गाजियाबाद-जेवर नमो भारत कॉरिडोर से सफर होगा आसान

नई दिल्ली/गाजियाबाद: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सार्वजनिक परिवहन को नई गति देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक प्रस्तावित नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के चरण में पहुंच चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद […]

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  • July 9, 2026 11:15 pm IST, Published 1 hour ago

नई दिल्ली/गाजियाबाद: राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सार्वजनिक परिवहन को नई गति देने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया जा रहा है। गाजियाबाद से नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक प्रस्तावित नमो भारत (RRTS) कॉरिडोर अब विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के चरण में पहुंच चुका है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के पूरा होने के बाद गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक की यात्रा महज 40 से 50 मिनट में पूरी की जा सकेगी। इससे लाखों यात्रियों, नौकरीपेशा लोगों, छात्रों और व्यापारिक गतिविधियों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) के अनुसार इस परियोजना पर तेजी से कार्य किया जा रहा है। परियोजना का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर में आधुनिक, तेज, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था उपलब्ध कराना है। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के संचालन के साथ यह कॉरिडोर क्षेत्र की कनेक्टिविटी को नई ऊंचाई देगा।

प्रस्तावित कॉरिडोर गाजियाबाद से शुरू होकर नोएडा, ग्रेटर नोएडा, यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (YEIDA) क्षेत्र से गुजरते हुए जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट तक पहुंचेगा। इस पूरे मार्ग पर 12 स्टेशन और 2 डिपो विकसित किए जाने का प्रस्ताव है। यात्रियों को एयरपोर्ट तक पहुंचने के लिए तेज, सुविधाजनक और समयबद्ध परिवहन उपलब्ध होगा।

परियोजना के तहत चलने वाली नमो भारत ट्रेनें लगभग 180 किलोमीटर प्रति घंटे की अधिकतम गति से संचालित की जा सकेंगी। इससे यात्रा का समय काफी कम होगा और सड़क मार्ग पर बढ़ते ट्रैफिक का दबाव भी घटेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कॉरिडोर दिल्ली-एनसीआर की परिवहन व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है।

प्रस्तावित स्टेशनों में गाजियाबाद, गाजियाबाद साउथ, ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-4, ग्रेटर नोएडा वेस्ट सेक्टर-2, नॉलेज पार्क-5, सूरजपुर, परी चौक, इकोटेक-6, दनकौर, YEIDA नॉर्थ सेक्टर-18, YEIDA सेंट्रल सेक्टर-21 और जेवर एयरपोर्ट शामिल हैं। इन स्टेशनों के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों, आवासीय टाउनशिप, शैक्षणिक संस्थानों और एयरपोर्ट के बीच बेहतर संपर्क स्थापित होगा।

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को देश के सबसे बड़े और आधुनिक हवाई अड्डों में शामिल किया जा रहा है। ऐसे में एयरपोर्ट तक तेज रेल कनेक्टिविटी की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही थी। नमो भारत कॉरिडोर इस आवश्यकता को पूरा करेगा और यात्रियों को निजी वाहनों पर निर्भर रहने की जरूरत कम होगी।

परिवहन विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से गाजियाबाद, नोएडा और ग्रेटर नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर को भी नई गति मिलेगी। जिन क्षेत्रों से यह कॉरिडोर गुजरेगा, वहां आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की मांग बढ़ने की संभावना है। साथ ही औद्योगिक निवेश को भी बढ़ावा मिलेगा।

यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक क्षेत्र में तेजी से विकसित हो रहे इलेक्ट्रॉनिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेक्टर को इस परियोजना से सीधा लाभ मिलेगा। उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। इसके अलावा पर्यटकों और व्यवसायिक यात्रियों के लिए भी एयरपोर्ट तक पहुंचना पहले की तुलना में कहीं अधिक आसान हो जाएगा।

यह परियोजना पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बड़ी संख्या में लोग यदि सड़क परिवहन के बजाय तेज रेल सेवा का उपयोग करेंगे तो वाहनों से होने वाले प्रदूषण और ईंधन की खपत में कमी आएगी। इससे ट्रैफिक जाम की समस्या भी काफी हद तक कम हो सकती है।

NCRTC पहले से दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर पर सफलतापूर्वक कार्य कर रहा है। इसी अनुभव के आधार पर गाजियाबाद-जेवर कॉरिडोर को भी आधुनिक तकनीक और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप विकसित किए जाने की योजना है। यात्रियों को एयरपोर्ट स्तर की सुविधाएं, डिजिटल टिकटिंग, बेहतर सुरक्षा व्यवस्था और आरामदायक यात्रा का अनुभव मिलेगा।

विशेषज्ञों का कहना है कि जेवर एयरपोर्ट के पूर्ण रूप से संचालित होने के बाद यात्रियों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। ऐसे में यह कॉरिडोर एयरपोर्ट तक निर्बाध और समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करेगा। इससे दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न शहरों के बीच आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी।

हालांकि परियोजना अभी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) के चरण में है, लेकिन इसके आगे बढ़ने से यह स्पष्ट संकेत मिल रहा है कि आने वाले वर्षों में दिल्ली-एनसीआर का परिवहन नेटवर्क और अधिक आधुनिक तथा एकीकृत होगा। यदि सभी प्रक्रियाएं समय पर पूरी होती हैं, तो गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक की यात्रा पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक बन जाएगी।

यह परियोजना केवल एक परिवहन सुविधा नहीं बल्कि दिल्ली-एनसीआर के भविष्य के विकास, औद्योगिक विस्तार, पर्यटन, रोजगार और आर्थिक प्रगति की दिशा में एक महत्वपूर्ण आधारशिला साबित हो सकती है। लाखों लोगों को इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है।

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