रांची: झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के विरोध में चल रहा छात्रों का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता और जेएलकेएम (JLKM) के नेता देवेंद्र नाथ महतो ने चौथे दिन पानी पी लिया, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनका अनशन अभी समाप्त नहीं हुआ है। यह फैसला उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से वीडियो कॉल पर हुई बातचीत के बाद लिया।
देवेंद्र नाथ महतो पिछले कई दिनों से झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC), जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों के विरोध में आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। उनका कहना है कि राज्य में लंबे समय से भर्ती परीक्षाओं को लेकर पारदर्शिता पर सवाल उठते रहे हैं और युवा अभ्यर्थी लगातार प्रभावित हो रहे हैं।
महतो ने बताया कि 25 जुलाई से सत्याग्रह शुरू किया गया था और 2 अगस्त से उन्होंने अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। शुरुआत में उन्होंने भोजन के साथ पानी भी छोड़ दिया था। लगातार उपवास के कारण उनकी तबीयत बिगड़ने लगी और चिकित्सकों ने उन्हें चेतावनी दी कि यदि जल्द पानी नहीं पिया गया तो अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है। इसी बीच सोनम वांगचुक को महतो की स्थिति की जानकारी मिली। उन्होंने वीडियो कॉल के माध्यम से छात्र नेता से बातचीत की और आग्रह किया कि वे कम से कम पानी पीना शुरू करें। वांगचुक ने कहा कि किसी भी आंदोलन का उद्देश्य स्वयं को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि सरकार और समाज का ध्यान मुद्दे की ओर आकर्षित करना होता है।
बातचीत के दौरान वांगचुक ने अपने आंदोलनों का अनुभव भी साझा किया। उन्होंने बताया कि जब वे जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल पर बैठे थे, तब भी पानी पीते थे और भोजन का त्याग किया था। उन्होंने महतो से भी इसी तरह आंदोलन जारी रखने की सलाह दी ताकि स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा न बने। देवेंद्र नाथ महतो ने भी अपनी बात रखते हुए कहा कि उन्होंने पानी पीने से पहले एक शर्त रखी थी। उन्होंने वांगचुक से कहा कि जब तक छात्रों का आंदोलन अपने उद्देश्य तक नहीं पहुंचता, तब तक वे उनका नैतिक समर्थन जारी रखें। साथ ही उन्होंने सोनम वांगचुक को झारखंड आने और आंदोलनरत छात्रों से मिलने का निमंत्रण भी दिया। महतो के अनुसार, वांगचुक ने उनसे मिलने का आश्वासन दिया है।
वीडियो कॉल के बाद देवेंद्र नाथ महतो ने पानी पी लिया, लेकिन उन्होंने दोहराया कि उनकी भूख हड़ताल पहले की तरह जारी रहेगी। उनका कहना है कि जब तक छात्रों की मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। रांची में छात्रों का यह आंदोलन अब कई दिनों से जारी है। आंदोलनकारी प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता, कथित पेपर लीक और भर्ती प्रक्रियाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि लगातार विवादों के कारण युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार को इस दिशा में प्रभावी कदम उठाने चाहिए।
सोनम वांगचुक ने बातचीत के दौरान महात्मा गांधी का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि गांधीजी भी लंबे अनशन के दौरान पानी और आवश्यक तरल पदार्थ लेते थे, क्योंकि आंदोलन का उद्देश्य जीवन की रक्षा करते हुए समाज और सरकार को जागरूक करना होता है। उन्होंने महतो से आग्रह किया कि वे अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें और आंदोलन को सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाएं।
अब सभी की नजरें राज्य सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर हैं। यदि सरकार आंदोलनरत छात्रों से संवाद शुरू करती है और उनकी मांगों पर विचार करती है, तो आंदोलन का समाधान निकल सकता है। फिलहाल देवेंद्र नाथ महतो ने स्पष्ट कर दिया है कि पानी पीने का निर्णय स्वास्थ्य को ध्यान में रखकर लिया गया है, लेकिन उनकी भूख हड़ताल और छात्रों के अधिकारों की लड़ाई पहले की तरह जारी रहेगी।