नई दिल्ली: दिल्ली जल बोर्ड ने दिल्ली की जलापूर्ति और सीवरेज सेवाओं के प्रबंधन के तरीके में व्यापक बदलाव की दिशा में कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं। इन फैसलों का स्पष्ट फोकस जवाबदेही, समय रहते रखरखाव और नागरिकों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराने पर है।
सबसे बड़ा फैसला दिल्ली में सीवर रखरखाव व्यवस्था के व्यापक सुधार के लिए ₹17,969.93 करोड़ की 10 वर्ष की योजना को सैद्धांतिक मंजूरी देना है। इसके तहत नई ‘वन जोन, वन ऑपरेटर’ व्यवस्था लागू की जाएगी।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत दिल्ली को आठ जोन में बांटा जाएगा और प्रत्येक जोन के पूरे सीवर नेटवर्क की जिम्मेदारी एक ऑपरेटर की होगी। इसमें सीवर लाइनें, मैनहोल, पंपिंग स्टेशन और शिकायतों का निपटारा शामिल होगा। यह व्यवस्था शिकायत आने के बाद मरम्मत करने के बजाय पहले से योजनाबद्ध और नियमित रखरखाव पर आधारित होगी। जियो-टैग्ड निरीक्षण और केंद्रीय कमांड सेंटर के माध्यम से रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। इसके साथ ही 100% मैकेनिकल और रोबोटिक सीवर सफाई की व्यवस्था भी की जाएगी।
दिल्ली के जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि इस सुधार का मूल उद्देश्य जिम्मेदारी तय करना है। “दिल्ली के किसी नागरिक के लिए यह मायने नहीं रखना चाहिए कि किसी सीवर की जिम्मेदारी किस अधिकारी, डिवीजन या ठेकेदार की है। अगर कोई समस्या है, तो सिस्टम को इसकी जानकारी होनी चाहिए, उसे ठीक करने की जिम्मेदारी किसी की तय होनी चाहिए और काम पूरा होने तक उसकी निगरानी होनी चाहिए। हम यही बदलाव लाना चाहते हैं।”
दिल्ली जल बोर्ड वर्तमान में 68 विधानसभा क्षेत्रों में 11,212 किलोमीटर सीवर लाइन, 6.68 लाख मैनहोल और 145 पंपिंग स्टेशनों का रखरखाव करता है। नई व्यवस्था में भुगतान को प्रदर्शन से जोड़ा जाएगा, जिसका उद्देश्य शिकायतों का तेजी से समाधान और सीवर ओवरफ्लो की घटनाओं में कमी लाना है।
दक्षिण दिल्ली की जलापूर्ति व्यवस्था के कायाकल्प के लिए ₹6,044 करोड़
बोर्ड ने दक्षिण दिल्ली की जलापूर्ति अवसंरचना के व्यापक कायाकल्प के लिए ₹6,044.05 करोड़ की परियोजना को भी मंजूरी दी है। यह परियोजना 247 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र, 13 UGR कमांड एरिया, 12 विधानसभा क्षेत्रों और 2,44,381 घरेलू उपभोक्ताओं को कवर करेगी। रियल-टाइम मॉनिटरिंग, सटीक मीटरिंग और जल ऑडिट के लिए स्मार्ट मीटर, बल्क फ्लो मीटर तथा क्लोरीन और प्रेशर सेंसर लगाए जाएंगे।
परियोजना का लक्ष्य विश्वसनीय और निरंतर जलापूर्ति, शून्य प्रदूषण तथा नॉन-रेवेन्यू वाटर को 15% से नीचे लाना है। प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “हम जलापूर्ति को केवल अधिक पाइप बिछाने के नजरिए से नहीं देख रहे हैं। हमें यह पता होना चाहिए कि पानी कहां जा रहा है, कहां इसकी हानि हो रही है और पानी का दबाव व गुणवत्ता सही है या नहीं। तकनीक हमें व्यवस्था को अधिक जवाबदेह और प्रभावी बनाने में मदद करेगी।”
चंद्रावल और वजीराबाद WTP कमांड एरिया के अलावा दिल्ली के बाकी हिस्से को छह जोन — दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम, पश्चिम, उत्तर-पश्चिम, पूर्व और उत्तर-पूर्व — में बांटा गया है। पश्चिम और दक्षिण-पश्चिम जोन के लिए प्रशासनिक मंजूरी पहले ही दी जा चुकी है। इन दोनों जोन में जलापूर्ति अवसंरचना के व्यापक कायाकल्प के लिए 15 वर्ष के O&M सहित ₹11,427 करोड़ का निवेश किया जाएगा। शेष तीन जोन के लिए भी कंसल्टेंट नियुक्त किया जा चुका है।
