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74 की उम्र में जुड़वा बेटियों की मां बनीं, कहानी चौंकाएगी

विशेष रिपोर्ट |सोशल मीडिया पर इन दिनों 74 साल की उम्र में जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली एक भारतीय महिला की तस्वीर और कहानी फिर से चर्चा में है। तस्वीर में बुजुर्ग दंपती के साथ नवजात जुड़वा बच्चों की तस्वीर दिखाई गई है। पोस्ट में महिला को दुनिया की सबसे उम्रदराज मां बताया जा […]

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  • September 7, 2026 8:49 am IST, Published 50 minutes ago

विशेष रिपोर्ट |सोशल मीडिया पर इन दिनों 74 साल की उम्र में जुड़वा बच्चों को जन्म देने वाली एक भारतीय महिला की तस्वीर और कहानी फिर से चर्चा में है। तस्वीर में बुजुर्ग दंपती के साथ नवजात जुड़वा बच्चों की तस्वीर दिखाई गई है। पोस्ट में महिला को दुनिया की सबसे उम्रदराज मां बताया जा रहा है। हालांकि, यह घटना नई नहीं है, बल्कि सितंबर 2019 की है, जब आंध्र प्रदेश की रहने वाली एर्रामट्टी मंगायम्मा ने 74 वर्ष की उम्र में जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। उस समय यह मामला भारत ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सुर्खियों में रहा था।

57 साल की शादी के बाद पूरी हुई मां बनने की इच्छा

मंगायम्मा की शादी वर्ष 1962 में वाई. राजा राव से हुई थी। शादी के बाद लंबे समय तक दंपती संतान की उम्मीद करते रहे, लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिली। रिपोर्टों के मुताबिक, करीब 57 वर्षों तक दंपती संतानहीन रहे। इस दौरान मंगायम्मा को समाज और आसपास के लोगों की बातों का भी सामना करना पड़ा।

उम्र बढ़ती गई, लेकिन मां बनने की इच्छा खत्म नहीं हुई। इसी दौरान उनके आसपास रहने वाली एक महिला ने IVF तकनीक के जरिए अधिक उम्र में बच्चे को जन्म दिया। इस घटना से मंगायम्मा को भी उम्मीद मिली और उन्होंने डॉक्टरों से संपर्क करने का फैसला किया।

IVF के जरिए गर्भधारण, डॉक्टर भी रहे हैरान

मंगायम्मा की उम्र उस समय 74 वर्ष थी और वह मेनोपॉज पार कर चुकी थीं। ऐसे में प्राकृतिक रूप से गर्भधारण संभव नहीं था। डॉक्टरों ने जांच के बाद IVF यानी In Vitro Fertilisation तकनीक का सहारा लिया। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनके पति के शुक्राणु का इस्तेमाल किया गया, जबकि अंडाणु के लिए डोनर की मदद ली गई।

रिपोर्टों में बताया गया कि IVF का पहला प्रयास सफल रहा और मंगायम्मा गर्भवती हो गईं। गर्भावस्था के दौरान उनकी उम्र को देखते हुए डॉक्टरों की एक टीम लगातार उनकी निगरानी करती रही। विशेषज्ञों की टीम में स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ दूसरे चिकित्सा विशेषज्ञ भी शामिल थे, ताकि गर्भावस्था के दौरान किसी संभावित जटिलता से निपटा जा सके।

5 सितंबर 2019 को हुआ जुड़वा बच्चियों का जन्म

5 सितंबर 2019 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर स्थित एक निजी अस्पताल में मंगायम्मा ने जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया। डॉक्टरों ने उनकी डिलीवरी सामान्य प्रक्रिया से कराने के बजाय सी-सेक्शन का विकल्प चुना। जन्म के बाद डॉक्टरों ने मां और दोनों नवजात बच्चियों की स्थिति को स्थिर बताया था।

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, दोनों बच्चियों का जन्म वजन करीब 1.8 किलोग्राम बताया गया था। जन्म के बाद मां और बच्चों को चिकित्सकीय निगरानी में रखा गया। मंगायम्मा की उम्र को देखते हुए डॉक्टरों के लिए यह मामला बेहद चुनौतीपूर्ण था।

उम्र को लेकर क्यों बना था रिकॉर्ड का दावा?

