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राहुल के समर्थन में अभिजीत दीपके, अमित शाह के इस्तीफे की मांग तेज

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब यह मुद्दा संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक चर्चा का विषय बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग किए […]

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  • July 31, 2026 12:23 pm IST, Published 54 minutes ago

नई दिल्ली। दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक विवाद लगातार गहराता जा रहा है। अब यह मुद्दा संसद से लेकर राज्यों की राजनीति तक चर्चा का विषय बन गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के इस्तीफे की मांग किए जाने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी इसी मांग का समर्थन किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं था और इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर लौटने के बाद मीडिया से बातचीत में अभिजीत दीपके ने कहा कि यदि छात्रों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर बल प्रयोग हुआ है तो इसकी जवाबदेही सरकार पर बनती है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए। उनके अनुसार लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और किसी भी तरह की कठोर कार्रवाई गंभीर सवाल खड़े करती है।

भिजीत दीपके ने राहुल गांधी के उस बयान का समर्थन किया जिसमें उन्होंने संसद के भीतर अमित शाह के इस्तीफे की मांग उठाई थी। दीपके का कहना था कि 20 जुलाई को आयोजित ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान छात्रों पर हुई कार्रवाई के आदेश शीर्ष स्तर से दिए गए होंगे। हालांकि उन्होंने इस संबंध में कोई प्रत्यक्ष साक्ष्य सार्वजनिक नहीं किया, लेकिन सरकार की भूमिका पर सवाल जरूर उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया कि देश में लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लगातार दबाव बढ़ रहा है और नागरिकों की आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने न्यायपालिका सहित विभिन्न संस्थानों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती के लिए सभी संस्थानों का स्वतंत्र और निष्पक्ष रहना आवश्यक है।

मीडिया द्वारा कॉकरोच जनता पार्टी को कथित विदेशी फंडिंग मिलने संबंधी चर्चाओं पर पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए दीपके ने कहा कि यदि किसी संगठन को बाहर से धन मिलने के आरोप सही हैं, तो इसकी जांच करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यदि ऐसी कोई गतिविधि वास्तव में हो रही है और सरकार उसे रोक नहीं पा रही है, तो यह संबंधित एजेंसियों और व्यवस्था की विफलता मानी जाएगी।

गौरतलब है कि जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन का मुख्य मुद्दा कथित नीट पेपर लीक प्रकरण था। प्रदर्शन में शामिल छात्रों और युवाओं ने परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों के लिए आर्थिक सहायता की मांग उठाई थी। साथ ही केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी मांग की गई थी।

इस पूरे घटनाक्रम के बाद राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। विपक्ष इस मामले को लोकतांत्रिक अधिकारों और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जोड़कर सरकार को घेरने की कोशिश कर रहा है, जबकि सरकार की ओर से अब तक इस संबंध में विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छात्रों से जुड़े मुद्दे अक्सर व्यापक जनसमर्थन हासिल करते हैं और ऐसे मामलों में सरकार तथा विपक्ष दोनों के रुख पर जनता की नजर रहती है। फिलहाल, जंतर-मंतर प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और उसके बाद उठे राजनीतिक सवालों ने एक बार फिर छात्र आंदोलनों, लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक जवाबदेही को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

 

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