यूपी में कुल्फी की छोटी डंडी पर CM पोर्टल पहुंची शिकायत

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय प्रशासन तक का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आमतौर पर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर सड़क, बिजली, पानी, कानून-व्यवस्था, राजस्व या सरकारी सेवाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज होती हैं, लेकिन इस बार एक व्यक्ति ने कुल्फी […]

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  • July 18, 2026 8:00 pm IST, Published 2 hours ago

फिरोजाबाद: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय प्रशासन तक का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। आमतौर पर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर सड़क, बिजली, पानी, कानून-व्यवस्था, राजस्व या सरकारी सेवाओं से जुड़ी शिकायतें दर्ज होती हैं, लेकिन इस बार एक व्यक्ति ने कुल्फी की छोटी डंडी को लेकर मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत दर्ज कर दी। शिकायत का विषय जितना अनोखा है, उतनी ही तेजी से यह मामला लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बन गया है।

जानकारी के अनुसार यह मामला फिरोजाबाद जिले के थाना पचोखरा क्षेत्र के ग्राम मरसेना का है। यहां रहने वाले धर्मवीर नामक व्यक्ति ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि उन्होंने 23 जून को टुंडला चौराहा स्थित हीरालाल की दुकान से चार कुल्फियां खरीदी थीं। कुल्फी खरीदने के बाद जब उन्होंने उसका रैपर हटाया तो पाया कि उसकी डंडी सामान्य कुल्फी की तुलना में काफी छोटी थी।

कुल्फी खाते समय हाथ से फिसलकर गिर गई

शिकायतकर्ता का कहना है कि कुल्फी की डंडी छोटी होने के कारण उसे ठीक से पकड़ना संभव नहीं हो सका। जैसे ही उन्होंने कुल्फी खाना शुरू किया, वह हाथ से फिसलकर जमीन पर गिर गई। इससे उन्हें आर्थिक नुकसान तो हुआ ही, साथ ही मानसिक रूप से भी असंतोष और ठगा हुआ महसूस हुआ।

धर्मवीर ने अपनी शिकायत में कहा कि यदि कुल्फी की डंडी सामान्य आकार की होती तो वह आसानी से कुल्फी खा सकते थे। उनका आरोप है कि उत्पाद की गुणवत्ता और उपयोगिता में कमी के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ा।

दुकान पर शिकायत करने पहुंचे तो हुआ विवाद

शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद वह संबंधित दुकान पर अपनी शिकायत लेकर पहुंचे। उनका कहना है कि वहां समस्या का समाधान करने के बजाय दुकान के कर्मचारियों ने उनके साथ अभद्र व्यवहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बात गंभीरता से नहीं सुनी गई और उन्हें संतोषजनक जवाब भी नहीं मिला।

धर्मवीर का कहना है कि यदि दुकान संचालक उनकी शिकायत पर उचित प्रतिक्रिया देते और समस्या का समाधान कर देते तो उन्हें मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल तक जाने की आवश्यकता नहीं पड़ती।

मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज कराई शिकायत

दुकान से निराश होकर शिकायतकर्ता ने मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर संबंधित अधिकारियों से मामले की जांच कराने और उचित कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने अपनी शिकायत में कहा है कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण उत्पाद मिलना उनका अधिकार है और यदि किसी उत्पाद में ऐसी कमी हो जिससे उपभोक्ता को नुकसान पहुंचे, तो उसकी जांच की जानी चाहिए।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ मामला

जैसे ही यह मामला लोगों के सामने आया, सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई। कई लोगों ने इसे बेहद अनोखी शिकायत बताते हुए मजाकिया अंदाज में प्रतिक्रियाएं दीं, जबकि कुछ लोगों का कहना है कि उपभोक्ता यदि किसी उत्पाद से संतुष्ट नहीं है तो शिकायत करना उसका अधिकार है, चाहे मामला छोटा ही क्यों न दिखाई दे।

कुछ यूजर्स ने टिप्पणी करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल का उद्देश्य गंभीर समस्याओं का समाधान करना है, वहीं अन्य लोगों का कहना है कि उपभोक्ता अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ना भी सकारात्मक संकेत है।

उपभोक्ता अधिकारों पर भी उठी चर्चा

इस घटना के बाद उपभोक्ता अधिकारों को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोई भी उपभोक्ता यदि किसी उत्पाद की गुणवत्ता, पैकेजिंग, मात्रा या उपयोगिता को लेकर असंतुष्ट है तो उसे संबंधित कंपनी, विक्रेता या उपभोक्ता आयोग के समक्ष शिकायत दर्ज कराने का अधिकार प्राप्त है।

हालांकि, यह भी माना जा रहा है कि शिकायत के लिए उचित मंच का चयन करना आवश्यक है ताकि प्रशासनिक संसाधनों का प्रभावी उपयोग हो सके।

प्रशासन की ओर से जांच की उम्मीद

फिलहाल शिकायत मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज होने के बाद संबंधित विभाग तक पहुंच चुकी है। नियमानुसार शिकायत का परीक्षण किया जाएगा और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों द्वारा तथ्यों की जांच की जा सकती है। अभी तक इस मामले में प्रशासन या संबंधित दुकान की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

चर्चा का विषय बना अनोखा मामला

फिरोजाबाद का यह मामला इस समय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। एक ओर इसे मुख्यमंत्री जनसुनवाई पोर्टल पर दर्ज हुई सबसे अनोखी शिकायतों में से एक माना जा रहा है, तो दूसरी ओर यह उपभोक्ता जागरूकता और शिकायत दर्ज कराने के अधिकार पर भी नई बहस छेड़ रहा है। अब सभी की निगाहें इस बात पर हैं कि जांच के बाद संबंधित अधिकारी क्या निष्कर्ष निकालते हैं और शिकायत पर क्या कार्रवाई होती है।

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