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हाईकोर्ट ने कारोबारी की गिरफ्तारी रद्द की, अवैध हिरासत पर ₹10 हजार मुआवजा

गिरफ्तारी को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना, हाईकोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के आधार कानून के अनुरूप नहीं बताए गए, जिससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

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  • September 28, 2026 3:01 pm IST, Published 2 hours ago

प्रयागराज/चित्रकूट। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गोरखपुर के कारोबारी राघवेंद्र दुबे की गिरफ्तारी और हिरासत के मामले में गंभीर अनियमितताओं पर कड़ा रुख अपनाते हुए हैबियस कॉर्पस याचिका संख्या 1169/2026 स्वीकार कर ली। न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन एवं न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने 23 सितंबर 2026 को गिरफ्तारी निरस्त करते हुए निर्देश दिया कि यदि राघवेंद्र दुबे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं, तो उन्हें तत्काल रिहा किया जाए।

गिरफ्तारी की कहानी और सरकारी रिकॉर्ड में विरोधाभास: पुलिस ने गिरफ्तारी 13 जुलाई 2026 को दोपहर 3:30 बजे राजापुर स्थित यमुना पुल के पास दर्शाई थी, जबकि CCTV फुटेज के अनुसार कारोबारी को उसी दिन सुबह करीब 9 बजे सरधुवा थाने लाया गया था। फुटेज में सुबह 10:19 बजे उन्हें विवेचक के साथ थाने से बाहर जाते और रात 8:24 बजे वापस आते देखा गया। अदालत ने CCTV फुटेज और जनरल डायरी में दर्ज घटनाक्रम के बीच गंभीर विसंगतियां पाईं। आदेश में शिकायतकर्ता की गाड़ी के इस्तेमाल का उल्लेख भी किया गया है।

CCTV फुटेज जानबूझकर गायब किए जाने पर गंभीर निष्कर्ष: थाने के भीतर लगे तीन कैमरों की फुटेज उपलब्ध नहीं थी। पुलिस ने इसे कंप्यूटर ऑपरेटर की चूक बताया, लेकिन हाईकोर्ट ने इस स्पष्टीकरण को अस्वीकार करते हुए निष्कर्ष दर्ज किया कि फुटेज जानबूझकर डिलीट की गई या जानबूझकर सुरक्षित नहीं की गई। न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर याचिकाकर्ता के पक्ष में मजबूत प्रतिकूल अनुमान भी व्यक्त किया।

गिरफ्तारी को संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन माना, हाईकोर्ट ने पाया कि गिरफ्तारी के आधार कानून के अनुरूप नहीं बताए गए, जिससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत प्रदत्त अधिकारों का उल्लंघन हुआ।

कथित घटना 15 जून 2021 की थी, जबकि FIR 9 मई 2026 को दर्ज की गई थी। न्यायालय ने मामले की पृष्ठभूमि में व्यावसायिक लेन-देन के विवाद को भी रेखांकित किया। पुलिस अधिकारियों का निलंबन और मुआवजा: मामले के पूर्व आदेश के तहत थाना प्रभारी और विवेचक जमाल अहमद के निलंबन की कार्रवाई हुई थी। वर्तमान आदेश में हाईकोर्ट ने अवैध हिरासत के लिए राघवेंद्र दुबे को ₹10,000 मुआवजा देने तथा जांच के बाद जिम्मेदार व्यक्ति से राशि वसूलने का निर्देश दिया।

पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था पर व्यापक निर्देश: हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में CCTV सिस्टम को 24 घंटे चालू रखने, तकनीकी खराबी की स्थिति में जनरल डायरी में प्रविष्टि करने, वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित सूचना देने तथा CCTV बंद रहने के दौरान थाने लाए और छोड़े गए व्यक्तियों का विवरण दर्ज करने के निर्देश दिए। न्यायालय का यह आदेश गिरफ्तारी की वैधानिक प्रक्रिया, पुलिस हिरासत में पारदर्शिता और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण की जवाबदेही को रेखांकित करता है।

 

 

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