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मोदी से फडणवीस तक के गढ़ में झटका, योगी के गोरखपुर में जीत

इन सीटों के नतीजे केवल राजनीतिक दलों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संबंधित वर्गों के बीच उनकी स्वीकार्यता का संकेत भी देते हैं। उत्तर प्रदेश में सपा की बढ़त और वाराणसी में उसकी जीत, गोरखपुर में बीजेपी की करीबी विजय तथा नागपुर में कांग्रेस की सफलता ने इन चुनावों को...

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  • October 29, 2026 10:56 am IST, Published 34 minutes ago

नयी दिल्लीः देश के कई राज्यों में विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों पर आए नतीजों ने राजनीतिक दलों के बीच मुकाबले को चर्चा में ला दिया है। उत्तर प्रदेश, बिहार, कर्नाटक और महाराष्ट्र की कुल 28 सीटों की मतगणना के दौरान कई निर्वाचन क्षेत्रों में कड़ा संघर्ष देखने को मिला। उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मुकाबला खास तौर पर चर्चा में रहा। वाराणसी में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा, जबकि गोरखपुर में पार्टी ने मुश्किल मुकाबले के बाद जीत दर्ज की। इन नतीजों ने शिक्षक और स्नातक वर्ग के मतदाताओं के बीच राजनीतिक दलों की स्थिति पर नए सिरे से बहस छेड़ दी है।

उत्तर प्रदेश की 11 विधान परिषद सीटों के नतीजों में बीजेपी ने छह सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि सपा चार सीटें जीतने में सफल रही और एक सीट पर बढ़त की जानकारी सामने आई। इन चुनावों में वाराणसी की शिक्षक सीट का परिणाम विशेष रूप से महत्वपूर्ण रहा। यहां सपा के लाल बिहारी यादव ने दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने बीजेपी के उम्मीदवार डॉ. प्रमोद मिश्रा को 5,015 मतों के अंतर से पराजित किया। लाल बिहारी यादव को कुल 11,612 वोट मिले, जबकि प्रमोद मिश्रा के खाते में 6,597 मत आए। इस परिणाम ने वाराणसी में दोनों दलों के बीच राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को फिर चर्चा में ला दिया।

गोरखपुर की सीट पर बीजेपी के उम्मीदवार ध्रुव कुमार त्रिपाठी ने कड़े मुकाबले में जीत दर्ज की। मतगणना के दौरान वोटों के उतार-चढ़ाव के बीच उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी राजीव यादव को 307 मतों से हराया। ध्रुव कुमार त्रिपाठी को 14,887 वोट मिले, जबकि राजीव यादव को 14,580 मत प्राप्त हुए। कम अंतर से आए इस नतीजे ने दिखाया कि इस निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला आखिरी चरण तक चुनौतीपूर्ण बना रहा।

बिहार की पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की सीट पर भी मुकाबला चर्चा में रहा। यहां जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) के नीरज कुमार ने राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के दिलीप राय को हराया। इस सीट पर जन सुराज के अनुज सिंह की मौजूदगी के कारण मुकाबले पर भी नजर बनी रही। पटना स्नातक क्षेत्र का राजनीतिक महत्व इसलिए भी है क्योंकि यह बिहार की राजधानी से जुड़ा निर्वाचन क्षेत्र है और यहां का परिणाम राज्य की राजनीति के संदर्भ में देखा जाता है।

महाराष्ट्र में नागपुर स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के अभिजीत गोविंदराव वंजारी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। उन्होंने इससे पहले दिसंबर 2020 में भी इसी सीट पर विजय प्राप्त की थी। पेशे से अधिवक्ता और शिक्षाविद् वंजारी लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े रहे हैं। नागपुर का महत्व राज्य की राजनीति में खास है। यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का मुख्यालय होने के साथ-साथ महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का गृह क्षेत्र भी है। ऐसे में यहां कांग्रेस की जीत को राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

समाजवादी पार्टी के लिए इन चुनावों में एक उल्लेखनीय पहलू यह रहा कि पार्टी ने आगरा और लखनऊ की स्नातक सीटों पर भी जीत हासिल की। पिछले चुनाव में सपा को तीन सीटें मिली थीं, जबकि इस बार उसके पांच सीटों तक पहुंचने की स्थिति का उल्लेख किया गया। हालांकि, अंतिम आंकड़ों और सभी सीटों के आधिकारिक परिणामों के आधार पर ही कुल जीत की पुष्टि की जानी चाहिए।

विधान परिषद के शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव आम विधानसभा चुनावों से अलग होते हैं। इनमें शिक्षक, स्नातक, वकील, डॉक्टर और प्रोफेसर जैसे मतदाता समूहों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसलिए इन सीटों के नतीजे केवल राजनीतिक दलों की जीत-हार तक सीमित नहीं रहते, बल्कि संबंधित वर्गों के बीच उनकी स्वीकार्यता का संकेत भी देते हैं। उत्तर प्रदेश में सपा की बढ़त और वाराणसी में उसकी जीत, गोरखपुर में बीजेपी की करीबी विजय तथा नागपुर में कांग्रेस की सफलता ने इन चुनावों को राजनीतिक रूप से चर्चा का विषय बना दिया है।

 

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