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JPSC परीक्षा जांच में बड़ा खुलासा, TDPL मैनेजर से पूछताछ में क्या आया सामने?

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की भूमिका भी जांच के केंद्र में आती जा रही है। जुलाई 2026 में इस मामले में झारखंड CID ने JPSC और परीक्षा एजेंसी से […]

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  • August 10, 2026 7:00 pm IST, Published 35 minutes ago

रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी टीएसआर डेटा प्रोसेसिंग प्राइवेट लिमिटेड (TDPL) की भूमिका भी जांच के केंद्र में आती जा रही है। जुलाई 2026 में इस मामले में झारखंड CID ने JPSC और परीक्षा एजेंसी से जुड़े कई लोगों से पूछताछ तथा गिरफ्तारियां की हैं। इसी क्रम में TDPL के मार्केटिंग मैनेजर रहे मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी का नाम भी जांच में प्रमुखता से सामने आया है।

मामले को लेकर अलग-अलग मीडिया रिपोर्टों में अभय तिवारी की पूर्व भूमिका, प्रतियोगी परीक्षाओं में उनकी सफलता और TDPL से उनके संबंधों को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। हालांकि, इन आरोपों और जांच में सामने आ रहे तथ्यों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निकलेगा।

JPSC परीक्षा विवाद के बाद CID की कार्रवाई तेज

JPSC की 14वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम को लेकर कथित अनियमितताओं की शिकायतों के बाद CID ने जांच शुरू की। जांच के दौरान JPSC कार्यालय और परीक्षा संचालन से जुड़ी एजेंसी TDPL के ठिकानों पर छापेमारी की गई। रिपोर्टों के मुताबिक, जांच टीम ने परीक्षा से जुड़े दस्तावेजों, डिजिटल उपकरणों और अन्य रिकॉर्ड की पड़ताल की।

इसके बाद मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। इनमें JPSC की सहायक परीक्षा नियंत्रक, TDPL के निदेशक और कंपनी से जुड़े कर्मचारी शामिल बताए गए। बाद में TDPL के तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किए जाने की भी जानकारी सामने आई।

कौन हैं अभय कुमार तिवारी?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मनोज कुमार तिवारी उर्फ अभय कुमार तिवारी पूर्व में TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के पद पर काम कर चुके हैं। वर्तमान में वे गोड्डा जिले में प्रखंड आपूर्ति पदाधिकारी के पद पर कार्यरत बताए गए। जांच के दौरान उनका नाम JPSC और JSSC से जुड़ी परीक्षाओं के संदर्भ में सामने आया है।

कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उन्होंने विभिन्न सरकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता हासिल की थी। यही पहलू अब जांच एजेंसियों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि जिस कंपनी पर परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी थी, उससे उनके पूर्व संबंधों को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

परीक्षा एजेंसी से संबंध बना जांच का अहम पहलू

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल परीक्षा संचालन की जिम्मेदारी और उससे जुड़े लोगों के संभावित हितों को लेकर है। रिपोर्टों के मुताबिक, TDPL को विभिन्न परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियां मिली थीं और कंपनी में अभय तिवारी ने मैनेजर के तौर पर काम किया था। यही कारण है कि CID कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच में उनकी भूमिका और कंपनी से जुड़े संपर्कों को खंगाल रही है।

जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया, डेटा प्रोसेसिंग, अभ्यर्थियों के रिकॉर्ड और परिणाम तैयार करने की प्रक्रिया में कहीं कोई अनधिकृत हस्तक्षेप हुआ था या नहीं। डिजिटल रिकॉर्ड और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच भी इसी कड़ी का हिस्सा बताई जा रही है।

20 प्रतिशत कमीशन के दावे की भी चर्चा

सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट और कुछ मीडिया रिपोर्टों में TDPL के कथित मार्केटिंग मैनेजर से जुड़े कमीशन के दावे भी सामने आए हैं। वायरल सामग्री में यह आरोप लगाया गया है कि परीक्षा संचालन का ठेका दिलाने के बदले कथित तौर पर भारी रकम और कमीशन की व्यवस्था की गई थी।

हालांकि, इन दावों को आरोप या जांच के दायरे में आए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए। किसी व्यक्ति पर भ्रष्टाचार या कमीशन लेने का आरोप तब तक सिद्ध नहीं माना जा सकता, जब तक जांच एजेंसी की आधिकारिक पुष्टि और न्यायिक प्रक्रिया में उसके प्रमाण सामने न आ जाएं।

TDPL को लेकर भी उठे गंभीर सवाल

JPSC विवाद के बीच परीक्षा एजेंसी TDPL को लेकर भी सवाल उठे हैं। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, TDPL को पहले JSSC द्वारा ब्लैकलिस्ट किए जाने की जानकारी सामने आई थी। इसके बावजूद बाद में JPSC परीक्षा के संचालन से उसका जुड़ाव विवाद का विषय बना।

यही वजह है कि अब जांच केवल परीक्षा परिणाम तक सीमित नहीं रह गई है। एजेंसी के चयन की प्रक्रिया, टेंडर, परीक्षा संचालन, डेटा प्रबंधन और संबंधित अधिकारियों तथा कर्मचारियों के बीच संपर्कों की भी पड़ताल महत्वपूर्ण हो गई है।

तीन TDPL कर्मचारियों की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल

24 जुलाई 2026 की रिपोर्टों के मुताबिक CID ने TDPL से जुड़े तीन कर्मचारियों—हेमंत वर्मा, प्रदीप कुमार सिंह और संजय कुमार—को गिरफ्तार किया। उनसे JPSC परीक्षा संचालन और डेटा प्रोसेसिंग से जुड़े पहलुओं पर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई।

इससे पहले भी मामले में कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। जांच का दायरा बढ़ने के साथ यह स्पष्ट है कि एजेंसी अब परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े अलग-अलग स्तरों की भूमिका को जोड़कर देख रही है।

अभ्यर्थियों की नजर जांच के अगले कदम पर

JPSC परीक्षा विवाद का सबसे बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा है जिन्होंने पूरी प्रक्रिया में मेहनत और समय लगाया। परीक्षा परिणाम में कथित गड़बड़ी के आरोपों के बाद अभ्यर्थियों की ओर से पारदर्शिता, OMR रिकॉर्ड और परिणाम प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए गए हैं।

JPSC ने 22 जुलाई 2026 को 14वीं संयुक्त असैनिक सेवा मुख्य परीक्षा-2025 को अगले आदेश तक स्थगित कर दिया था। साथ ही परीक्षा कैलेंडर-2026 के तहत प्रस्तावित अन्य परीक्षाओं को भी फिलहाल रोकने की जानकारी सामने आई।

अब अभ्यर्थियों की निगाह CID जांच की रिपोर्ट और आगे होने वाली कानूनी कार्रवाई पर है। जांच में यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी प्रमाणित होती है तो उसकी जिम्मेदारी तय होना इस पूरे विवाद का सबसे महत्वपूर्ण चरण होगा।

निष्कर्ष: JPSC परीक्षा विवाद में TDPL और उससे जुड़े लोगों की भूमिका फिलहाल जांच का विषय है। अभय कुमार तिवारी को लेकर सामने आए दावों और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया से ही होगा। ऐसे में वायरल दावों को प्रमाणित तथ्य मानने के बजाय आधिकारिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार करना जरूरी है।

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