नोएडा में शुरू हुआ AC स्काईवॉक, अब 5 मिनट में मेट्रो स्टेशन

नोएडा: नोएडा में मेट्रो यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली-एनसीआर का पहला एसी स्काईवॉक अब यात्रियों के लिए शुरू कर दिया गया है। नोएडा अथॉरिटी ने रक्षाबंधन के मौके पर शुक्रवार को बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के इस स्काईवॉक को आम जनता के लिए खोल दिया। इसके शुरू होने के […]

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  • August 30, 2026 8:51 pm IST, Published 47 minutes ago

नोएडा: नोएडा में मेट्रो यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर सामने आई है। दिल्ली-एनसीआर का पहला एसी स्काईवॉक अब यात्रियों के लिए शुरू कर दिया गया है। नोएडा अथॉरिटी ने रक्षाबंधन के मौके पर शुक्रवार को बिना किसी औपचारिक उद्घाटन के इस स्काईवॉक को आम जनता के लिए खोल दिया। इसके शुरू होने के बाद सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों के बीच आने-जाने वाले यात्रियों को पहले के मुकाबले काफी सुविधा मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि जिस रास्ते को पैदल तय करने में यात्रियों को परेशानी होती थी, वह सफर अब करीब पांच मिनट में पूरा किया जा सकेगा।

नोएडा में शुरू किया गया यह स्काईवॉक सेक्टर-51 (एक्वा लाइन) और सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) मेट्रो स्टेशनों को जोड़ता है। दोनों स्टेशनों के बीच यात्रियों को पहले सड़क पार करने, भीड़भाड़ वाले रास्तों से गुजरने और ऑटो-ई-रिक्शा या अन्य साधनों पर निर्भर रहने जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। खासकर बारिश के दौरान यह सफर और मुश्किल हो जाता था। अब स्काईवॉक शुरू होने के बाद यात्रियों को एक सुरक्षित और अपेक्षाकृत सुविधाजनक पैदल कनेक्टिविटी मिल गई है।

दिल्ली-NCR का पहला AC स्काईवॉक शुरू

नोएडा अथॉरिटी की ओर से तैयार किया गया यह प्रोजेक्ट दिल्ली-एनसीआर में अपनी तरह का पहला एसी स्काईवॉक बताया गया है। इसे शुरू करने का उद्देश्य दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच यात्रियों की आवाजाही को आसान बनाना है। स्काईवॉक के चालू होने के बाद मेट्रो से सफर करने वाले लोगों को सड़क पर वाहनों के बीच से गुजरने या भीड़ वाले रास्ते का इस्तेमाल करने की जरूरत कम होगी।

रक्षाबंधन के मौके पर इसे यात्रियों के लिए खोल दिया गया। हालांकि, इसका औपचारिक उद्घाटन अभी नहीं हुआ है। नोएडा अथॉरिटी की सीईओ वंदना त्रिपाठी के अनुसार, स्काईवॉक के जरूरी काम पूरे होने के बाद इसे ट्रायल बेस पर खोलने के आदेश दिए गए। यात्रियों को सुविधा उपलब्ध कराने के लिए इसे फिलहाल बिना औपचारिक उद्घाटन के शुरू किया गया है।

इसका मतलब यह है कि आम लोग अब इस कनेक्टिविटी का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि आधिकारिक उद्घाटन बाद में किया जा सकता है। ट्रायल के दौरान यात्रियों की आवाजाही और तकनीकी व्यवस्था से जुड़े फीडबैक के आधार पर आवश्यक सुधार भी किए जा सकते हैं।

सेक्टर-51 से सेक्टर-52 मेट्रो पहुंचना होगा आसान

नोएडा में एक्वा लाइन और ब्लू लाइन मेट्रो यात्रियों के लिए सेक्टर-51 और सेक्टर-52 स्टेशन बेहद महत्वपूर्ण हैं। दोनों स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी लंबे समय से यात्रियों के लिए चुनौती रही है। मेट्रो बदलने वाले यात्रियों को स्टेशन से बाहर निकलकर पैदल रास्ते से दूसरे स्टेशन तक पहुंचना पड़ता था।

