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बारिश ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें, मंडियों में भीगा धान और अनाज

अनाज मंडियों में खुले में रखी उपज को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल, ढके हुए भंडारण स्थल और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था की जरूरत होती है। बारिश का पानी यदि मंडी परिसर में जमा हो जाए, तो अनाज को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। पानी के संपर्क में आने से...

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  • October 12, 2026 10:39 am IST, Published 1 hour ago

हरियाणा और पंजाब में बेमौसम बारिश ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। हरियाणा के करनाल स्थित अनाज मंडी में बारिश के कारण धान भीग गया, जिससे फसल की गुणवत्ता और उसे सुरक्षित रखने को लेकर किसानों की चिंता बढ़ गई है। वहीं, पंजाब के फाजिल्का की अनाज मंडी में बारिश के बाद पानी भरने से वहां रखा बड़ी मात्रा में अनाज प्रभावित होने की खबर है। मंडियों में पानी जमा होने से किसानों और अनाज की खरीद-बिक्री से जुड़े लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। बारिश के इस असर ने मंडियों में जल निकासी और फसल को सुरक्षित रखने की व्यवस्थाओं पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।

करनाल की अनाज मंडी में किसान अपनी धान की फसल बेचने के लिए लेकर पहुंचे थे। इसी दौरान हुई बेमौसम बारिश ने उनकी परेशानी बढ़ा दी। खुले स्थानों पर रखी धान की फसल बारिश के पानी से भीग गई। किसानों के लिए यह स्थिति चिंता का विषय है, क्योंकि धान को लंबे समय तक सुरक्षित रखने और उसकी गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उचित भंडारण जरूरी होता है। बारिश के कारण नमी बढ़ने से फसल को सुखाने और संभालने में अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ सकती है।

किसानों की चिंता सिर्फ धान भीगने तक सीमित नहीं है। मंडी में फसल की खरीद, तुलाई और उठान की प्रक्रिया भी मौसम के कारण प्रभावित हो सकती है। यदि अनाज समय पर नहीं सूखता, तो उसकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका रहती है। ऐसे में किसानों को अपनी उपज बेचने में देरी और अतिरिक्त खर्च जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, करनाल मंडी में कितनी मात्रा में धान प्रभावित हुआ है और किसानों को कितना नुकसान हुआ है, इसका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

पंजाब के फाजिल्का में भी बारिश के बाद हालात चिंताजनक बताए जा रहे हैं। यहां की अनाज मंडी में पानी भर जाने से वहां रखा अनाज प्रभावित हुआ है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, मंडी में लाखों क्विंटल अनाज खराब होने की बात कही जा रही है। यदि नुकसान की यह मात्रा आधिकारिक तौर पर पुष्ट होती है, तो यह किसानों और खरीद व्यवस्था से जुड़े विभागों के लिए गंभीर चिंता का विषय होगा। फिलहाल, अनाज के वास्तविक नुकसान का आकलन और प्रभावित भंडार की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है।

अनाज मंडियों में खुले में रखी उपज को बारिश से बचाने के लिए तिरपाल, ढके हुए भंडारण स्थल और प्रभावी जल निकासी व्यवस्था की जरूरत होती है। बारिश का पानी यदि मंडी परिसर में जमा हो जाए, तो अनाज को सुरक्षित रखना मुश्किल हो जाता है। पानी के संपर्क में आने से फसल में नमी बढ़ सकती है और लंबे समय तक गीला रहने पर उसके खराब होने का खतरा पैदा हो सकता है। इससे न केवल किसानों को नुकसान हो सकता है, बल्कि खरीद और भंडारण की प्रक्रिया पर भी असर पड़ सकता है।

करनाल और फाजिल्का की घटनाएं यह सवाल उठाती हैं कि मंडियों में मौसम की मार से निपटने के लिए कितनी तैयारी की गई है। बारिश की संभावना के दौरान अनाज को ढकने, पानी की निकासी सुनिश्चित करने और खुले में रखी फसल को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने के लिए समय रहते कदम उठाना जरूरी है। मंडी प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल से नुकसान को कम किया जा सकता है।

अब किसानों की नजर इस बात पर है कि प्रभावित अनाज की स्थिति का आकलन कब किया जाएगा और नुकसान से बचाव के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। जरूरत इस बात की है कि मंडियों में जल निकासी और भंडारण व्यवस्था की समीक्षा की जाए, ताकि बेमौसम बारिश के दौरान किसानों की मेहनत से तैयार फसल को सुरक्षित रखा जा सके।

 

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