परवेश वर्मा ने कहा कि पहले कई फ्लाईओवर के नीचे गंदगी, कूड़े के ढेर, अंधेरे और असामाजिक गतिविधियों की शिकायतें देखने को मिलती थीं। इन स्थानों का समुचित उपयोग नहीं हो पाने के कारण आसपास का वातावरण भी प्रभावित होता था। अब सरकार ऐसे क्षेत्रों को बेहतर बनाने के लिए बड़ी कंपनियों के साथ साझेदारी कर रही है, ताकि इनका उपयोग सकारात्मक और जनहित से जुड़े कार्यों के लिए किया जा सके।
मंत्री के अनुसार, इस पहल में कॉरपोरेट कंपनियां CSR के माध्यम से सहयोग कर रही हैं। इसके लिए कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने बताया कि इन समझौतों के तहत संबंधित स्थानों के रखरखाव और सौंदर्यीकरण की जिम्मेदारी निर्धारित अवधि के लिए दी गई है। उनके मुताबिक, दो से तीन साल तक रखरखाव से जुड़े प्रावधानों के साथ कंपनियां इन जगहों को बेहतर बनाने में योगदान देंगी। इससे सरकारी विभागों और निजी क्षेत्र के बीच सहयोग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
परवेश वर्मा ने बताया कि इंडियन ऑयल ने पांच फ्लाईओवर के नीचे के स्थानों को विकसित करने की जिम्मेदारी ली है। इन जगहों को एक जैसी डिजाइन देने के बजाय अलग-अलग विषयों के आधार पर तैयार किया जा रहा है। इसके पीछे विचार यह है कि हर स्थान की अपनी पहचान हो और वह आसपास के वातावरण से मेल खाए। मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि एक फ्लाईओवर के नीचे वन्यजीव से संबंधित थीम विकसित की गई है, जबकि आईटी फ्लाईओवर के नीचे विज्ञान और प्रौद्योगिकी से जुड़ी थीम को प्राथमिकता दी गई है।
इस तरह की थीम आधारित सजावट से फ्लाईओवर के नीचे के हिस्सों को केवल खाली जगह के रूप में देखने के बजाय उन्हें शहर के सौंदर्यीकरण का हिस्सा बनाने की कोशिश की जा रही है। अलग-अलग विषयों के जरिए इन स्थानों को अधिक आकर्षक बनाने और लोगों को उनके आसपास के वातावरण से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। हालांकि, इस पहल का व्यापक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि सौंदर्यीकरण के बाद इन स्थानों की साफ-सफाई, रोशनी और नियमित देखरेख कितनी प्रभावी तरीके से की जाती है।
मंत्री प्रवेश वर्मा ने कहा कि आसपास का वातावरण व्यक्ति के मन और अनुभव पर असर डालता है। सड़कों के किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर बेहतर दृश्य व्यवस्था होने से लोगों को शहर में आवागमन के दौरान अच्छा अनुभव मिल सकता है। इसी सोच के तहत लोक निर्माण विभाग (PWD) और दिल्ली सरकार राजधानी को अधिक सुंदर और व्यवस्थित बनाने के लिए काम कर रहे हैं। उन्होंने इस पहल में भागीदारी करने वाली कंपनियों की सराहना भी की।
दिल्ली जैसे बड़े शहर में फ्लाईओवर के नीचे की जगहों का बेहतर इस्तेमाल शहरी विकास के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। इन क्षेत्रों को साफ रखने, पर्याप्त रोशनी उपलब्ध कराने और आकर्षक स्वरूप देने से सार्वजनिक स्थानों की स्थिति में सुधार हो सकता है। साथ ही, CSR के जरिए निजी कंपनियों की भागीदारी से शहरी सुविधाओं के विकास के लिए अतिरिक्त संसाधन जुटाने का अवसर भी मिलता है। हालांकि, ऐसे प्रयासों की सफलता केवल सजावट तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। नियमित सफाई, सुरक्षा, कूड़ा प्रबंधन और समय-समय पर रखरखाव सुनिश्चित करना भी जरूरी होगा। यदि इन सभी पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है, तो फ्लाईओवर के नीचे की जगहें दिल्ली के शहरी सौंदर्यीकरण में उपयोगी भूमिका निभा सकती हैं।