कानपुर में जहरीले चने पर चला बुलडोजर, 36,580 किलो नष्ट हुआ

कानपुर: खाने-पीने की चीजों में मिलावट और प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल को लेकर कानपुर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 36,580 किलोग्राम असुरक्षित भुना चना नष्ट कराया गया। जांच में चने में ऑरामाइन डाई (Auramine Dye) की मौजूदगी पाई गई थी। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बड़ी मात्रा […]

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  • August 28, 2026 7:20 pm IST, Published 1 hour ago

कानपुर: खाने-पीने की चीजों में मिलावट और प्रतिबंधित रसायनों के इस्तेमाल को लेकर कानपुर से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां करीब 36,580 किलोग्राम असुरक्षित भुना चना नष्ट कराया गया। जांच में चने में ऑरामाइन डाई (Auramine Dye) की मौजूदगी पाई गई थी। खाद्य सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों की कार्रवाई के बाद बड़ी मात्रा में चने को बुलडोजर की मदद से नष्ट कराया गया।

सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी के मुताबिक, यह कार्रवाई कानपुर में की गई। बताया गया कि जब्त किए गए चने की अनुमानित कीमत करीब 33.48 लाख रुपये थी। कोर्ट के आदेश के बाद नगर निगम के भैती डंपिंग यार्ड में इस सामग्री को नष्ट कराया गया। कार्रवाई के दौरान तीन सदस्यीय समिति भी मौके पर मौजूद रही।

जांच में चने में मिली ऑरामाइन डाई

मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात चने में ऑरामाइन डाई की मौजूदगी है। ऑरामाइन एक औद्योगिक रंग है, जिसका इस्तेमाल खाद्य पदार्थों को रंगने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। किसी खाद्य पदार्थ में ऐसे रंग की मौजूदगी खाद्य सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है।

भुने चने जैसे खाद्य पदार्थ आम तौर पर सीधे खाने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं। ऐसे में यदि इनमें अनधिकृत या हानिकारक रंग की मिलावट पाई जाती है तो उपभोक्ताओं की सुरक्षा का मुद्दा बेहद गंभीर हो जाता है। इसी वजह से जांच के बाद संबंधित सामग्री को नष्ट कराने की प्रक्रिया अपनाई गई।

36,580 किलो चना आखिर क्यों नष्ट कराया गया?

सामने आई जानकारी के अनुसार, बड़ी मात्रा में भुना चना जांच के दायरे में आया था। जांच के दौरान नमूनों में ऑरामाइन डाई की मौजूदगी मिलने के बाद इसे सुरक्षित खाद्य सामग्री नहीं माना गया। इसके बाद कानूनी प्रक्रिया के तहत इसे नष्ट करने का फैसला लिया गया।

रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 36,580 किलो चना नष्ट कराया गया। इतनी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री के नष्ट होने से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि मामला कितना बड़ा था। इसकी कीमत करीब 33.48 लाख रुपये बताई जा रही है।

यह कार्रवाई केवल एक खाद्य सामग्री को नष्ट करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता की निगरानी और मिलावट के खिलाफ कार्रवाई की जरूरत भी सामने आती है।

कोर्ट के आदेश के बाद हुई कार्रवाई

मामले में कार्रवाई न्यायिक प्रक्रिया से भी जुड़ी रही। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, कोर्ट के आदेश के बाद जब्त चने को नगर निगम के भैती डंपिंग यार्ड में ले जाकर नष्ट कराया गया। इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समिति भी मौजूद रही।

बुलडोजर की मदद से चने को नष्ट किए जाने की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला चर्चा में आ गया। तस्वीर में बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री के ढेर पर जेसीबी मशीन से कार्रवाई होती दिखाई दे रही है।

इस तरह की कार्रवाई का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना होता है कि जब्त की गई असुरक्षित खाद्य सामग्री दोबारा बाजार या उपभोक्ताओं तक न पहुंच सके।

ऑरामाइन डाई को लेकर क्यों उठते हैं सवाल?

