• होम
  • दिल्ली
  • सिंधु जल संधि पर बढ़ा विवाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की भारत को खुली धमकी, कहा— ‘जरूरत पड़ी तो युद्ध से भी नहीं हिचकेंगे’

सिंधु जल संधि पर बढ़ा विवाद: पाकिस्तान के रक्षा मंत्री की भारत को खुली धमकी, कहा— ‘जरूरत पड़ी तो युद्ध से भी नहीं हिचकेंगे’

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विवादित बयान ने दोनों देशों के रिश्तों में नई तल्खी पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान के हिस्से के पानी […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 22, 2026 10:30 pm IST, Published 3 hours ago

नई दिल्ली/इस्लामाबाद। भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल संधि (Indus Waters Treaty) को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विवादित बयान ने दोनों देशों के रिश्तों में नई तल्खी पैदा कर दी है। उन्होंने कहा कि यदि पाकिस्तान के हिस्से के पानी को रोकने या प्रभावित करने की कोशिश की गई, तो उनका देश इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा पर हमला मानेगा और आवश्यक होने पर युद्ध जैसे कदम उठाने से भी पीछे नहीं हटेगा।

ख्वाजा आसिफ का यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत ने सिंधु जल संधि को लेकर अपना पुराना रुख दोहराते हुए कहा है कि वह अपने हिस्से के जल संसाधनों का पूरा और वैध उपयोग करेगा। भारत का मानना है कि दशकों से उसके हिस्से का बड़ा जल संसाधन पूरी तरह उपयोग में नहीं लाया जा सका है, जबकि देश की बढ़ती आबादी और कृषि जरूरतों को देखते हुए इसका बेहतर उपयोग आवश्यक है।

पाकिस्तान में इस बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में भी हलचल बढ़ गई है। वहां के कई नेताओं ने भारत के रुख को लेकर चिंता जताई है और इसे पाकिस्तान के लिए गंभीर चुनौती बताया है। पाकिस्तान पहले से ही जल संकट, घटते भूजल स्तर और कृषि क्षेत्र में पानी की कमी जैसी समस्याओं का सामना कर रहा है। ऐसे में सिंधु नदी प्रणाली उसके लिए जीवनरेखा मानी जाती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि सिंधु जल संधि दुनिया की सबसे सफल अंतरराष्ट्रीय जल समझौतों में गिनी जाती है। वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में हुए इस समझौते के तहत दोनों देशों के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के जल बंटवारे की व्यवस्था तय की गई थी। भारत और पाकिस्तान के बीच कई युद्ध और गंभीर राजनीतिक तनाव के बावजूद यह संधि लंबे समय तक प्रभावी बनी रही है।

हालांकि पिछले कुछ वर्षों में आतंकवाद, सीमा पार घुसपैठ और सुरक्षा संबंधी मुद्दों के चलते दोनों देशों के रिश्तों में लगातार गिरावट आई है। भारत कई बार यह स्पष्ट कर चुका है कि आतंकवाद और बातचीत एक साथ नहीं चल सकते। इसी बीच सिंधु जल संधि को लेकर भी नई बहस छिड़ी हुई है।

राजनयिक विशेषज्ञों का मानना है कि युद्ध जैसी धमकियां समस्या का समाधान नहीं हैं। जल संसाधनों से जुड़े मुद्दे बेहद संवेदनशील होते हैं और उनका समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून, संवाद और कूटनीतिक प्रयासों के जरिए ही संभव है। उनका कहना है कि दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच किसी भी तरह का सैन्य तनाव पूरे दक्षिण एशिया की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है।

फिलहाल भारत की ओर से पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के ताजा बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक और रणनीतिक हलकों में इस बयान को गंभीरता से देखा जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि दोनों देश इस विवाद को बातचीत के जरिए सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ते हैं या बयानबाजी का यह दौर क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ाता है।

सिंधु जल संधि को लेकर शुरू हुई यह नई शब्दों की जंग अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा का विषय बन गई है और दुनिया की नजरें भारत-पाकिस्तान के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।

Advertisement