जब यह खबर सामने आई, तब डॉक्टरों और कई मीडिया रिपोर्टों ने मंगायम्मा को दुनिया की सबसे अधिक उम्र में बच्चे को जन्म देने वाली महिलाओं में शामिल बताया। कुछ रिपोर्टों ने इसे संभावित विश्व रिकॉर्ड भी कहा था। उनकी उम्र की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाणपत्र का उल्लेख भी किया गया था।

हालांकि, किसी भी वायरल पोस्ट में यह ध्यान रखना जरूरी है कि यह घटना वर्ष 2019 की है। इसलिए अगर सोशल मीडिया पर इसे वर्तमान समय की घटना की तरह प्रस्तुत किया जा रहा है, तो वह भ्रामक हो सकता है। खबर का मूल तथ्य यह है कि मंगायम्मा ने सितंबर 2019 में IVF तकनीक के माध्यम से 74 वर्ष की उम्र में जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था।

क्या 74 साल की उम्र में प्राकृतिक गर्भधारण हुआ था?

इस वायरल कहानी का सबसे महत्वपूर्ण पहलू IVF है। मंगायम्मा ने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण नहीं किया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, मेनोपॉज के बाद उनके लिए डोनर एग का इस्तेमाल करते हुए IVF प्रक्रिया अपनाई गई थी। उनके पति के शुक्राणु से भ्रूण तैयार किया गया और उसे गर्भाशय में प्रत्यारोपित किया गया।

इसलिए सोशल मीडिया पोस्ट को पढ़ते समय यह अंतर समझना जरूरी है कि मामला सामान्य या प्राकृतिक गर्भधारण का नहीं, बल्कि सहायक प्रजनन तकनीक यानी IVF का था।

यह कहानी आज भी क्यों चर्चा में आती है?

मंगायम्मा की कहानी सिर्फ उम्र के कारण चर्चित नहीं हुई थी। इसके पीछे वर्षों तक संतान की इच्छा, सामाजिक दबाव, आधुनिक चिकित्सा तकनीक और मातृत्व की चाह जैसे कई पहलू जुड़े थे। यही वजह है कि उनकी पुरानी तस्वीरें और पोस्ट समय-समय पर सोशल मीडिया पर दोबारा वायरल होती रहती हैं।

इस घटना ने अधिक उम्र में IVF कराने की मेडिकल और नैतिक सीमाओं को लेकर भी बहस छेड़ी थी। विशेषज्ञों के लिए इतनी अधिक उम्र में गर्भावस्था अपने आप में बेहद संवेदनशील स्थिति मानी जाती है और ऐसे मामलों में मां तथा बच्चे दोनों की सुरक्षा के लिए विशेष चिकित्सकीय निगरानी जरूरी होती है।

वायरल पोस्ट से पहले तारीख जरूर जांचें

आज सोशल मीडिया पर पुरानी घटनाओं को नई खबर बताकर साझा करना आम हो गया है। मंगायम्मा से जुड़ी यह तस्वीर भी इसी तरह दोबारा वायरल होती दिखाई देती है। इसलिए पाठकों के लिए जरूरी है कि किसी वायरल पोस्ट पर भरोसा करने से पहले उसकी तारीख और मूल घटना की जानकारी जरूर जांचें।

निष्कर्ष: 74 वर्षीय एर्रामट्टी मंगायम्मा ने 5 सितंबर 2019 को आंध्र प्रदेश के गुंटूर में IVF तकनीक के जरिए जुड़वा बच्चियों को जन्म दिया था। 57 साल के वैवाहिक जीवन के बाद मां बनने की उनकी कहानी उस समय दुनिया भर में चर्चा का विषय बनी थी। आज वायरल हो रही पोस्ट उसी पुरानी घटना से संबंधित है, न कि वर्ष 2026 की कोई नई घटना।

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