नई दिल्ली। भारतीय रेलवे ने एसी कोचों में लगातार बढ़ रही कंबल, चादर और तौलियों की चोरी की घटनाओं पर अब सख्त रुख अपनाने का फैसला किया है। रेलवे मंत्रालय ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सरकारी संपत्ति की चोरी रोकने के लिए व्यापक और प्रभावी कार्ययोजना तैयार की जाए। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इस समस्या पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यात्रियों की सुविधा के लिए उपलब्ध कराए जाने वाले बेडरोल की चोरी से रेलवे को हर वर्ष करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। ऐसे में अब दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई भी सुनिश्चित की जाएगी।
रेल मंत्रालय के अनुसार पिछले कुछ वर्षों में एसी कोचों से कंबल, चादर, तकिया कवर और तौलियों की चोरी की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। इससे न केवल रेलवे को आर्थिक नुकसान होता है, बल्कि अगले यात्रियों को भी असुविधा का सामना करना पड़ता है। रेलवे का कहना है कि सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है और इस प्रकार की चोरी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
हाल ही में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव रेलवे के “52 हफ्तों में 52 सुधार” अभियान की जानकारी दे रहे थे। इसी दौरान उन्होंने मीडिया में आई बेडरोल चोरी की रिपोर्टों का उल्लेख करते हुए रेलवे अधिकारियों से सवाल किया कि आखिर इन घटनाओं पर कब तक प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जाएगा। अधिकारियों ने रेल मंत्री को भरोसा दिलाया कि अगले दो महीनों के भीतर इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कानूनी और तकनीकी दोनों स्तरों पर ठोस व्यवस्था तैयार कर ली जाएगी।
रेलवे बोर्ड पहले से ही लिनेन मैनेजमेंट सिस्टम को पूरी तरह आधुनिक और डिजिटल बनाने की दिशा में काम कर रहा है। इसके तहत कंबल, चादर और तौलियों में RFID (रेडियो फ्रीक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन) तकनीक का उपयोग करने की योजना बनाई गई है। प्रत्येक बेडरोल पर विशेष RFID टैग लगाया जाएगा, जिससे उसकी डिजिटल ट्रैकिंग संभव होगी। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि बेडरोल किस ट्रेन, किस कोच और किस स्थान तक पहुंचा तथा कहीं रास्ते में गायब तो नहीं हुआ।
इतना ही नहीं, रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों के एग्जिट प्वाइंट पर ऐसे विशेष सेंसर लगाने की तैयारी भी कर रहा है जो बिना अनुमति बेडरोल बाहर ले जाने की स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी कर देंगे। इससे चोरी की घटनाओं पर काफी हद तक रोक लगने की उम्मीद है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि तकनीक के इस्तेमाल से चोरी की घटनाओं को कम करने के साथ-साथ बेडरोल के प्रबंधन में भी पारदर्शिता आएगी।
कोविड-19 महामारी के दौरान ट्रेनों में बेडरोल सेवा अस्थायी रूप से बंद कर दी गई थी। जनवरी 2022 में सेवा दोबारा शुरू होने के बाद से मई 2026 तक बड़ी संख्या में बेडरोल चोरी होने के मामले सामने आए। विभिन्न मीडिया रिपोर्टों और सूचना के अधिकार (RTI) के माध्यम से प्राप्त जानकारी के अनुसार इस अवधि में लगभग 1.27 करोड़ रुपये मूल्य के बेडरोल चोरी होने का अनुमान लगाया गया है। इस आंकड़े ने रेलवे प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
रेलवे अधिकारियों का कहना है कि अधिकांश यात्री ईमानदारी से यात्रा करते हैं, लेकिन कुछ लोगों की वजह से पूरे सिस्टम को नुकसान उठाना पड़ता है। चोरी की घटनाओं के कारण रेलवे को बार-बार नए कंबल, चादर और तौलिए खरीदने पड़ते हैं, जिससे सार्वजनिक धन का अतिरिक्त व्यय होता है। यदि इस खर्च पर नियंत्रण पाया जाता है तो वही राशि यात्रियों की सुविधाओं को बेहतर बनाने में खर्च की जा सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तकनीक ही नहीं बल्कि यात्रियों में जागरूकता भी आवश्यक है। रेलवे समय-समय पर यात्रियों से अपील करता रहा है कि वे सरकारी संपत्ति को नुकसान न पहुंचाएं और यदि किसी को चोरी या संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे तो तत्काल रेलवे सुरक्षा बल (RPF) या ट्रेन स्टाफ को सूचना दें। इससे अपराधियों पर शीघ्र कार्रवाई संभव होगी।
रेल मंत्रालय का कहना है कि आने वाले समय में चोरी रोकने के लिए निगरानी व्यवस्था और अधिक मजबूत की जाएगी। जरूरत पड़ने पर दोषियों के खिलाफ भारतीय कानून के तहत मुकदमा दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाएगी। रेलवे का उद्देश्य केवल चोरी रोकना ही नहीं, बल्कि यात्रियों को बेहतर, सुरक्षित और स्वच्छ यात्रा अनुभव उपलब्ध कराना भी है।
भारतीय रेलवे देश की जीवनरेखा मानी जाती है और प्रतिदिन लाखों यात्री इसकी सेवाओं का लाभ उठाते हैं। ऐसे में सार्वजनिक संपत्ति की सुरक्षा रेलवे और यात्रियों दोनों की साझा जिम्मेदारी है। मंत्रालय को उम्मीद है कि तकनीकी सुधार, कड़ी निगरानी और कानूनी कार्रवाई के संयुक्त प्रयासों से एसी कोचों में बेडरोल चोरी की घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकेगा।