नई दिल्ली : दुनिया भर में कॉफी प्रेमियों की कोई कमी नहीं है। हर साल करोड़ों लोग अपनी सुबह की शुरुआत कॉफी की एक प्याली से करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की सबसे महंगी कॉफी एक ऐसे जानवर के मल से तैयार की जाती है, जिसकी कीमत सुनकर कोई भी हैरान रह जाए? यह अनोखी कॉफी ‘कोपी लुवाक’ (Kopi Luwak) के नाम से जानी जाती है और इसे दुनिया की सबसे दुर्लभ तथा महंगी कॉफी में गिना जाता है।
कोपी लुवाक का नाम इंडोनेशियाई भाषा के दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘कोपी’ का अर्थ है कॉफी, जबकि ‘लुवाक’ एक विशेष प्रकार के जंगली जीव सिवेट (Civet) को कहा जाता है। आम बोलचाल में इसे सिवेट कैट कहा जाता है, हालांकि वैज्ञानिक रूप से यह पूरी तरह बिल्ली नहीं होती। यह छोटा स्तनधारी जीव दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों जैसे इंडोनेशिया, फिलीपींस, वियतनाम और मलेशिया के जंगलों में पाया जाता है।
कैसे बनती है यह अनोखी कॉफी?
कोपी लुवाक की सबसे बड़ी खासियत इसकी निर्माण प्रक्रिया है। सिवेट जानवर कॉफी के बागानों में जाकर सबसे अच्छी, पकी और मीठी कॉफी चेरी को चुनकर खाता है। उसके पाचन तंत्र में कॉफी चेरी का बाहरी हिस्सा तो पच जाता है, लेकिन अंदर मौजूद कठोर बीन्स पूरी तरह नहीं पचतीं।
पाचन प्रक्रिया के दौरान एंजाइम्स इन बीन्स के साथ प्रतिक्रिया करते हैं, जिससे इनके स्वाद और सुगंध में बदलाव आ जाता है। बाद में ये बीन्स जानवर के मल के साथ बाहर निकल जाती हैं। इन्हें एकत्र कर कई चरणों में साफ किया जाता है, धोया जाता है, सुखाया जाता है और फिर विशेष तरीके से रोस्ट किया जाता है। इसके बाद तैयार होती है दुनिया की सबसे चर्चित कॉफी।
आखिर इतनी महंगी क्यों है?
कोपी लुवाक की ऊंची कीमत के पीछे कई कारण हैं। सबसे पहला कारण इसका बेहद सीमित उत्पादन है। जंगली सिवेट द्वारा छोड़ी गई कॉफी बीन्स को जंगलों और बागानों से खोजकर इकट्ठा करना आसान नहीं होता। इसके अलावा पूरी प्रक्रिया में काफी समय और मेहनत लगती है।
विशेषज्ञों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोपी लुवाक की कीमत लगभग 100 डॉलर से 600 डॉलर प्रति किलोग्राम या उससे भी अधिक हो सकती है। भारतीय मुद्रा में यह कीमत लगभग 20 हजार रुपये से लेकर 50 हजार रुपये प्रति किलो अथवा उससे ज्यादा तक पहुंच सकती है। कुछ दुर्लभ और प्रीमियम गुणवत्ता वाली कोपी लुवाक की कीमत इससे भी कहीं अधिक बताई जाती है।
स्वाद में क्या है खास?
कॉफी विशेषज्ञों का मानना है कि सिवेट के पेट में होने वाली प्राकृतिक फर्मेंटेशन प्रक्रिया के कारण कॉफी बीन्स का स्वाद सामान्य कॉफी से अलग हो जाता है। इस कॉफी में कड़वाहट कम और स्वाद अधिक मुलायम माना जाता है। इसकी खुशबू और फ्लेवर भी काफी अलग होते हैं, जिसके कारण यह लग्जरी कॉफी की श्रेणी में शामिल की जाती है।
हालांकि कुछ विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इसकी लोकप्रियता का एक बड़ा कारण इसका अनोखा और दुर्लभ होना है। कई कॉफी प्रेमी केवल इसकी अनोखी निर्माण प्रक्रिया के कारण इसे चखना चाहते हैं।
विवादों में भी रही है कोपी लुवाक
दुनिया भर में बढ़ती मांग के चलते कई स्थानों पर सिवेट जानवरों को पिंजरों में बंद कर उनसे जबरन कॉफी चेरी खिलाने की घटनाएं सामने आई हैं। पशु अधिकार संगठनों ने इस पर चिंता जताई है और इसे पशु क्रूरता का मामला बताया है। यही वजह है कि अब कई उपभोक्ता केवल उन्हीं उत्पादों को खरीदना पसंद करते हैं, जो जंगली सिवेट से प्राकृतिक रूप से प्राप्त बीन्स से तैयार किए गए हों।
दुनिया भर में बनी हुई है मांग
विवादों के बावजूद कोपी लुवाक की लोकप्रियता कम नहीं हुई है। दुनिया के कई लग्जरी होटल, कैफे और रेस्तरां अपने ग्राहकों को यह विशेष कॉफी परोसते हैं। इसकी दुर्लभता, अनोखी निर्माण प्रक्रिया और ऊंची कीमत इसे दुनिया की सबसे चर्चित कॉफी में शामिल करती है।
कुल मिलाकर, कोपी लुवाक सिर्फ एक कॉफी नहीं बल्कि एक ऐसा अनोखा उत्पाद है, जिसने अपनी विचित्र निर्माण प्रक्रिया और बेशकीमती कीमत के कारण पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है।