नई दिल्ली। भारतीय ऑटोमोबाइल मार्केट में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) का दबदबा लगातार बढ़ता जा रहा है। साल 2026 में अब तक देश के भीतर रिकॉर्ड तोड़ इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री दर्ज की गई है। फ्रॉस्ट और सुलिवन (Frost & Sullivan) की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, पर्यावरण के प्रति बढ़ती जागरूकता, बेहतर रेंज और पेट्रोल की बढ़ती कीमतों के कारण लोग अब तेजी से ईवी सेगमेंट का रुख कर रहे हैं।
अनुमान है कि इस साल के खत्म होने तक भारत में ईवी कारों की कुल बिक्री 3 लाख यूनिट्स के बड़े आंकड़े को पार कर जाएगी।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत में चालू वर्ष 2026 में अब तक लगभग 1.5 लाख इलेक्ट्रिक वाहनों का रजिस्ट्रेशन हो चुका है।
हर महीने का औसत: पिछले चार महीनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो देश में हर महीने औसतन 27 हजार ईवी यूनिट्स का रजिस्ट्रेशन दर्ज किया जा रहा है।
बचे हुए महीनों का अनुमान: साल के बचे हुए महीनों में त्योहारी सीजन (फेस्टिव सीजन) की शुरुआत के साथ ही इस रफ्तार में और तेजी आने की उम्मीद है, जिससे 3 लाख का सालाना लक्ष्य आसानी से हासिल हो जाएगा।
ईवी बाजार में आ रही इस तेजी की सबसे बड़ी वजह ऑटोमोबाइल कंपनियों द्वारा लगातार नए मॉडल्स का लॉन्च किया जाना है। पिछले दो सालों में ही देश में ईवी मॉडल्स की संख्या दोगुनी हो चुकी है। राहत की बात यह है कि अगले वित्तीय वर्ष तक 15 लाख रुपये से कम कीमत वाले बजट सेगमेंट में करीब 35 से ज्यादा ईवी कारें बाजार में उपलब्ध होंगी।
पहले ग्राहकों के मन में ईवी को लेकर सबसे बड़ी चिंता यह रहती थी कि सिंगल चार्ज में गाड़ी कितनी दूर चलेगी। लेकिन अब कंपनियों ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है:
प्रीमियम ईवी: सिंगल चार्ज में 500 से 700 किलोमीटर तक की शानदार रेंज दे रही हैं।
सामान्य/बजट ईवी: अब मध्यम बजट की कारें भी आसानी से 300 से 450 किलोमीटर तक की रेंज ऑफर कर रही हैं, जिससे लोगों का डर खत्म हो गया है।
वैश्विक स्तर पर ईरान-इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) के कारण कच्चे तेल की कीमतों में अस्थिरता बनी हुई है। इसका सीधा असर भारत में पेट्रोल-डीजल के दामों पर दिख रहा है। मई के महीने में ही पारंपरिक पेट्रोल-डीजल (ICE) वाहनों की इनपुट लागत में 7 से 8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है, जिसके चलते लोग कम रनिंग कॉस्ट वाले ईवी वाहनों को पहली पसंद बना रहे हैं।