नई दिल्ली : ऋषि कपूर की मधुर स्मृतियों को याद करते हुए शिक्षाविद् दयानंद वत्स भारतीय ने कहा कि ऋषि कपूर ने रोमांटिक हीरो के रुप में 1973 में एज- ए हीरो सुपर डुपर हिट फिल्म बॉबी से अपना फिल्मी सफर शुरू किया था। उनकी सैंकडों फिल्में हिट रहीं। उन्होने चरित्र अभिनेता के रुप में अपनी दूसरी पारी भी शुरु की, जिसमें लोगों ने उनको खूब पसंद किया। “आ अब लौट चलें” फिल्म का ऋषि कपूर ने निर्देशन भी किया था।
वत्स ने कहा कि ऋषि कपूर बहुत ही जिंदादिल इंसान थे। उन्होनें जिंदगी को भरपूर जिया। ऋषिकपूर ने कैंसर से लडाई लडी और ठीक होकर लौटे भी। श्री 420 और मेरा नाम जोकर में बाल कलाकार की भूमिका भी ऋषि कपूर ने निभाई। मेरा नाम जोकर के बाद जब उनके पिता महान निर्माता, निर्देशक, अभिनेता राजकपूर आर्थिक संकट में फंसे थे तब राजकपूर ने बॉबी से ऋषि कपूर को हीरो के रुप में लांच किया। बॉबी बडी हिट साबित हुई और बॉबी के बाद ऋषि कपूर फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित हो गये और फिर उन्होनें कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। चाँदनी, प्रेम रोग, सरगम, खुदगर्ज, नगीना, निगाहें, लैला मजनूंं, अमर अकबर एंथोनी, नसीब, कर्ज, हम किसी से कम नहीं से लेकर सैंकड़ों फिल्मों में बतौर हीरो दर्शकों के दिलों पर राज किया। अपनी दूसरी पारी मे जब वे अग्निपथ में एक क्रूर खलनायक के रुप में पर्दे पर आए तो उनके इस किरदार से उनके प्रशंसक चौंक गये।
बाद में चरित्र अभिनेता के रुप में ऋषिकपूर ने दो दूनी चार, 102नाट आउट, मुल्क, कपूर एंड संस मेंं अपने प्रभिनय से दर्शकों का दिल जीता। अपनी धर्मपत्नी सुप्रसिद्ध अभिनेत्री नीतू सिंह के साथ उन्होंने बारह फिल्में कीं। उन्हें इस बात का मलाल रहा कि वो अपनी माँ के अंतिम समय में उनके.साथ नहीं थे। बीमारी के कारण इलाज के.लिए उस समय वह अमेरिका में थे। ऋषि कपूर ने अपने खानदान की विरासत को बहुत आगे बढाया। राजकपूर की फिल्मी विरासत कै सच्चे वारिस थे ऋषि कपूर। लीड हीरो से चरित्र अभिनेता तक के लंबे सफर में ऋषि कपूर ने अपना जीवन अपनी शर्तों पर जिया। वत्स ने कहा कि भले ही ऋषि कपूर आज हमारे बीच नहीं हैं लेकिन वे अपनी फिल्मों के जरिये हमेशा अपने करोडों प्रशंसकों के दिलों में अमर रहेंगे।
शिक्षाविद् दयानंद वत्स भारतीय
राष्ट्रीय अध्यक्ष