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राजौरी बॉर्डर पर रातभर तनाव, घुसपैठ की कोशिश भारतीय सेना ने की नाकाम

राजौरी/जम्मू। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार देर रात राजौरी के तरकुंडी (तारकुंडी) सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने के बाद भारतीय सेना और पाकिस्तान की ओर से करीब दो घंटे तक गोलीबारी हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पार […]

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  • July 18, 2026 11:41 am IST, Published 1 hour ago

राजौरी/जम्मू। जम्मू-कश्मीर के राजौरी जिले में नियंत्रण रेखा (LoC) पर एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। शुक्रवार देर रात राजौरी के तरकुंडी (तारकुंडी) सेक्टर में संदिग्ध गतिविधियां दिखाई देने के बाद भारतीय सेना और पाकिस्तान की ओर से करीब दो घंटे तक गोलीबारी हुई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, भारतीय सुरक्षा बलों ने सीमा पार से संभावित घुसपैठ की कोशिश को समय रहते भांप लिया और जवाबी कार्रवाई करते हुए उसे विफल कर दिया। इस घटना को “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद नियंत्रण रेखा पर सामने आए सबसे बड़े संघर्षविराम उल्लंघनों में से एक माना जा रहा है।

रक्षा सूत्रों के मुताबिक, शुक्रवार रात लगभग 10 बजे अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों को सीमा पार कुछ संदिग्ध हलचल दिखाई दी। इसके बाद भारतीय सेना ने सतर्कता के तहत फायरिंग शुरू की। जवाब में पाकिस्तान की ओर से भी छोटे हथियारों से गोलीबारी की गई। दोनों ओर से चली फायरिंग करीब डेढ़ से दो घंटे तक जारी रही।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि गोलीबारी की आड़ लेकर आतंकियों को भारतीय सीमा में प्रवेश कराने की कोशिश की जा रही थी। हालांकि, भारतीय जवानों की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई के कारण यह प्रयास सफल नहीं हो सका। फिलहाल किसी भी पक्ष से जान-माल के नुकसान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

रातभर चली गोलीबारी के बाद शनिवार सुबह सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके में व्यापक तलाशी अभियान शुरू किया। जंगलों और संवेदनशील इलाकों की गहन जांच की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई घुसपैठिया भारतीय क्षेत्र में प्रवेश न कर पाया हो। साथ ही नियंत्रण रेखा पर निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत कर दिया गया है।

हालिया घटनाक्रम के बाद सुरक्षा बल हाई अलर्ट पर हैं। सीमा से लगे इलाकों में अतिरिक्त जवानों की तैनाती की गई है और आधुनिक निगरानी उपकरणों के जरिए गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। सेना की प्राथमिकता किसी भी संभावित घुसपैठ या आतंकी गतिविधि को शुरुआती स्तर पर ही विफल करना है।

सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि “ऑपरेशन सिंदूर” के बाद नियंत्रण रेखा अपेक्षाकृत शांत रही थी, लेकिन राजौरी की यह घटना बताती है कि सीमा पार से घुसपैठ की कोशिशें पूरी तरह थमी नहीं हैं। ऐसे में सुरक्षा बल लगातार सतर्क हैं और किसी भी चुनौती से निपटने के लिए तैयार हैं।

फिलहाल सेना और सुरक्षा एजेंसियां घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं। आधिकारिक रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि घुसपैठ की कोशिश कितनी बड़ी थी और उसमें कितने आतंकियों के शामिल होने की आशंका है। सुरक्षा बलों ने स्थानीय लोगों से भी सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील की है।

 

 

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