• होम
  • उत्तर प्रदेश
  • यूपी में होम स्टे नीति को मंजूरी, ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

यूपी में होम स्टे नीति को मंजूरी, ग्रामीण पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में आठ कमरों तक के होम स्टे संचालन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव कराना है, […]

Advertisement
Gauravshali Bharat
Gauravshali Bharat News
  • June 24, 2026 9:00 pm IST, Published 1 hour ago

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार ने ग्रामीण पर्यटन और स्थानीय रोजगार को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। नई व्यवस्था के तहत अब राज्य में आठ कमरों तक के होम स्टे संचालन को प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य पर्यटकों को स्थानीय संस्कृति, खान-पान और ग्रामीण जीवनशैली का अनुभव कराना है, साथ ही ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि सुनिश्चित करना भी है।

राज्य सरकार की नई नीति के अनुसार, जिन लोगों के पास पर्याप्त आवासीय सुविधा है, वे अपने घरों को होम स्टे के रूप में पंजीकृत कर पर्यटकों को ठहराने की सुविधा दे सकेंगे। इससे पर्यटन क्षेत्र का विस्तार होगा और उन क्षेत्रों तक भी पर्यटकों की पहुंच बढ़ेगी, जहां बड़े होटल या रिसॉर्ट उपलब्ध नहीं हैं। सरकार का मानना है कि यह मॉडल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।

विशेषज्ञों के अनुसार, होम स्टे व्यवस्था दुनियाभर में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। पर्यटक अब केवल होटल में रुकने के बजाय स्थानीय लोगों के बीच रहकर उस क्षेत्र की संस्कृति और परंपराओं को समझना चाहते हैं। उत्तर प्रदेश की नई नीति इसी बदलती पर्यटन प्रवृत्ति को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

राज्य के पर्यटन विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अतिरिक्त आय का स्रोत मिलेगा। जिन परिवारों के घरों में खाली कमरे हैं, वे उन्हें पर्यटकों के लिए उपलब्ध कराकर आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकेंगे। इससे युवाओं को भी रोजगार के नए अवसर मिलेंगे, क्योंकि होम स्टे संचालन में गाइड, परिवहन, स्थानीय हस्तशिल्प और खान-पान जैसी सेवाओं की मांग बढ़ेगी।

उत्तर प्रदेश में पहले से ही कई प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक पर्यटन स्थल मौजूद हैं। अयोध्या, वाराणसी, मथुरा, प्रयागराज, चित्रकूट, कुशीनगर और विंध्य क्षेत्र जैसे स्थान हर वर्ष लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। नई होम स्टे नीति के लागू होने से इन क्षेत्रों के आसपास रहने वाले लोगों को सीधे तौर पर लाभ मिलने की उम्मीद है।

पर्यटन विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से पर्यटकों को अधिक किफायती और व्यक्तिगत अनुभव मिलेगा। होटल की तुलना में होम स्टे में ठहरने वाले लोगों को स्थानीय भोजन, लोक संस्कृति और पारंपरिक जीवनशैली को करीब से जानने का अवसर मिलता है। इससे पर्यटन का अनुभव अधिक यादगार बनता है।

सरकार द्वारा पंजीकरण प्रक्रिया को सरल बनाने और आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की भी तैयारी की जा रही है। सुरक्षा, स्वच्छता और बुनियादी सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए होम स्टे संचालकों को कुछ मानकों का पालन करना होगा। इससे पर्यटकों को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिल सकेंगी।

नई नीति से ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास को भी गति मिलने की संभावना है। बेहतर सड़क, इंटरनेट, स्वच्छता और अन्य सुविधाओं की मांग बढ़ने से स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों को इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का अवसर मिलेगा। इससे समग्र विकास को बढ़ावा मिलेगा।

पर्यटन उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यह निर्णय राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक साबित हो सकता है। स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ने के साथ-साथ छोटे व्यवसायों को भी फायदा होगा। हस्तशिल्प, पारंपरिक उत्पाद, स्थानीय भोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों को नया बाजार मिलेगा।

कुल मिलाकर, उत्तर प्रदेश सरकार की यह पहल पर्यटन को जनभागीदारी से जोड़ने का प्रयास है। यदि इसका प्रभावी क्रियान्वयन किया जाता है, तो यह ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने, स्थानीय रोजगार सृजित करने और राज्य के पर्यटन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। नई होम स्टे व्यवस्था से न केवल पर्यटकों को बेहतर अनुभव मिलेगा, बल्कि गांवों की आर्थिक स्थिति को भी मजबूती मिलेगी।

Advertisement