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देशभर में 12 लाख से ज्यादा मेडिकल स्टोर बंद

ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का हल्लाबोल; मरीजों की बढ़ी परेशानी नई दिल्ली/पटना। दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री (e-pharmacies) और कॉर्पोरेट कंपनियों के एकाधिकार व भारी डिस्काउंट (Deep Discounting) के विरोध में आज (20 मई) देशभर के करीब 12.4 लाख मेडिकल स्टोर बंद हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के […]

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  • May 20, 2026 12:12 pm IST, Published 13 hours ago

ऑनलाइन दवाओं की बिक्री के खिलाफ केमिस्टों का हल्लाबोल; मरीजों की बढ़ी परेशानी

नई दिल्ली/पटना। दवाओं की अवैध ऑनलाइन बिक्री (e-pharmacies) और कॉर्पोरेट कंपनियों के एकाधिकार व भारी डिस्काउंट (Deep Discounting) के विरोध में आज (20 मई) देशभर के करीब 12.4 लाख मेडिकल स्टोर बंद हैं। ऑल इंडिया ऑर्गनाइजेशन ऑफ केमिस्ट्स एंड ड्रगिस्ट्स (AIOCD) के इस राष्ट्रव्यापी बंद के आह्वान के बाद पंजाब, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार और चंडीगढ़ जैसे राज्यों में सुबह से ही अधिकांश निजी दवा दुकानें बंद दिखाई दीं।

हालांकि, संगठन ने पहले ही साफ किया था कि मरीजों की सहूलियत के लिए अस्पतालों से जुड़े मेडिकल स्टोर, सरकारी जन औषधि केंद्र और अमृत (AMRIT) फार्मेसी खुले रहेंगे, ताकि इमरजेंसी सेवाओं में रुकावट न आए। बावजूद इसके, कई बड़े अस्पतालों के बाहर निजी दुकानें बंद होने से मरीजों के परिजनों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पटना के IGIMS अस्पताल के बाहर दवा दुकानें बंद होने से तीमारदार भटकते नजर आए, वहीं चंडीगढ़ PGI में कश्मीर से इलाज कराने आए एक परिवार को दवा के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा।

केमिस्टों की 4 मुख्य मांगें

दवा दुकानदारों के इस देशव्यापी विरोध के पीछे 4 प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर वे सरकार से तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग कर रहे हैं:

  1. अवैध ऑनलाइन बिक्री पर रोक: बिना किसी कड़े नियम-कायदे के चल रही ई-फार्मेसी के कारण मोहल्ले की छोटी दुकानों का अस्तित्व खतरे में है। साथ ही बिना जांच के दवाएं बेचे जाने से लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है।

  2. विवादास्पद नियमों को वापस लेना: विवाद की मुख्य जड़ सरकार के दो नियम GSR 220(E) और GSR 817(E) हैं। संगठन का आरोप है कि ऑनलाइन कंपनियां इन नियमों की कमियों (Loop Holes) का फायदा उठाकर बिना कड़े नियंत्रण के व्यापार कर रही हैं, इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

  3. नकली पर्चियों (Fake Prescriptions) पर नियंत्रण: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर एआई (AI) जनित या पुरानी व फर्जी पर्चियों का इस्तेमाल कर धड़ल्ले से एंटीबायोटिक्स और नशीली दवाएं मंगवाई जा रही हैं। ई-फार्मेसी के लिए नए और बेहद सख्त रेगुलेशन बनाए जाएं।

  4. अस्वस्थ प्रतिस्पर्धा (Predatory Pricing) का खात्मा: बड़ी कॉर्पोरेट ऑनलाइन कंपनियां दवाओं पर 20% से लेकर 50% तक का भारी डिस्काउंट दे रही हैं। एक तय मार्जिन पर काम करने वाले छोटे लोकल दुकानदार इस वित्तीय नुकसान का मुकाबला नहीं कर सकते।

महामारी की छूट का दुरुपयोग: AIOCD के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगन्नाथ शिंदे के अनुसार, कोरोना महामारी के संकट काल में लोगों तक दवाएं पहुंचाने के लिए ऑनलाइन सप्लाई में जो विशेष ढील दी गई थी, उसका अब धड़ल्ले से गलत इस्तेमाल हो रहा है। देश के स्वास्थ्य और 5 करोड़ से ज्यादा आश्रितों वाले इस पारंपरिक व्यापार को बचाने के लिए अब इस छूट को वापस लेना बेहद जरूरी हो चुका है।

देश में मिला-जुला असर, कुछ संगठन नहीं दे रहे साथ

जहां एक तरफ असम, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में इस बंद का व्यापक असर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO) की समझाइश और सरकार के भरोसे के बाद पश्चिम बंगाल, केरल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश सहित करीब 12 राज्यों के कुछ रिटेल संगठनों ने खुद को इस हड़ताल से अलग रखने का फैसला भी किया है। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि केमिस्टों की मांगों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है और जल्द ही इस पर नीतिगत फैसला लिया जाएगा।

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