नई दिल्ली। टैटू बनवाने का बढ़ता क्रेज अब स्वास्थ्य संबंधी गंभीर चिंताओं को भी जन्म देने लगा है। राजधानी दिल्ली से सामने आए एक मामले ने टैटू पार्लरों में अपनाए जाने वाले सुरक्षा मानकों पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक महिला, जिसने कुछ समय पहले दिल्ली के एक टैटू स्टूडियो में टैटू बनवाया था, बाद में स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझने लगी। चिकित्सकीय जांच में उसके HIV पॉजिटिव होने की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि यदि टैटू बनाते समय संक्रमित या ठीक से स्टरलाइज न की गई सुई का इस्तेमाल किया गया हो, तो संक्रमण फैलने का खतरा हो सकता है।
हालांकि, इस मामले में अभी तक यह आधिकारिक रूप से साबित नहीं हुआ है कि संक्रमण का एकमात्र कारण टैटू बनवाना ही था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसकी पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही संभव होगी। फिर भी यह घटना लोगों को सतर्क रहने और प्रमाणित टैटू स्टूडियो का चयन करने की महत्वपूर्ण सीख देती है।
जांच में सामने आई गंभीर स्वास्थ्य समस्या
जानकारी के अनुसार, महिला ने टैटू बनवाने के कुछ समय बाद शरीर में संक्रमण से जुड़े लक्षण महसूस किए। इसके बाद उसने अस्पताल में चिकित्सकीय जांच कराई। मेडिकल जांच के दौरान HIV संक्रमण की पुष्टि हुई। चिकित्सकों ने महिला का इलाज शुरू कर दिया है और उसे सरकारी अस्पताल में एंटी रेट्रोवायरल थेरेपी (ART) के तहत उपचार दिया जा रहा है।
डॉक्टरों का कहना है कि HIV वायरस संक्रमित रक्त के संपर्क से फैल सकता है। यदि किसी व्यक्ति पर पहले इस्तेमाल की गई संक्रमित सुई को बिना उचित स्टरलाइजेशन के दूसरे व्यक्ति पर प्रयोग किया जाए, तो संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने क्या कहा?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, टैटू बनवाना अपने आप में खतरनाक नहीं है, लेकिन यदि सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जाए तो HIV, हेपेटाइटिस-बी और हेपेटाइटिस-सी जैसे गंभीर संक्रमण फैलने की संभावना बढ़ जाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि टैटू बनवाते समय हमेशा यह सुनिश्चित करना चाहिए कि—
नई और सीलबंद डिस्पोजेबल सुई का ही उपयोग हो।
टैटू कलाकार नए दस्ताने पहनकर प्रक्रिया शुरू करे।
मशीन और अन्य उपकरण पूरी तरह स्टरलाइज हों।
इस्तेमाल की जाने वाली स्याही स्वच्छ और प्रमाणित हो।
स्टूडियो में साफ-सफाई और संक्रमण नियंत्रण के मानकों का पालन किया जा रहा हो।
क्या टैटू से HIV फैल सकता है?
चिकित्सकों के अनुसार, सामान्य परिस्थितियों में प्रमाणित टैटू स्टूडियो में संक्रमण का खतरा बेहद कम होता है। लेकिन यदि संक्रमित सुई या संक्रमित रक्त के संपर्क में आए उपकरणों का दोबारा इस्तेमाल किया जाए, तो HIV संक्रमण का जोखिम उत्पन्न हो सकता है।
विश्व स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी सलाह देते हैं कि टैटू केवल लाइसेंस प्राप्त और भरोसेमंद केंद्रों से ही बनवाना चाहिए।
लोगों में बढ़ी चिंता
इस घटना के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी टैटू की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई लोग टैटू स्टूडियो के लाइसेंस, सफाई व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर सवाल उठा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि टैटू उद्योग में नियमित निरीक्षण और सख्त नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
इलाज जारी, डॉक्टरों ने दी सलाह
महिला का इलाज विशेषज्ञ डॉक्टरों की निगरानी में जारी है। चिकित्सकों का कहना है कि HIV की समय पर पहचान और नियमित ART उपचार से संक्रमित व्यक्ति सामान्य और स्वस्थ जीवन जी सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि किसी भी तरह का टैटू बनवाने से पहले स्टूडियो की विश्वसनीयता और स्वच्छता की अच्छी तरह जांच कर लें।
टैटू बनवाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
केवल प्रमाणित और लाइसेंस प्राप्त टैटू स्टूडियो का चयन करें।
नई डिस्पोजेबल सुई अपने सामने खुलवाएं।
कलाकार से दस्ताने बदलने के लिए कहें।
उपकरणों की स्टरलाइजेशन प्रक्रिया के बारे में जानकारी लें।
टैटू बनने के बाद डॉक्टर द्वारा बताए गए आफ्टर-केयर निर्देशों का पालन करें।
यदि टैटू के बाद सूजन, पस, तेज दर्द या बुखार जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
स्वास्थ्य विभाग की भूमिका महत्वपूर्ण
विशेषज्ञों का मानना है कि टैटू पार्लरों की नियमित जांच, लाइसेंस व्यवस्था को सख्ती से लागू करना और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना बेहद आवश्यक है। साथ ही लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए व्यापक अभियान चलाए जाने चाहिए, ताकि संक्रमण के जोखिम को कम किया जा सके।
दिल्ली का यह मामला टैटू बनवाने वालों के लिए एक गंभीर चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि संक्रमण का अंतिम कारण जांच के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन यह घटना साफ-सफाई और सुरक्षित चिकित्सा मानकों के महत्व को रेखांकित करती है। विशेषज्ञों का कहना है कि थोड़ी-सी सावधानी और प्रमाणित टैटू स्टूडियो का चयन गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों से बचा सकता है। HIV जैसी बीमारी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका जागरूकता, सुरक्षित प्रक्रियाओं का पालन और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना है।