स्काईवॉक शुरू होने के बाद यह स्थिति काफी बदलने वाली है। अब यात्रियों को एक समर्पित पैदल मार्ग मिलेगा, जो दोनों स्टेशनों के बीच कनेक्टिविटी को आसान बनाएगा। खबर के मुताबिक, स्काईवॉक के जरिए यह दूरी करीब पांच मिनट में पूरी हो सकेगी।

यात्रियों के लिए इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि उन्हें सड़क पर मौजूद वाहनों और भीड़ के बीच से गुजरने की परेशानी कम होगी। इससे समय की बचत के साथ-साथ सफर अधिक व्यवस्थित होने की उम्मीद है।

करीब 460 मीटर लंबा है स्काईवॉक

इस स्काईवॉक की लंबाई करीब 460 मीटर बताई गई है। इसकी चौड़ाई लगभग छह मीटर है। यानी इसमें यात्रियों की आवाजाही के लिए पर्याप्त जगह रखी गई है। स्काईवॉक को दोनों मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने के उद्देश्य से तैयार किया गया है।

इस परियोजना के निर्माण पर करीब 33 करोड़ रुपये की लागत आई है। इतनी बड़ी लागत के पीछे प्रमुख उद्देश्य केवल दोनों स्टेशनों को जोड़ना नहीं, बल्कि यात्रियों के लिए बेहतर पैदल कनेक्टिविटी तैयार करना भी है।

स्काईवॉक में हर 50 मीटर पर कुल 10 ट्रैवलेटर लगाए गए हैं। ये स्वचालित सीढ़ियों/रैंप की तरह यात्रियों को आगे बढ़ने में मदद करेंगे। इससे विशेष रूप से उन लोगों को सुविधा मिल सकती है जिन्हें लंबी दूरी पैदल चलने में परेशानी होती है।

ट्रैवलेटर की सुविधा इस स्काईवॉक को सामान्य फुटओवर ब्रिज से अलग बनाती है। यात्रियों को पूरे रास्ते पैदल चलने के बजाय कई हिस्सों में स्वचालित मूविंग वॉकवे का लाभ मिल सकेगा।

पहले यात्रियों को किन परेशानियों से गुजरना पड़ता था?

स्काईवॉक शुरू होने से पहले सेक्टर-51 और सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशनों के बीच यात्रियों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता था। दोनों स्टेशनों के बीच जाने के लिए पैदल यात्रियों को संकरे और भीड़भाड़ वाले रास्तों से गुजरना पड़ता था। रास्ते में ऑटो और ई-रिक्शा समेत अन्य वाहनों की आवाजाही भी रहती थी।

इसके अलावा आसपास विक्रेताओं और सड़क किनारे की गतिविधियों के कारण पैदल यात्रियों को कई जगहों पर जगह की समस्या होती थी। ऐसे में मेट्रो से उतरने के बाद दूसरे स्टेशन तक पहुंचने में यात्रियों को असुविधा होती थी।

बारिश के मौसम में समस्या और बढ़ जाती थी। बारिश के दौरान पैदल सफर करना मुश्किल हो जाता था। यात्रियों को पानी, भीड़ और सड़क पर वाहनों के बीच से गुजरना पड़ता था। एसी स्काईवॉक शुरू होने के बाद यात्रियों को इन समस्याओं से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है।

यात्रियों का सफर अब होगा ज्यादा आरामदायक

एसी सुविधा इस स्काईवॉक की सबसे खास विशेषताओं में शामिल है। गर्मी के मौसम में लंबी दूरी पैदल तय करना यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बनता है। ऐसे में वातानुकूलित कनेक्टिविटी यात्रियों को राहत दे सकती है।

