षेत्रों में यह डिवाइस बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि इसकी कीमत काफी अधिक होने के कारण यह आम उपभोक्ताओं के लिए नहीं बल्कि विशेष जरूरतों वाले उपयोगकर्ताओं और संस्थानों के लिए तैयार किया गया है।
BSNL ने इस सैटेलाइट फोन को वैश्विक सैटेलाइट नेटवर्क प्रदाता Inmarsat के सहयोग से विकसित किया है। यह फोन मोबाइल टावरों पर निर्भर रहने के बजाय सीधे सैटेलाइट से कनेक्ट होकर कॉलिंग और संचार की सुविधा प्रदान करता है। यही वजह है कि जहां सामान्य मोबाइल फोन नेटवर्क खोजने में असफल हो जाते हैं, वहां भी यह डिवाइस काम करता है।
कैसे करता है काम?
सामान्य स्मार्टफोन मोबाइल टावरों के माध्यम से नेटवर्क प्राप्त करते हैं, जबकि सैटेलाइट फोन पृथ्वी की कक्षा में मौजूद संचार उपग्रहों से सीधे संपर्क स्थापित करता है। इसके कारण किसी भी दूरदराज क्षेत्र में भी उपयोगकर्ता कॉल कर सकता है, बशर्ते सैटेलाइट से संपर्क स्थापित हो सके। यही तकनीक इसे आपातकालीन परिस्थितियों में अत्यंत भरोसेमंद बनाती है।
किन लोगों के लिए उपयोगी?
BSNL के अनुसार यह फोन विशेष रूप से उन संस्थानों और पेशेवरों के लिए तैयार किया गया है जिन्हें कठिन परिस्थितियों में भी निर्बाध संचार की आवश्यकता होती है। इनमें प्रमुख रूप से—
रक्षा एवं सुरक्षा एजेंसियां
आपदा प्रबंधन विभाग
समुद्री जहाज एवं मछली पकड़ने वाले पोत
खनन कंपनियां
दूरस्थ क्षेत्रों में कार्यरत इंजीनियर
पर्वतारोही एवं एडवेंचर अभियान
जंगलों और सीमावर्ती इलाकों में कार्यरत कर्मचारी
इन सभी स्थानों पर सामान्य मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता, इसलिए सैटेलाइट फोन एक प्रभावी विकल्प बनकर सामने आता है।
कीमत सुनकर हो सकते हैं हैरान
इस सैटेलाइट फोन की कीमत लगभग 1,34,166 रुपये रखी गई है। यही कारण है कि इसकी तुलना महंगे प्रीमियम स्मार्टफोन से की जा रही है। कीमत iPhone जैसे फ्लैगशिप स्मार्टफोन से भी अधिक है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि इसकी कीमत इसकी विशेष तकनीक और सीमित उपयोग को देखते हुए तय की गई है।
मजबूत डिजाइन और लंबी बैटरी
BSNL का दावा है कि इस डिवाइस को कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। इसका डिजाइन मजबूत और टिकाऊ है, जिससे यह गिरने या झटके लगने पर भी आसानी से खराब नहीं होता। इसके अलावा इसकी बैटरी लंबे समय तक चलने के लिए डिजाइन की गई है ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में लगातार संचार संभव हो सके।
क्या आम लोग खरीद सकते हैं?
भारत में सैटेलाइट फोन रखना और उसका उपयोग करना सामान्य मोबाइल फोन की तरह आसान नहीं है। इसके लिए सरकार की अनुमति आवश्यक होती है। बिना वैध अनुमति के सैटेलाइट फोन खरीदना, रखना या उसका उपयोग करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है। इसलिए यदि कोई व्यक्ति इस फोन को खरीदना चाहता है तो उसे पहले संबंधित सरकारी नियमों और अनुमति प्रक्रिया का पालन करना होगा।
क्यों जरूरी है सरकारी अनुमति?
सैटेलाइट फोन सीधे अंतरराष्ट्रीय सैटेलाइट नेटवर्क से जुड़ते हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा और संचार व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार ने इनके उपयोग पर विशेष नियम बनाए हैं। यही कारण है कि केवल अधिकृत व्यक्ति या संस्थान ही इनका उपयोग कर सकते हैं।
आपदा के समय बनेगा सबसे बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप, बाढ़, चक्रवात या अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान अक्सर मोबाइल टावर क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, जिससे संचार पूरी तरह ठप हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में सैटेलाइट फोन राहत एवं बचाव कार्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होते हैं। इसी वजह से दुनिया के कई देशों में आपदा प्रबंधन एजेंसियां इनका उपयोग करती हैं।
भारत में बढ़ रहा सैटेलाइट कम्युनिकेशन का दायरा
देश में डिजिटल कनेक्टिविटी को मजबूत बनाने के लिए सरकार और टेलीकॉम कंपनियां सैटेलाइट आधारित संचार सेवाओं पर तेजी से काम कर रही हैं। भविष्य में सैटेलाइट इंटरनेट और सैटेलाइट कम्युनिकेशन का दायरा और बढ़ने की संभावना है। BSNL का यह कदम इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
BSNL का नया सैटेलाइट फोन उन परिस्थितियों के लिए तैयार किया गया है जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क पूरी तरह विफल हो जाते हैं। इसकी कीमत भले ही काफी अधिक हो और इसके उपयोग के लिए सरकारी अनुमति आवश्यक हो, लेकिन आपदा प्रबंधन, सुरक्षा एजेंसियों, समुद्री सेवाओं और दूरदराज क्षेत्रों में कार्य करने वाले लोगों के लिए यह एक बेहद उपयोगी संचार उपकरण साबित हो सकता है। आने वाले समय में सैटेलाइट आधारित संचार तकनीक भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।