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राम नाथ कोविन्द की आत्मकथा लॉन्च, योगी बोले संघर्ष और संकल्प की प्रेरक कहानी

राम नाथ कोविन्द ने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। उनके कार्यकाल और सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक जिम्मेदारियों का विशेष महत्व रहा। राष्ट्रपति पद तक पहुंचने से पहले उन्होंने कानून, राजनीति और प्रशासन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। उनके जीवन की कहानी में शिक्षा, सामाजिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक सेवा के बीच...

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  • October 14, 2026 12:41 pm IST, Published 49 minutes ago

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पूर्व राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द के जीवन संघर्ष को प्रेरणादायक बताते हुए कहा कि उनका सफर अभावों से निकलकर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की मिसाल है। लखनऊ में कोविन्द की आत्मकथा ‘भारतीय गणतंत्र की विजयगाथा: मेरा जीवन, मेरा संघर्ष’ के विमोचन समारोह को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने उनके शुरुआती जीवन, शिक्षा, सामाजिक सरोकारों और सार्वजनिक सेवा के सफर का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों के बावजूद कोविन्द ने अपने जीवन में आगे बढ़ने का रास्ता चुना और अपनी पृष्ठभूमि को कभी बाधा नहीं बनने दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि उन्हें राम नाथ कोविन्द के पैतृक गांव परौंख जाने के कई अवसर मिले हैं। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री भी इस गांव का दौरा कर चुके हैं। योगी के अनुसार, कोविन्द का जन्म एक बेहद साधारण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार में हुआ था। बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया, जिससे उनके जीवन की शुरुआती परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो गईं। इसके बावजूद उन्होंने कठिनाइयों को अपनी प्रगति के रास्ते में रुकावट नहीं बनने दिया।

योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोविन्द ने गांव के विद्यालय से शिक्षा प्राप्त की और आगे चलकर उच्च शिक्षा हासिल की। इसके बाद उन्होंने वकालत के क्षेत्र में काम किया और समाज के वंचित तथा आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों से जुड़े लोगों की आवाज उठाने का प्रयास किया। मुख्यमंत्री ने उनके जीवन को इस बात का उदाहरण बताया कि दृढ़ संकल्प, शिक्षा और निरंतर मेहनत के सहारे व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर सकता है।

समारोह में मुख्यमंत्री ने कोविन्द की राजनीतिक और संवैधानिक यात्रा का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि कोविन्द भारतीय जनता पार्टी से जुड़े और संगठन में विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं। इसके बाद वे राज्यसभा के सदस्य बने और फिर बिहार के राज्यपाल के पद पर पहुंचे। आगे चलकर उन्होंने देश के राष्ट्रपति के रूप में जिम्मेदारी संभाली। योगी ने कहा कि एक सामान्य ग्रामीण परिवेश से निकलकर राष्ट्रपति भवन तक पहुंचना उनके लंबे संघर्ष और सार्वजनिक जीवन में निरंतर सक्रियता को दर्शाता है।

राम नाथ कोविन्द ने भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में कार्य किया था। उनके कार्यकाल और सार्वजनिक जीवन में संवैधानिक जिम्मेदारियों का विशेष महत्व रहा। राष्ट्रपति पद तक पहुंचने से पहले उन्होंने कानून, राजनीति और प्रशासन से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में काम किया। उनके जीवन की कहानी में शिक्षा, सामाजिक पृष्ठभूमि और सार्वजनिक सेवा के बीच संबंध को समझने के कई पहलू मौजूद हैं।

आत्मकथा के विमोचन का अवसर किसी भी सार्वजनिक व्यक्तित्व के जीवन के अनुभवों, निर्णयों और संघर्षों को व्यापक पाठक वर्ग तक पहुंचाने का माध्यम होता है। ऐसी पुस्तकों के जरिए पाठकों को यह जानने का अवसर मिलता है कि संबंधित व्यक्ति ने अपने जीवन में किन परिस्थितियों का सामना किया और सार्वजनिक जिम्मेदारियों को निभाते समय किन अनुभवों से गुजरा। कोविन्द की आत्मकथा का शीर्षक भी उनके जीवन और संघर्ष के अनुभवों पर केंद्रित है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में कोविन्द के सफर को उन लोगों के लिए प्रेरणा से जुड़ा बताया, जो सीमित संसाधनों के बीच शिक्षा और मेहनत के सहारे आगे बढ़ना चाहते हैं। उनके मुताबिक, कोविन्द ने शुरुआती कठिनाइयों को अपने लिए विशेष सुविधा मांगने का आधार बनाने के बजाय आगे बढ़ने की प्रेरणा के रूप में लिया। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि गांव के स्कूल से पढ़ाई शुरू कर देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद तक पहुंचने की उनकी यात्रा भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में उपलब्ध अवसरों को दर्शाती है। लखनऊ में आयोजित यह कार्यक्रम पूर्व राष्ट्रपति के जीवन और अनुभवों को सामने लाने के साथ-साथ उनकी सार्वजनिक यात्रा पर चर्चा का अवसर भी बना। आत्मकथा के माध्यम से पाठकों को उनके निजी संघर्ष, शिक्षा, पेशेवर जीवन और संवैधानिक भूमिकाओं से जुड़े अनुभवों को जानने का अवसर मिलेगा।

 

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