इसके साथ ही ट्रैवलेटर की सुविधा सफर को और आसान बनाएगी। मेट्रो से उतरने के बाद यात्रियों को एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन तक जाने के लिए ऑटो या ई-रिक्शा लेने की जरूरत कम पड़ सकती है।

इसका सीधा असर यात्रियों के समय और खर्च पर भी पड़ सकता है। खासकर रोजाना मेट्रो से आने-जाने वाले यात्रियों के लिए यह सुविधा काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

ट्रायल के दौरान यात्रियों के फीडबैक पर नजर

नोएडा अथॉरिटी की सीईओ वंदना त्रिपाठी के मुताबिक, स्काईवॉक के जरूरी काम पूरे होने के बाद इसे ट्रायल बेस पर खोलने के निर्देश दिए गए हैं। ट्रायल के दौरान यात्रियों से मिलने वाले फीडबैक के आधार पर तकनीकी टीम इसमें जरूरी सुधार कर सकती है।

इससे यह भी संकेत मिलता है कि स्काईवॉक को पूरी तरह नियमित व्यवस्था में शामिल करने से पहले उसके संचालन और यात्रियों की सुविधा से जुड़े पहलुओं को देखा जाएगा। ट्रायल के दौरान किसी तकनीकी या संचालन संबंधी कमी सामने आती है तो उसमें सुधार किया जा सकता है।

आधिकारिक उद्घाटन भी बाद में होने की संभावना बताई गई है। हालांकि, यात्रियों को इसका लाभ अभी से मिलना शुरू हो गया है।

मेट्रो कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार

सेक्टर-51 और सेक्टर-52 के बीच बेहतर कनेक्टिविटी नोएडा के सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क के लिए महत्वपूर्ण है। एक्वा लाइन और ब्लू लाइन से सफर करने वाले यात्रियों को दोनों स्टेशनों के बीच बेहतर पैदल संपर्क मिलने से इंटरचेंज आसान हो सकता है।

यह सुविधा खास तौर पर उन यात्रियों के लिए उपयोगी होगी जो रोजाना नोएडा और दिल्ली के बीच मेट्रो से सफर करते हैं। इसके अलावा आसपास के इलाकों से आने वाले यात्रियों को भी दोनों मेट्रो कॉरिडोर के बीच कनेक्शन लेने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

करीब 460 मीटर लंबे इस एसी स्काईवॉक में ट्रैवलेटर और वातानुकूलित सुविधा का संयोजन इसे यात्रियों के लिए आकर्षक बनाता है। करीब 33 करोड़ रुपये की लागत से तैयार यह परियोजना नोएडा में पैदल यात्री सुविधाओं को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा सकती है।

यात्रियों के लिए सबसे बड़ी राहत क्या?

कुल मिलाकर देखें तो नोएडा का नया एसी स्काईवॉक केवल दो मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला रास्ता नहीं है, बल्कि यात्रियों के सफर को आसान बनाने वाली महत्वपूर्ण कड़ी है। सेक्टर-51 से सेक्टर-52 मेट्रो स्टेशन तक करीब पांच मिनट में पहुंचने की सुविधा, एसी वातावरण और ट्रैवलेटर जैसी सुविधाएं यात्रियों के अनुभव को बेहतर कर सकती हैं।

रक्षाबंधन पर इसके खुलने के साथ ही लोगों को इसका इस्तेमाल करने का मौका मिल गया है। अब आने वाले दिनों में यात्रियों के फीडबैक से पता चलेगा कि यह नई सुविधा रोजाना के मेट्रो सफर में कितनी बड़ी राहत साबित होती है। फिलहाल इतना तय है कि जिस रास्ते को लेकर यात्रियों को लंबे समय से परेशानी उठानी पड़ती थी, वहां अब उन्हें आधुनिक और सुविधाजनक कनेक्टिविटी मिल गई है।

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