गुरुग्राम। शहर में लंबे समय से चरमराई कचरा संग्रहण व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए नगर निगम ने नई योजना तैयार की है। करीब ढाई साल से चली आ रही अव्यवस्थाओं के बाद अब नवंबर 2026 से घर-घर कचरा उठाने की नई व्यवस्था शुरू करने की तैयारी है। इसके लिए नगर निगम ने पांच वर्ष के लिए निविदा जारी की है और दो कंपनियों को अलग-अलग क्षेत्रों में कचरा संग्रहण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नई व्यवस्था के तहत शुरुआती चरण में 100 वाहनों के साथ काम शुरू किया जाएगा। इसके बाद चरणबद्ध तरीके से वाहनों की संख्या बढ़ाकर कुल 875 करने की योजना है। नगर निगम को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से शहर के घरों से नियमित रूप से कचरा उठाया जा सकेगा और सड़कों, खाली प्लॉटों तथा आवासीय क्षेत्रों में कचरा जमा होने की समस्या कम होगी।
नगर निगम ने कचरा संग्रहण व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए दो कंपनियों को अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने की जिम्मेदारी दी है। नई एजेंसियां पांच साल तक घर-घर से कचरा उठाने और निर्धारित स्थानों तक पहुंचाने का काम करेंगी।
इससे पहले वर्ष 2017 में इको ग्रीन कंपनी को करीब 862 करोड़ रुपये का ठेका 20 साल के लिए दिया गया था। हालांकि, लगातार शिकायतों और बंधवाड़ी कचरा निस्तारण स्थल पर कचरा जमा होने की समस्या के चलते जून 2024 में कंपनी का अनुबंध रद्द कर दिया गया था।
इसके बाद से नगर निगम छह-छह महीने के अंतराल पर अस्थायी निविदाओं के माध्यम से कचरा संग्रहण का काम करवा रहा था। इस व्यवस्था के कारण शहर में सफाई कार्यों की निरंतरता और निगरानी को लेकर चुनौतियां बनी हुई थीं। अब पांच साल के लिए नई एजेंसियों को जिम्मेदारी सौंपने से व्यवस्था में स्थिरता आने की उम्मीद है।
नई व्यवस्था के तहत पहले चरण में 100 वाहनों को सड़कों पर उतारा जाएगा। इसके बाद जरूरत और निर्धारित कार्ययोजना के अनुसार वाहनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। पूरी व्यवस्था के तहत 875 वाहनों को कचरा संग्रहण के काम में लगाने की योजना है।
वाहनों की संख्या बढ़ने से शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में कचरा उठाने की प्रक्रिया को नियमित करने में मदद मिल सकती है। नगर निगम का प्रयास है कि प्रत्येक घर से निर्धारित समय पर कचरा उठाया जाए और लोगों को लंबे समय तक कचरा जमा रहने की परेशानी का सामना न करना पड़े।
नई व्यवस्था की एक प्रमुख विशेषता वाहनों की निगरानी के लिए केंद्रीकृत नियंत्रण कक्ष का विकास करना है। इसके माध्यम से कचरा संग्रहण में लगे वाहनों की आवाजाही और उनके कामकाज पर नजर रखी जाएगी।
निगरानी व्यवस्था मजबूत होने से यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किस क्षेत्र में कचरा उठाया गया और कहां काम में देरी हुई। इसके अलावा नागरिकों की शिकायतों का समाधान करने और संबंधित एजेंसियों की जवाबदेही तय करने में भी सहायता मिलने की उम्मीद है।
मेयर राजरानी मल्होत्रा ने कहा कि नई व्यवस्था में वाहनों की निगरानी से लेकर घर-घर कचरा संग्रहण तक जवाबदेही तय की जाएगी। नगर निगम का प्रयास है कि प्रत्येक घर से नियमित रूप से कचरा उठे और नागरिकों को स्वच्छ वातावरण मिल सके।
उन्होंने कहा कि व्यवस्था की लगातार निगरानी की जाएगी, ताकि पहले सामने आई समस्याएं दोबारा पैदा न हों।
गुरुग्राम में तेजी से बढ़ती आबादी और शहरी विस्तार के बीच कचरा प्रबंधन नगर निगम के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। नियमित कचरा संग्रहण नहीं होने से कई इलाकों में गंदगी, दुर्गंध और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पैदा होती हैं।
ऐसे में नवंबर से प्रस्तावित नई व्यवस्था शहर के नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि, इसकी वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि एजेंसियां निर्धारित समय पर कचरा उठाती हैं या नहीं और नगर निगम निगरानी व्यवस्था को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करता है।
यदि योजना के अनुसार सभी 875 वाहन काम में लगाए जाते हैं और शिकायतों का समय पर समाधान होता है, तो गुरुग्राम की सफाई व्यवस्था में सुधार की उम्मीद की जा सकती है। अब शहरवासियों की नजरें नवंबर में शुरू होने वाली इस नई व्यवस्था पर टिकी हैं।