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शुभांशु शुक्ल के अंतरिक्ष अनुभवों से जुड़ा पाठ अब यूपी के स्कूलों में

स्तक के आठवें अध्याय ‘वस्त्र-वस्तुएं कैसे निर्मित होती हैं?’ में भी बदलाव किए जा रहे हैं। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की अलग-अलग पारंपरिक बुनाई और वस्त्र कला के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसमें तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी, कश्मीर की पश्मीना, ओडिशा और गुजरात की इकत बुनाई तथा...

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  • September 24, 2026 1:55 pm IST, Published 1 hour ago

प्रयागराज: उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में कक्षा पांच के विद्यार्थियों को अब अंतरिक्ष यात्री ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल की उपलब्धियों और अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के उनके अनुभवों के बारे में पढ़ने का मौका मिलेगा। इसके लिए पर्यावरण विषय की पुस्तक ‘हमारा अद्भुत संसार’ में उत्तर प्रदेश के संदर्भ के अनुरूप बदलाव किए जा रहे हैं। यह किताब मूल रूप से एनसीईआरटी की है, लेकिन राज्य शिक्षा संस्थान स्थानीय जरूरतों और संदर्भों को ध्यान में रखते हुए इसमें आवश्यक संशोधन कर रहा है। संशोधित पाठ्य सामग्री नए शैक्षणिक सत्र 2027 से विद्यार्थियों को उपलब्ध कराए जाने की तैयारी है।

कक्षा पांच की इस पुस्तक में कुल 10 अध्याय हैं। इसमें 10वां अध्याय ‘पृथ्वी हम सब का घर’ है। इसी पाठ में विद्यार्थियों को पृथ्वी, पर्यावरण और अंतरिक्ष से जुड़े विषयों के साथ ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ल के बारे में जानकारी दी जाएगी। पाठ की शुरुआत अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के उनके अनुभव से जुड़े विचारों से होगी। इसमें बताया जाएगा कि अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने पर उसकी कोई राजनीतिक या भौगोलिक सीमा दिखाई नहीं देती। पृथ्वी एक साझा घर की तरह नजर आती है और सभी मनुष्य एक ही मानव समुदाय का हिस्सा दिखाई देते हैं।

पाठ में शुभांशु शुक्ल के विचारों के माध्यम से बच्चों को यह समझाने का प्रयास किया जाएगा कि पृथ्वी को सीमाओं से अलग हटकर देखने पर पूरी दुनिया एक इकाई के रूप में दिखाई देती है। पाठ में उनके प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ साझा किए गए अनुभव का भी उल्लेख किया गया है। जब उनसे अंतरिक्ष से भारत के दिखाई देने को लेकर सवाल किया गया था, तो उन्होंने ‘सारे जहां से अच्छा’ कहकर अपने अनुभव को व्यक्त किया था। पुस्तक में इस प्रसंग को बच्चों के लिए सरल और शैक्षिक तरीके से शामिल किया जा रहा है।

संशोधित सामग्री में शुभांशु शुक्ल के व्यक्तिगत परिचय को भी जगह दी गई है। विद्यार्थियों को बताया जाएगा कि उनका जन्म लखनऊ में हुआ था। भारतीय वायु सेना के ग्रुप कैप्टन के रूप में उनकी पहचान के साथ उन्हें अंतरिक्ष यात्री के तौर पर भी पाठ में प्रस्तुत किया जाएगा। अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने के अनुभव के माध्यम से बच्चों को पर्यावरण संरक्षण, मानवता और पृथ्वी को साझा घर मानने की अवधारणा से जोड़ने की कोशिश की जाएगी।

राज्य शिक्षा संस्थान की ओर से पुस्तक के दूसरे अध्यायों में भी उत्तर प्रदेश और भारत के अलग-अलग हिस्सों से जुड़े उदाहरण जोड़े जा रहे हैं। ‘हमारा जीवंत देश’ पाठ में बच्चों को देश के प्रतीक चिह्न से परिचित कराया जाएगा। इसमें चार शेरों वाले राष्ट्रीय प्रतीक की जानकारी दी जाएगी, जिसमें शेरों को अलग-अलग दिशाओं की ओर मुख किए हुए दिखाया गया है। इस तरह पाठ्य सामग्री में सामान्य जानकारी के साथ देश के राष्ट्रीय प्रतीकों से संबंधित विषय भी शामिल किए जा रहे हैं।

पुस्तक के आठवें अध्याय ‘वस्त्र-वस्तुएं कैसे निर्मित होती हैं?’ में भी बदलाव किए जा रहे हैं। इस पाठ के माध्यम से विद्यार्थियों को भारत की अलग-अलग पारंपरिक बुनाई और वस्त्र कला के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसमें तमिलनाडु की कांजीवरम साड़ी, कश्मीर की पश्मीना, ओडिशा और गुजरात की इकत बुनाई तथा उत्तर प्रदेश की बनारसी साड़ी को उदाहरण के तौर पर शामिल किया जाएगा। इसका उद्देश्य बच्चों को देश के विभिन्न क्षेत्रों की पारंपरिक वस्त्र निर्माण प्रक्रियाओं और स्थानीय शिल्प से परिचित कराना है।

राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य राजेंद्र प्रताप के अनुसार, प्रदेश के बेसिक स्कूलों में एनसीईआरटी की पुस्तकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। आवश्यकता के अनुसार इन किताबों को उत्तर प्रदेश के सामाजिक, भौगोलिक और सांस्कृतिक संदर्भों से जोड़ा जाता है। इसी प्रक्रिया के तहत कक्षा पांच की पर्यावरण विषय की ‘हमारा अद्भुत संसार’ पुस्तक में भी संशोधन किया जा रहा है।

नई पाठ्य सामग्री में स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर के उदाहरणों को शामिल करने के साथ विद्यार्थियों के लिए विषयों को अधिक संदर्भपूर्ण बनाने का प्रयास किया गया है। अंतरिक्ष से पृथ्वी को देखने वाले शुभांशु शुक्ल के अनुभव को शामिल किए जाने से बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान के साथ पर्यावरण और मानवता से जुड़े विचारों को समझने का अवसर मिलेगा। वहीं देश के अलग-अलग राज्यों के पारंपरिक वस्त्रों का उल्लेख विद्यार्थियों को भारत की विविध शिल्प परंपराओं से परिचित कराएगा। संशोधित पुस्तक नए सत्र 2027 में उत्तर प्रदेश के बेसिक स्कूलों में कक्षा पांच के विद्यार्थियों के पाठ्यक्रम का हिस्सा बनने की योजना है।

 

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