रांची: झारखंड में जेपीएससी और जेएसएससी अभ्यर्थियों से जुड़े आंदोलन के बीच राजनीति भी तेज होती दिखाई दे रही है। रांची में विधानसभा घेराव मार्च के दौरान अनशन पर बैठे देवेंद्र नाथ महतो स्ट्रेचर के सहारे आंदोलन स्थल तक पहुंचे। इस दौरान उनके साथ झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झामुमो के वरिष्ठ नेता शीबू सोरेन की तस्वीर भी नजर आई। महतो ने इसी तस्वीर को सामने रखते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और मौजूदा सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
देवेंद्र नाथ महतो ने कहा कि यदि ‘गुरुजी’ यानी शीबू सोरेन आज सक्रिय रूप से उनके बीच होते, तो वह युवाओं और अभ्यर्थियों के इस आंदोलन के साथ खड़े होते। उनके इस बयान को सीधे तौर पर हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली सरकार के लिए राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
स्ट्रेचर पर पहुंचे आंदोलनकारी
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों की मांगों को लेकर चल रहे आंदोलन के बीच देवेंद्र नाथ महतो अनशन पर हैं। उनकी तबीयत खराब होने के बावजूद वह स्ट्रेचर के सहारे आंदोलन स्थल पर पहुंचे। वहां मौजूद अभ्यर्थियों और समर्थकों के बीच उन्होंने अपनी बात रखी।
महतो के साथ शीबू सोरेन की तस्वीर को लेकर भी आंदोलन स्थल पर चर्चा रही। उन्होंने तस्वीर के जरिए झारखंड आंदोलन और राज्य के युवाओं के मुद्दों को जोड़ने की कोशिश की। उनका कहना था कि जिस राजनीतिक विरासत की बात की जाती है, उसमें युवाओं और स्थानीय लोगों के अधिकारों की आवाज को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का विधानसभा घेराव
अभ्यर्थियों की ओर से भर्ती परीक्षाओं और नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर विधानसभा घेराव मार्च का आह्वान किया गया। प्रदर्शन में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों और आंदोलनकारियों के जुटने की बात सामने आई। आंदोलनकारियों का जोर इस बात पर है कि भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामलों में सरकार स्पष्ट रुख अपनाए और अभ्यर्थियों की समस्याओं का समाधान किया जाए।
प्रदर्शन के दौरान सरकार से संवाद और मांगों पर ठोस कार्रवाई की मांग भी उठती रही। आंदोलनकारियों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं का समय और भविष्य सीधे तौर पर भर्ती प्रक्रिया से जुड़ा हुआ है। ऐसे में किसी भी स्तर पर देरी या विवाद का असर अभ्यर्थियों पर पड़ता है।
‘गुरुजी होते तो आंदोलन के साथ खड़े होते’
देवेंद्र नाथ महतो का शीबू सोरेन की तस्वीर के साथ पहुंचना और उनके नाम का उल्लेख करना इस पूरे घटनाक्रम का राजनीतिक रूप से अहम हिस्सा रहा। महतो ने कहा कि अगर गुरुजी जीवित होते, तो वह इस आंदोलन में युवाओं के साथ खड़े दिखाई देते।
उनके बयान का निशाना मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार पर था। महतो ने सवाल उठाया कि जिस झारखंड की पहचान संघर्ष और आंदोलन से बनी, वहां युवाओं की आवाज को किस तरह सुना जा रहा है।
सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थियों का आंदोलन सरकार के लिए चुनौती इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि भर्ती और रोजगार से जुड़े मुद्दे सीधे राज्य के युवा वर्ग से जुड़े हैं। विधानसभा के आसपास प्रदर्शन और घेराव की कोशिशों के बीच प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ आंदोलनकारियों की मांगों को लेकर संवाद की चुनौती भी है।
फिलहाल, देवेंद्र नाथ महतो का स्ट्रेचर पर आंदोलन स्थल पहुंचना और शीबू सोरेन की तस्वीर के साथ दिया गया बयान सोशल और राजनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत तथा मांगों पर होने वाली कार्रवाई से यह स्पष्ट होगा कि आंदोलन किस दिशा में आगे बढ़ता है।