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बैंक कर्मचारी बनकर ठगों ने कराया APK डाउनलोड, 19.30 लाख ठगे

वडोदरा: गुजरात के वडोदरा में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मंजलपुर इलाके में रहने वाले 63 वर्षीय सेवानिवृत्त फाइनेंसर को कथित तौर पर बैंक कर्मचारी बनकर साइबर ठगों ने निशाना बनाया। ठगों ने बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देने के बहाने पहले उनका भरोसा जीता और इसके बाद मोबाइल […]

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  • September 7, 2026 8:05 am IST, Published 49 minutes ago

वडोदरा: गुजरात के वडोदरा में साइबर ठगी का एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। मंजलपुर इलाके में रहने वाले 63 वर्षीय सेवानिवृत्त फाइनेंसर को कथित तौर पर बैंक कर्मचारी बनकर साइबर ठगों ने निशाना बनाया। ठगों ने बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी देने के बहाने पहले उनका भरोसा जीता और इसके बाद मोबाइल में एक संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवा दी। आरोप है कि इसी के बाद बुजुर्ग के बैंक खाते से अलग-अलग लेनदेन के जरिए करीब 19.30 लाख रुपये निकाल लिए गए।

मामला सामने आने के बाद साइबर क्राइम पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जानकारी के मुताबिक ठगी का तरीका ऐसा था, जिसमें पीड़ित को यह भरोसा दिलाया गया कि सामने वाला व्यक्ति बैंक से जुड़ा कर्मचारी है और बैंकिंग संबंधी प्रक्रिया पूरी कराने में मदद कर रहा है।

बैंक ऑफ इंडिया के नाम पर शुरू हुआ संपर्क

बताया गया है कि पीड़ित अपने बैंक खाते से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए Google पर Bank of India का ग्राहक सेवा नंबर खोज रहे थे। इसी दौरान उन्हें एक नंबर मिला। इसके बाद कथित तौर पर ठगों से उनका संपर्क हुआ।

साइबर अपराधियों ने खुद को बैंक कर्मचारी के तौर पर पेश किया। बातचीत के दौरान उन्होंने बैंकिंग समस्या के समाधान और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने की बात कही। इसी भरोसे का फायदा उठाते हुए बुजुर्ग को एक APK फाइल डाउनलोड करने के लिए कहा गया।

APK यानी Android Package Kit फाइल का इस्तेमाल Android मोबाइल में ऐप इंस्टॉल करने के लिए होता है। साइबर अपराधों में कई बार संदिग्ध या फर्जी APK के जरिए पीड़ित के मोबाइल तक अनधिकृत पहुंच बनाने की कोशिश की जाती है। ऐसे मामलों में मोबाइल पर आने वाले बैंकिंग संदेश, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी अपराधियों के निशाने पर हो सकती है।

APK डाउनलोड होते ही बढ़ा साइबर ठगी का खतरा

पीड़ित के मोबाइल में कथित APK डाउनलोड होने के बाद ठगी का सिलसिला शुरू हुआ। रिपोर्ट के अनुसार, इसके बाद बैंकिंग गतिविधियों से संबंधित जानकारी हासिल की गई और अलग-अलग लेनदेन के जरिए खाते से रकम निकाली गई।

बुजुर्ग को जब तक इस गतिविधि का पता चला, तब तक करीब 19.30 लाख रुपये की राशि खाते से निकल चुकी थी। इतनी बड़ी रकम गंवाने के बाद पीड़ित ने मामले की शिकायत पुलिस से की।

यह घटना इस बात की ओर भी इशारा करती है कि साइबर ठग केवल फोन कॉल या फर्जी लिंक तक सीमित नहीं हैं। वे बैंक अधिकारी, ग्राहक सेवा प्रतिनिधि या अन्य विश्वसनीय संस्थानों के कर्मचारी बनकर लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं।

एक छोटी सी गलती पड़ सकती है लाखों में भारी

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ लगातार लोगों को सलाह देते हैं कि किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई APK फाइल इंस्टॉल नहीं करनी चाहिए। खासकर यदि कोई व्यक्ति बैंक, सरकारी विभाग या किसी बड़ी कंपनी का कर्मचारी बनकर ऐप डाउनलोड करने के लिए कहता है तो पहले उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करनी चाहिए।

किसी भी बैंक की ग्राहक सेवा से संबंधित जानकारी हासिल करने के लिए बैंक की आधिकारिक वेबसाइट, बैंकिंग ऐप या खाते से संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों में उपलब्ध नंबर का इस्तेमाल करना ज्यादा सुरक्षित है।

Google सर्च में दिखाई देने वाला कोई भी नंबर जरूरी नहीं कि संबंधित बैंक का आधिकारिक नंबर ही हो। साइबर अपराधी कई बार ऐसे नंबर या वेबसाइट सामने लाने की कोशिश करते हैं, जिनसे ग्राहक गलत व्यक्ति के संपर्क में पहुंच सकते हैं।

ठगी के बाद तुरंत उठाएं ये कदम

अगर किसी व्यक्ति को शक हो कि उसके बैंक खाते से अनधिकृत लेनदेन हुआ है, तो उसे बिना देरी किए बैंक से संपर्क करना चाहिए। संबंधित बैंकिंग चैनलों के जरिए खाते और कार्ड से जुड़ी जरूरी सुरक्षा कार्रवाई करानी चाहिए।

साथ ही साइबर फ्रॉड की शिकायत जल्द से जल्द संबंधित साइबर अपराध व्यवस्था में दर्ज कराना जरूरी है। समय पर शिकायत करने से लेनदेन को रोकने या रकम की रिकवरी की संभावना बढ़ सकती है।

मोबाइल में संदिग्ध APK इंस्टॉल हो जाने की स्थिति में भी उसे सामान्य ऐप की तरह नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बैंकिंग पासवर्ड, पिन या अन्य संवेदनशील जानकारी सुरक्षित करने के लिए तत्काल कदम उठाना जरूरी है।

बुजुर्ग और ऑनलाइन बैंकिंग यूजर्स रहें खास सतर्क

इस घटना में पीड़ित की उम्र 63 वर्ष बताई गई है। ऐसे मामलों से यह भी स्पष्ट होता है कि साइबर अपराधी उम्रदराज लोगों को भरोसे और मदद के नाम पर निशाना बना सकते हैं। परिवार के सदस्यों को भी बुजुर्गों को ऑनलाइन बैंकिंग, फर्जी कॉल और संदिग्ध ऐप के बारे में लगातार जागरूक करना चाहिए।

किसी भी परिस्थिति में फोन पर बात करने वाले व्यक्ति को बैंकिंग पासवर्ड, ATM PIN, UPI PIN या OTP नहीं बताना चाहिए। इसी तरह किसी अजनबी के निर्देश पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप या संदिग्ध APK डाउनलोड करना भी जोखिम भरा हो सकता है।

वडोदरा के मंजलपुर में सामने आया यह मामला फिलहाल पुलिस जांच के दायरे में है। 19.30 लाख रुपये की कथित साइबर ठगी में आरोपियों ने किस तरह पीड़ित तक पहुंच बनाई, संदिग्ध APK के जरिए क्या गतिविधियां की गईं और रकम किन खातों में ट्रांसफर हुई, इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

फिलहाल यह मामला ऑनलाइन बैंकिंग करने वाले हर व्यक्ति के लिए एक बड़ा सबक है—बैंक कर्मचारी होने का दावा करने वाला हर व्यक्ति वास्तविक बैंक कर्मचारी नहीं होता और किसी के कहने पर APK डाउनलोड करना बेहद जोखिम भरा हो सकता है।

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