मठ के प्रबंधन का अनुभव प्रदेश के संचालन में मददगार: मुख्यमंत्री

नई दिल्ली,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन की विस्तृत तस्वीर पेश करते हुए कहा कि हमने अभी तक नींव को पुख्ता किया है, पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरा है। अब डबल इंजन की सरकार […]

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  • May 11, 2026 9:29 pm IST, Published 1 day ago

नई दिल्ली,  मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को नई दिल्ली में आयोजित सीआईआई की वार्षिक बिजनेस समिट-2026 में उत्तर प्रदेश के आर्थिक और औद्योगिक परिवर्तन की विस्तृत तस्वीर पेश करते हुए कहा कि हमने अभी तक नींव को पुख्ता किया है, पिछली सरकारों के पाप के गड्ढों को भरा है। अब डबल इंजन की सरकार को बुलेट ट्रेन की स्पीड से आगे बढ़ाने की बारी है। किसी भी राष्ट्र की आर्थिक प्रगति उसकी मैन्युफैक्चरिंग शक्ति पर निर्भर करती है। उद्योग और उद्यमिता मजबूत होंगे तो रोजगार, निवेश और समृद्धि स्वतः बढ़ेगी। दुनिया के अधिसंख्य संघर्षों और युद्धों के पीछे भी आर्थिक हित ही प्रमुख कारण रहे हैं। ऐसे में कोई भी देश अपने उद्यमियों की उपेक्षा नहीं कर सकता।

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भारत की आर्थिक और सामरिक शक्ति ही मानवता व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करेगी

सीएम योगी ने कहा कि आज का दिन बहुत महत्वपूर्ण है। 75 वर्ष पहले आज के दिन ही प्रथम ज्योतिर्लिंग सोमनाथ महादेव की प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद जी द्वारा पुनर्प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी। आज ही के दिन अटल जी ने पोखरण में परमाणु परीक्षण के माध्यम से ‘ऑपरेशन शक्ति’ का प्रदर्शन किया था। भारत की यह ताकत न केवल उसके सामर्थ्य का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक मानवता एवं कल्याण का मार्ग भी प्रशस्त करती है। जिसके पास शक्ति होगी, जो सामर्थ्यवान होगा, वही करुणा व मैत्री का मार्ग भी प्रशस्त कर पाएगा। केवल हाथ फैलाने, गिड़गिड़ाने से दुनिया हमें गंभीरता से नहीं लेगी। कोई हमारी बात नहीं मानेगा और न ही हम पर विश्वास करेगा।

अनेक प्रश्नचिह्न लगे थे उत्तर प्रदेश पर

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय ऐसा था, जब उत्तर प्रदेश अपनी पहचान के संकट से जूझ रहा था। प्रदेश का नाम सुनते ही लोग दूरी बना लेते थे। कानून व्यवस्था की स्थिति इतनी खराब थी कि हर वर्ष 300 से अधिक दंगे होते थे, गुंडा टैक्स वसूला जाता था और उद्यमी पलायन करने को मजबूर थे। उत्तर प्रदेश के नाम के आगे ‘उत्तर’ था, लेकिन स्वयं उसके ऊपर अनेक प्रश्नचिह्न लगे हुए थे। प्रदेश दंगों, माफिया राज, गुंडा टैक्स और पलायन की पहचान बन चुका था। यात्रा कर रहे लोग अंधेरा होते ही सड़कों पर गड्ढे दिखने पर समझ जाते थे कि यूपी का बॉर्डर आ गया है। 2017 से पहले यही उत्तर प्रदेश की पहचान बनी थी।

मठ का अनुभव प्रदेश के संचालन में सहायता कर रहा

मुख्यमंत्री ने बताया कि जब वह पहली बार सांसद बने थे और गोरखपुर के बंद पड़े फर्टिलाइजर कारखाने को शुरू कराने के लिए तत्कालीन केंद्रीय मंत्री से मिले, तो उनसे पूछा गया कि “यूपी में चुनाव जीतकर आए हैं, कितने लोगों का मर्डर हुआ था?” यह उस दौर के उत्तर प्रदेश की छवि थी। 2017 में प्रधानमंत्री ने जब उन्हें उत्तर प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी, तब उनके पास प्रशासनिक अनुभव नहीं था। सीएम योगी ने कहा कि मैं तो मठ चलाता था, लेकिन मठ प्रबंधन का अनुभव मुझे प्रदेश चलाने में बड़ी सहायता कर रहा है। क्योंकि किसी भी मठ का अपना एक अनुशासन होता है। समयबद्ध तरीके से कार्यक्रम संचालित होते हैं। वित्त का भी अनुशासन होता है और हर प्रकार की सुरक्षा के लिए भी उस अनुशासन को लागू करना पड़ता है। मैंने उसी अनुभव को प्रदेश प्रशासन में लागू किया। सबसे पहली प्राथमिकता सुरक्षा का वातावरण स्थापित करना था। रूल ऑफ लॉ को लागू करने, पॉलिसी पैरालिसिस समाप्त करने और सेक्टोरल पॉलिसी बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