खाद्य पदार्थों में रंग का इस्तेमाल कई बार उन्हें आकर्षक बनाने के लिए किया जाता है। लेकिन हर रंग खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल करने के लिए सुरक्षित नहीं होता। कुछ औद्योगिक रंगों का भोजन में इस्तेमाल नियमों के खिलाफ होता है।

ऑरामाइन डाई भी इसी वजह से चिंता का विषय बनती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ में ऐसा रंग पाया जाता है, तो खाद्य सुरक्षा अधिकारियों द्वारा उसकी जांच की जाती है। जांच में नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित खाद्य सामग्री को जब्त करने और नष्ट कराने जैसी कार्रवाई की जा सकती है।

उपभोक्ताओं के लिए भी यह मामला एक महत्वपूर्ण संदेश देता है कि केवल खाद्य पदार्थ का रंग, पैकिंग या दिखावट देखकर उसकी गुणवत्ता का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता।

मिलावटी खाद्य पदार्थों पर सख्ती की जरूरत

भारत में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत नियम बनाए गए हैं। बाजार में बिकने वाली खाद्य सामग्री में मिलावट या प्रतिबंधित पदार्थों के इस्तेमाल की शिकायत मिलने पर अधिकारियों द्वारा नमूने लिए जाते हैं और उन्हें जांच के लिए भेजा जा सकता है।

कानपुर में हुई यह कार्रवाई भी इसी तरह की निगरानी व्यवस्था के महत्व को सामने लाती है। यदि किसी खाद्य पदार्थ की बड़ी खेप असुरक्षित पाई जाती है, तो उसे बाजार में पहुंचने से रोकना उपभोक्ताओं के हित में महत्वपूर्ण कदम होता है।

हालांकि, इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई, जिम्मेदार व्यक्ति या प्रतिष्ठान पर लगाए गए दंड जैसी विस्तृत जानकारी संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से ही स्पष्ट होगी।

उपभोक्ताओं को भी रहना होगा सतर्क

खाद्य पदार्थ खरीदते समय उपभोक्ताओं को कुछ जरूरी सावधानियां बरतनी चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देना चाहिए। पैकेट बंद सामान खरीदते समय निर्माण और समाप्ति तिथि, पैकेजिंग, लेबल और अन्य जरूरी जानकारियां देखना महत्वपूर्ण है।

अगर किसी खाद्य पदार्थ का रंग असामान्य रूप से बहुत तेज है, उसमें अजीब गंध है या उसकी गुणवत्ता संदिग्ध लगती है, तो उसे खाने से बचना बेहतर है। किसी संदिग्ध खाद्य सामग्री की जानकारी संबंधित खाद्य सुरक्षा विभाग तक पहुंचाई जा सकती है।

33.48 लाख रुपये की सामग्री नष्ट होने से बड़ा सवाल

करीब 33.48 लाख रुपये मूल्य के बताए जा रहे चने का नष्ट होना इस पूरे मामले का सबसे बड़ा पहलू है। एक तरफ इतनी बड़ी मात्रा में खाद्य सामग्री बर्बाद हुई, वहीं दूसरी तरफ यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि इतनी बड़ी खेप बाजार तक पहुंचने से पहले उसकी गुणवत्ता की जांच किस स्तर पर हुई थी।

फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी राहत यही है कि जांच के बाद असुरक्षित बताई गई सामग्री को नष्ट कर दिया गया। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि संबंधित विभाग आगे क्या कानूनी कदम उठाता है और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदारी किस पर तय होती है।

निष्कर्ष: कानपुर में 36,580 किलो भुने चने को नष्ट किए जाने की कार्रवाई ने खाद्य पदार्थों में मिलावट और प्रतिबंधित रंगों के इस्तेमाल पर एक बार फिर ध्यान खींचा है। ऑरामाइन डाई की मौजूदगी पाए जाने के बाद की गई यह कार्रवाई उपभोक्ता सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, पूरे मामले की अंतिम जिम्मेदारी और कानूनी स्थिति आधिकारिक जांच व न्यायिक रिकॉर्ड के आधार पर ही स्पष्ट होगी।

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