नई दिल्ली: 2020 के दिल्ली दंगों से जुड़े आईबी अधिकारी अंकित शर्मा हत्या मामले में अदालत द्वारा पूर्व पार्षद ताहिर हुसैन को दोषी करार दिए जाने के बाद राजधानी की राजनीति एक बार फिर गरमा गई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए इसे न्याय की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया और आम आदमी पार्टी (AAP) के शीर्ष नेताओं से इस मामले पर जवाब मांगा।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि अदालत ने जिस व्यक्ति को दिल्ली दंगों और आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या के मामले में दोषी माना है, वह केवल एक आरोपी नहीं बल्कि उन घटनाओं से प्रभावित हजारों परिवारों की पीड़ा से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि दंगों के दौरान कई लोगों की जान गई, बड़ी संख्या में लोग घायल हुए और सार्वजनिक व निजी संपत्तियों को भारी नुकसान पहुंचा। उनके अनुसार अदालत का फैसला उन पीड़ित परिवारों के लिए न्याय की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है।
रेखा गुप्ता ने आरोप लगाया कि ताहिर हुसैन को पहले राजनीतिक संरक्षण प्राप्त था। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं को यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति के साथ उनके राजनीतिक संबंधों को लेकर उनकी क्या स्थिति रही। मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राजनीतिक दलों की भी जवाबदेही होती है और जनता ऐसे मामलों में स्पष्ट जवाब चाहती है।
उन्होंने कहा कि दिल्ली दंगों ने राजधानी की सामाजिक एकता और कानून-व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया था। ऐसे में अदालत द्वारा दोषसिद्धि का फैसला उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है, जिन्होंने हिंसा में अपने परिजनों को खोया या अन्य प्रकार की क्षति झेली। मुख्यमंत्री ने कहा कि कानून अपना काम कर रहा है और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने अपने बयान में आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं अरविंद केजरीवाल, संजय सिंह और मनीष सिसोदिया का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्हें इस पूरे मामले पर जनता के सामने अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहिए। उनके अनुसार जनता यह जानना चाहती है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी क्या रही।
हालांकि, इस पूरे प्रकरण में अदालत का फैसला न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और आगे की कानूनी कार्रवाई भी निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार जारी रहेगी। राजनीतिक दलों की ओर से इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं, जिससे दिल्ली की राजनीति में एक बार फिर आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। यह मामला केवल न्यायिक निर्णय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में दिल्ली की राजनीतिक बहस का भी प्रमुख मुद्दा बन सकता है।