328 MGD अतिरिक्त सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता
सीवेज ट्रीटमेंट व्यवस्था को मजबूत करने और यमुना के पुनरुद्धार में सहयोग के लिए बोर्ड ने 328 MGD की संयुक्त क्षमता वाले 13 नए सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के लिए टेंडर आमंत्रित करने को मंजूरी दी है। इनकी अनुमानित लागत ₹7,373 करोड़ है और यह कार्य NMCG फंडिंग के तहत किया जाएगा।
नरेला के नयाबांस में 5.5 MGD क्षमता वाले विकेंद्रीकृत STP की ₹123.23 करोड़ की परियोजना पहले ही आवंटित की जा चुकी है। मंत्री ने कहा, “हमें पहली जगह पर ही बिना उपचारित सीवेज को नालों में पहुंचने से रोकना होगा। ट्रीटमेंट क्षमता बढ़ाना इस काम का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”
₹1,214.58 करोड़ की वजीराबाद परियोजना को फिर गति
लंबे समय से लंबित वजीराबाद जलापूर्ति परियोजना को भी नई गति मिली है। बोर्ड ने अनुमानित ₹1,214.58 करोड़ के पैकेज को प्रशासनिक मंजूरी दी है। इसमें 80 MGD क्षमता का नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट, ऑटोमेटेड रॉ-वॉटर इंटेक और 15 वर्ष का ऑपरेशन एवं मेंटेनेंस शामिल है। इसके साथ ही मौजूदा 40 MGD प्लांट का पुनर्वास भी किया जाएगा।
एक और 60 MGD प्लांट, ट्रांसमिशन अपग्रेड, SCADA सिस्टम और वितरण व्यवस्था में सुधार के लिए ₹3,505 करोड़ के ADB टॉप-अप लोन को भी मंजूरी दी गई है।
नए टैरिफ नियम, आपातकालीन केंद्र और वर्षा जल संचयन
बोर्ड ने दिल्ली जल एवं सीवर (टैरिफ एवं मीटरिंग) विनियम, 2026 को मंजूरी दी है, जो 2012 के नियमों की जगह लेगा। नई व्यवस्था के तहत जल और सीवर कनेक्शन की प्रक्रिया को सरल बनाया जाएगा, शुल्क को तर्कसंगत किया जाएगा, बिलिंग प्रावधानों को अधिक स्पष्ट किया जाएगा और डिजिटल सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल के पुनर्चक्रण को अपनाने वाले परिवारों के लिए रिबेट का भी प्रस्ताव है।
बोर्ड ने दिल्ली में 25 वाटर इमरजेंसी सेंटरों के पुनर्निर्माण के लिए ₹65.49 करोड़ की मंजूरी दी है। इन केंद्रों को आधुनिक, सुरक्षित और डिजिटल सुविधाओं से लैस किया जाएगा।
भवन की ऊंचाई की परवाह किए बिना व्यक्तिगत जल कनेक्शन
जहां तकनीकी रूप से संभव हो और निर्धारित शर्तें पूरी होती हों, वहां भवन की ऊंचाई की परवाह किए बिना किसी आवासीय/गैर-घरेलू इकाई को व्यक्तिगत जल कनेक्शन स्वीकृत किया जा सकता है। उपभोक्ताओं को 17.5 मीटर की ऊंचाई से नीचे या निर्धारित मानकों के अनुसार पर्याप्त जल भंडारण की व्यवस्था करनी होगी।
बोर्ड ने वर्षा जल संचयन नीति, 2026 के कार्यान्वयन की दिशा में भी कदम बढ़ाया है। इसके तहत भूजल रिचार्ज को बाढ़ प्रबंधन से जोड़ा जाएगा और सरकारी भवनों में इसका अनिवार्य अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।
प्रवेश साहिब सिंह ने कहा, “दिल्ली को ऐसी जल व्यवस्था की जरूरत है जो केवल सामान्य परिस्थितियों में ही नहीं, बल्कि भारी बारिश, सीवर ओवरफ्लो, टैंकर की आपात स्थिति या किसी खराबी के समय भी काम करे। ये फैसले ऐसी व्यवस्था तैयार करने की दिशा में हैं, जहां योजना, तकनीक और जवाबदेही मिलकर काम करें।”