नई दिल्ली। देश में देसी घी की बढ़ती कीमतों और उसकी शुद्धता को लेकर उपभोक्ताओं के बीच लगातार चर्चा होती रहती है। इसी बीच योगगुरु स्वामी रामदेव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर ध्यान आकर्षित कर रहा है। उनके आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट से साझा किए गए वीडियो में पतंजलि के गाय के घी की कीमत को लेकर सवाल उठाया गया है कि बाजार में दूध और घी की कीमतों को देखते हुए 700 रुपये में देसी घी उपलब्ध कराना कैसे संभव है।
वीडियो में स्वामी रामदेव एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते नजर आ रहे हैं। उनके साथ अन्य लोग भी मौजूद हैं।
700 रुपये में देसी घी की चर्चा क्यों?
भारतीय बाजार में देसी घी की कीमतें उसकी गुणवत्ता, उत्पादन प्रक्रिया, ब्रांड, पैकेजिंग और बिक्री के स्थान के आधार पर अलग-अलग होती हैं। गाय के दूध से तैयार घी और पारंपरिक बिलोना पद्धति से बनने वाले घी की कीमतों में भी अंतर देखने को मिलता है।
ऐसे में किसी बड़े ब्रांड द्वारा लगभग 700 रुपये में गाय का घी उपलब्ध कराने का दावा उपभोक्ताओं के लिए दिलचस्प हो सकता है। हालांकि, किसी उत्पाद की कीमत का मूल्यांकन करते समय उसकी पैकिंग का वजन या मात्रा जानना भी आवश्यक है।
सोशल मीडिया पर साझा वीडियो में दिखाई गई कीमत किस पैकिंग और किस बिक्री अवधि से संबंधित है, इसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
23 सितंबर 2026 को नई दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्वामी रामदेव ने घी की कीमत को लेकर अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि पतंजलि की उत्पादन व्यवस्था में दूध से मक्खन निकालने के बाद बचने वाले दूध का भी व्यावसायिक उपयोग किया जाता है। इससे उत्पादन की कुल लागत को अलग-अलग डेयरी उत्पादों के बीच बांटना संभव होता है।
रामदेव के अनुसार, मक्खन निकालने के बाद बचे दूध से टोंड मिल्क, दही, छाछ, पनीर और मिल्क पाउडर जैसे उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इनकी बिक्री से होने वाली आय घी की लागत कम करने में मदद करती है।
80 प्रतिशत लागत की वसूली का दावा
स्वामी रामदेव ने दावा किया कि दूध से तैयार होने वाले अन्य उत्पादों के जरिए उसकी लगभग 80 प्रतिशत कीमत की वसूली हो जाती है। उनके मुताबिक, इसी व्यावसायिक मॉडल के कारण पतंजलि लगभग 700 रुपये प्रति लीटर की कीमत पर गाय का घी उपलब्ध करा सकती है।
उन्होंने यह भी बताया कि पतंजलि का गाय का दूध लगभग 50 से 60 रुपये प्रति लीटर के भाव पर उपलब्ध कराया जाता है। हालांकि, कंपनी के उत्पादन खर्च और लागत वसूली से संबंधित स्वतंत्र रूप से सत्यापित विस्तृत आंकड़े सार्वजनिक रिपोर्ट में उपलब्ध नहीं हैं।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में रामदेव ने पतंजलि के घी और आयुर्वेदिक उत्पादों की गुणवत्ता को लेकर लगाए जा रहे आरोपों का भी खंडन किया। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर कई लोग पूरी जानकारी के बिना वीडियो बना रहे हैं।
यह विवाद पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह द्वारा पतंजलि के उत्पादों और ब्रांड की आलोचना के बाद चर्चा में आया था। रामदेव ने अपने उत्पादों की गुणवत्ता का बचाव करते हुए मिलावट के आरोपों को खारिज किया।
हालांकि, किसी खाद्य उत्पाद की शुद्धता का अंतिम निर्धारण वैज्ञानिक परीक्षण और संबंधित खाद्य सुरक्षा मानकों के आधार पर ही किया जा सकता है। केवल कंपनी के दावे या सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो को निर्णायक प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए।
700 रुपये प्रति लीटर के दावे के बीच पतंजलि की आधिकारिक ऑनलाइन वेबसाइट पर उपलब्ध कीमत भी महत्वपूर्ण है। वेबसाइट पर गाय के घी के एक लीटर पैक की सूचीबद्ध कीमत 800 रुपये दिखाई गई है। वहीं, 500 मिलीलीटर का पैक 425 रुपये में सूचीबद्ध है।
इसलिए उपभोक्ताओं को खरीदारी करते समय वास्तविक बिक्री मूल्य, पैकिंग की मात्रा और उपलब्ध छूट की जांच करनी चाहिए। अलग-अलग बिक्री केंद्रों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कीमतों में अंतर संभव है।
डेयरी उद्योग में दूध का उपयोग केवल घी बनाने तक सीमित नहीं है। दूध में मौजूद वसा निकालने के बाद बचे हिस्से से भी कई खाद्य उत्पाद बनाए जा सकते हैं।
बड़े पैमाने पर उत्पादन करने वाली कंपनियां दूध के विभिन्न घटकों का इस्तेमाल करके अपनी कुल उत्पादन लागत को नियंत्रित करने का प्रयास करती हैं। इसके अतिरिक्त परिवहन, भंडारण, पैकेजिंग, वितरण और खुदरा बिक्री जैसे खर्च भी अंतिम कीमत को प्रभावित करते हैं।
रामदेव का स्पष्टीकरण इसी बहुउत्पाद डेयरी मॉडल पर आधारित है। हालांकि, पतंजलि की वास्तविक उत्पादन लागत और लाभ का आकलन करने के लिए विस्तृत वित्तीय आंकड़ों की आवश्यकता होगी।
घी खरीदते समय केवल उसकी कीमत के आधार पर गुणवत्ता का अनुमान लगाना उचित नहीं है। उपभोक्ताओं को पैकेट पर अंकित सामग्री, निर्माता का विवरण, एफएसएसएआई लाइसेंस, निर्माण तिथि और उपयोग की अंतिम तिथि देखनी चाहिए।
यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता को लेकर गंभीर संदेह हो तो अधिकृत खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला की सहायता ली जा सकती है।
पतंजलि के घी की कीमत पर शुरू हुई इस चर्चा ने एक बार फिर खाद्य उत्पादों की लागत, गुणवत्ता और उपभोक्ता विश्वास जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। रामदेव ने अपनी उत्पादन प्रक्रिया के जरिए कम कीमत का स्पष्टीकरण दिया है, जबकि उपभोक्ताओं के लिए उत्पाद की वास्तविक कीमत और प्रमाणित गुणवत्ता की जानकारी महत्वपूर्ण बनी हुई है।