कभी माफिया के लिए रोका गया था चीफ जस्टिस का काफिला

मुख्यमंत्री ने प्रयागराज का उदाहरण देते हुए कहा कि एक समय ऐसी स्थिति थी कि एक माफिया ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के काफिले तक को रुकवा दिया था। लेकिन आज उत्तर प्रदेश में कोई भी माफिया ऐसा दुस्साहस नहीं कर सकता। अब बेटियां सुरक्षित माहौल में स्कूल जा रही हैं और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पलायन करने वाले परिवार लौट रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कैराना का उल्लेख करते हुए कहा कि 2015 में एक व्यापारी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद पूरा परिवार प्रदेश छोड़कर चला गया। लेकिन अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के बाद वही परिवार वापस लौटा। किसी भी राज्य के विकास की पहली शर्त सुरक्षा का वातावरण है और सरकार का दायित्व है कि वह हर नागरिक को सुरक्षा प्रदान करे।

उद्योगों को ठोस सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षा के साथ-साथ सरकार ने कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों में व्यापक सुधार किए। किसानों की आत्महत्या रोकने, खेती को तकनीक से जोड़ने और एमएसएमई सेक्टर को मजबूत करने पर विशेष काम हुआ। सरकार ने बड़े निवेशों को आकर्षित करने के लिए लैंड बैंक तैयार किया और उद्योगों के लिए स्पष्ट नीतियां बनाई। 2018 में शुरू की गई वन डिस्ट्रिक्ट-वन प्रोडक्ट योजना आज प्रदेश के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक पहचान दिला रही है। ओडीओपी के माध्यम से डिजाइन, पैकेजिंग, तकनीक और ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया गया। 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां प्रदेश में रोजगार और उत्पादन का आधार बन चुकी हैं। एमएसएमई सेक्टर लगभग 3 करोड़ युवाओं को रोजगार दे रहा है। इसलिए यह सरकार की जिम्मेदारी है कि उद्योगों को सुरक्षा, कनेक्टिविटी और मजबूत सप्लाई चेन उपलब्ध कराई जाए।

सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को मिली वैश्विक पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्ष उत्तर प्रदेश में 156 करोड़ पर्यटक आए, जिनमें महाकुंभ में आए 66-67 करोड़ श्रद्धालु भी शामिल थे। काशी, अयोध्या, मथुरा-वृंदावन, विंध्याचल, नैमिषारण्य, बौद्ध और जैन सर्किट सहित प्रदेश की सांस्कृतिक-धार्मिक विरासत को विश्वस्तरीय पहचान दिलाने का कार्य किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश बीमारू राज्य की छवि से बाहर निकल चुका है और देश की अर्थव्यवस्था का ग्रोथ इंजन बनकर उभर रहा है।

इस अवसर पर सीआईआई के अध्यक्ष राजीव मेमानी, महानिदेशक चंद्रजीत बनर्जी, 15वें वित्त आयोग के अध्यक्ष एनके सिंह, प्रबंध निदेशक एवं सीईओ सेमटेल एवोनिक्स पुनीत कौरा, चेयरपर्सन आनंद ग्रुप अंजलि सिंह, अध्यक्ष हीरो एंटरप्राइजेज सुनील कांत मुंजाल, प्रबंध निदेशक त्रिवेणी टर्बाइन लिमिटेड निखिल सवानी, सह-संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक जुबिलेंट भरतिया ग्रुप एचएस भरतिया, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक जेके टायर एंड इंडस्ट्रीज डॉ. रघुपति सिंघानिया, सीएमडी सुब्रोस लि. श्रद्धा सूरी मारवाह, सीएमडी आईजीएल उमाशंकर भरतिया तथा सीआईआई से जुड़े अन्य उद्यमी मौजूद रहे।

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